कमोडिटी बाजार में नए सप्ताह की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरे रुझानों के साथ हुई है। घरेलू वायदा बाजार (MCX और NCDEX) में सोमवार को सोना, चांदी और कुछ कृषि जिंसों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट मुख्य रूप से कमजोर स्पॉट डिमांड, निवेशकों की मुनाफावसूली और ग्लोबल मार्केट के दबाव की वजह से देखी जा रही है।
जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं घरेलू स्तर पर निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसका सीधा असर सोना-चांदी और अन्य कमोडिटी पर देखने को मिल रहा है।
सोने के दाम में गिरावट: वायदा बाजार में दबाव बढ़ा
राष्ट्रीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। जून डिलीवरी वाले सोना अनुबंध में ₹349 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई और कीमत घटकर लगभग ₹1,52,350 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई।
विश्लेषकों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से तीन कारणों से आई:
- घरेलू बाजार में कमजोर मांग
- निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking)
- अंतरराष्ट्रीय संकेतों में हल्की कमजोरी
ग्लोबल मार्केट में भी सोना थोड़ा दबाव में दिखा, जहां न्यूयॉर्क में सोने की कीमत लगभग 0.05% गिरकर ट्रेड कर रही थी। इससे भारतीय बाजार पर भी असर पड़ा।
हालांकि, जानकार मानते हैं कि लंबे समय में सोना अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है, खासकर जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई हो।
चांदी में भी गिरावट: ₹2.43 लाख प्रति किलो के नीचे दबाव
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। MCX पर मई डिलीवरी वाली चांदी की कीमत ₹817 प्रति किलो घटकर ₹2,43,819 प्रति किलोग्राम पर आ गई।
चांदी में यह गिरावट भी मुख्य रूप से ट्रेडर्स द्वारा पोजिशन कम करने और बाजार में बिकवाली के दबाव के कारण हुई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार:
- चांदी में शॉर्ट-टर्म डिमांड कमजोर हुई है
- औद्योगिक मांग में अस्थिरता बनी हुई है
- निवेशक फिलहाल जोखिम से बच रहे हैं
हालांकि, वैश्विक बाजार में चांदी अभी भी हल्की तेजी में देखी गई, जहां यह लगभग 0.29% बढ़कर न्यूयॉर्क में USD 75.94 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही थी। यह दिखाता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रुझानों में अंतर बना हुआ है।
धनिया वायदा में गिरावट: स्पॉट डिमांड कमजोर
कमोडिटी बाजार में सिर्फ धातुएं ही नहीं, बल्कि कृषि जिंसों में भी हल्का दबाव देखने को मिला। NCDEX पर धनिया (Coriander) वायदा कीमतों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई।
मई डिलीवरी वाले धनिया कॉन्ट्रैक्ट में ₹206 प्रति क्विंटल की गिरावट आई और कीमत ₹13,228 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- स्पॉट मार्केट में मांग कमजोर है
- स्टॉकिस्ट नई खरीदारी से बच रहे हैं
- कीमतों में पहले से मौजूद अस्थिरता का असर जारी है
धनिया जैसे मसाला उत्पादों में अक्सर मांग का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है, और वर्तमान स्थिति में मांग की सुस्ती ने कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।
ग्लोबल मार्केट का असर: अनिश्चितता बनी हुई है
कमोडिटी बाजार पर वैश्विक संकेतों का बड़ा प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कारक बाजार को प्रभावित कर रहे हैं:
- अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता
- वैश्विक आर्थिक वृद्धि में धीमापन
- कच्चे तेल और धातुओं की अस्थिर कीमतें
- भू-राजनीतिक तनाव
इन सभी कारणों से निवेशक जोखिम से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश (Safe Haven Assets) की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल सोने-चांदी में भी स्पष्ट तेजी का ट्रेंड नहीं बन पा रहा है।
भारतीय बाजार में निवेशकों का रुख
भारतीय निवेशक फिलहाल कमोडिटी बाजार में सतर्क हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि:
- छोटे निवेशक तेजी और गिरावट दोनों से प्रभावित हो