दुबई की चमकदार स्काइलाइन में खड़ा Burj Khalifa सिर्फ इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं है—यह उस कार्य-संस्कृति का भी प्रतीक है, जिसे दुनिया भर के टैलेंट ने मिलकर बनाया है। इसी प्रोजेक्ट के पीछे खड़ी कंपनी Emaar Properties के फाउंडर Mohamed Alabbar ने हाल ही में भारतीय कर्मचारियों की जिस तरह सराहना की, उसने ग्लोबल वर्क-एथिक्स पर नई बहस छेड़ दी है।
अबू धाबी में आयोजित Make it in the Emirates के मंच से अलाब्बर ने कहा—“मैं हमेशा मेहनत में विश्वास करता हूं… और यही वजह है कि मुझे भारतीयों को नौकरी देना पसंद है। वे रात 1 बजे भी फोन उठा लेते हैं।” यह बयान सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि वैश्विक कंपनियों में भारतीय टैलेंट की बढ़ती साख का संकेत है।
भारतीय कर्मचारियों की खासियत: सिर्फ मेहनत नहीं, भरोसेमंद डिलीवरी
अलाब्बर का बयान एक स्टीरियोटाइप को मजबूत करता दिख सकता है, लेकिन इसके पीछे ठोस बिजनेस लॉजिक है। बड़ी कंपनियां उन कर्मचारियों को प्राथमिकता देती हैं जो सिर्फ टास्क पूरा नहीं करते, बल्कि जिम्मेदारी लेते हैं और समय की बाधा के बिना परिणाम देते हैं।
भारतीय कर्मचारियों के बारे में अक्सर तीन बातें सामने आती हैं:
पहली—उच्च अनुकूलन क्षमता (Adaptability)। चाहे टाइम ज़ोन बदलना हो, नई टेक्नोलॉजी सीखनी हो या मल्टी-टास्किंग करनी हो, भारतीय प्रोफेशनल्स जल्दी ढल जाते हैं।
दूसरी—लंबे समय तक काम करने की मानसिक तैयारी। यह केवल “लंबे घंटे” नहीं, बल्कि डेडलाइन-ड्रिवन कल्चर है, जहां काम पूरा करना प्राथमिकता होती है।
तीसरी—कॉस्ट-इफिशिएंट प्रोडक्टिविटी। वैश्विक कंपनियों के लिए यह एक बड़ा फैक्टर है—उन्हें कुशल काम और लागत के बीच संतुलन मिलता है।
इसी वजह से UAE, US और यूरोप की कंपनियों में भारतीय टैलेंट की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
“हार्ड वर्क vs टैलेंट”: अलाब्बर का स्पष्ट संदेश
Mohamed Alabbar ने अपने भाषण में एक दिलचस्प बात कही—“मेरा IQ औसत है, लेकिन मेरी मेहनत सबसे बेहतर है।” यह लाइन सिर्फ मोटिवेशनल नहीं है; यह आधुनिक बिजनेस की हकीकत को दर्शाती है।
आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में केवल प्रतिभा (Talent) पर्याप्त नहीं है। कंपनियां ऐसे लोगों को आगे बढ़ाती हैं जो:
- लगातार प्रदर्शन करते हैं
- दबाव में निर्णय ले सकते हैं
- टीम को साथ लेकर चलते हैं
अलाब्बर ने एक पुरानी कहावत भी दोहराई—“जब प्रतिभा मेहनत नहीं करती, तो मेहनत उसे हरा देती है।” यही दर्शन उनकी कंपनी की हायरिंग फिलॉसफी में भी झलकता है।
क्या यह “ओवरवर्क कल्चर” को बढ़ावा देता है?
यहां एक जरूरी सवाल उठता है—क्या “रात 1 बजे भी फोन उठाना” स्वस्थ वर्क कल्चर है?
ईमानदारी से कहें तो, हर विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं होगा।
ग्लोबल स्तर पर अब वर्क-लाइफ बैलेंस पर जोर बढ़ रहा है। यूरोप जैसे क्षेत्रों में “Right to Disconnect” कानून तक लागू किए जा रहे हैं, जहां कर्मचारी काम के बाद कॉल लेने के लिए बाध्य नहीं होते।
ऐसे में अलाब्बर का बयान दो तरह से देखा जा सकता है:
- एक पक्ष इसे समर्पण और जिम्मेदारी के रूप में देखता है
- दूसरा पक्ष इसे ओवरवर्क और बर्नआउट का संकेत मानता है
सच्चाई बीच में है। कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होती है जो संकट में उपलब्ध हों, लेकिन लगातार 24×7 उपलब्धता टिकाऊ मॉडल नहीं है।
भारतीय टैलेंट की ग्लोबल डिमांड क्यों बढ़ रही है
भारतीय कर्मचारियों की सराहना कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह पिछले कई वर्षों से लगातार बढ़ती आ रही प्रवृत्ति है। आईटी, फाइनेंस, कंसल्टिंग और स्टार्टअप्स जैसे लगभग हर प्रमुख सेक्टर में भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके पीछे कुछ मजबूत संरचनात्मक कारण हैं, जिनमें भारत की सशक्त STEM शिक्षा प्रणाली, अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ और डिजिटल स्किल्स का तेजी से विस्तार प्रमुख हैं। इसके अलावा, रिमोट वर्क और ग्लोबलाइजेशन के दौर में भारतीय टैलेंट को उनकी लागत-प्रभावशीलता के कारण भी अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। खासकर दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बिजनेस हब में, जहां रियल एस्टेट, रिटेल और फाइनेंस का विशाल इकोसिस्टम मौजूद है, वहां भारतीय कर्मचारी अब लगभग “डिफॉल्ट टैलेंट पूल” की तरह स्थापित हो चुके हैं।
अलाब्बर के सक्सेस मंत्र: सिर्फ मेहनत नहीं, स्मार्ट रणनीति
अपने भाषण में Mohamed Alabbar ने केवल मेहनत पर नहीं, बल्कि स्मार्ट वर्क और रिस्क मैनेजमेंट पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सफलता के लिए जरूरी है:
काम की लगातार समीक्षा करना
हर अवसर को गहराई से समझना
सही समय पर जोखिम लेना
सही टीम बनाना और उसे मॉनिटर करना
उन्होंने 2008 के वित्तीय संकट और कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनियों को “रिएक्टिव” नहीं, बल्कि “प्रोएक्टिव” होना चाहिए—यानी संकट आने से पहले तैयार रहना।
कौन हैं मोहम्मद अलाब्बर?
Mohamed Alabbar संयुक्त अरब अमीरात के सबसे प्रभावशाली बिजनेसमैन में से एक हैं। उनकी कंपनी Emaar Properties ने न सिर्फ Burj Khalifa बल्कि दुबई मॉल जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स को भी विकसित किया है।
रियल एस्टेट के अलावा, उन्होंने रिटेल और ई-कॉमर्स में भी बड़ा विस्तार किया है। उनकी नेटवर्थ अरबों डॉलर में आंकी जाती है, और वे ग्लोबल बिजनेस रणनीति के लिए जाने जाते हैं।
बड़ा निष्कर्ष: मेहनत की छवि, लेकिन संतुलन जरूरी
अलाब्बर का बयान भारतीय कर्मचारियों की एक मजबूत छवि पेश करता है—मेहनती, जिम्मेदार और परिणाम देने वाले। लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि इस छवि को संतुलन के साथ समझा जाए।
भविष्य का वर्क कल्चर सिर्फ “ज्यादा काम” नहीं, बल्कि “बेहतर काम” पर आधारित होगा—जहां उत्पादकता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को बराबर महत्व दिया जाएगा।
फिलहाल इतना जरूर है कि वैश्विक मंच पर भारतीय टैलेंट की साख लगातार मजबूत हो रही है—और यह किसी एक बयान से नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
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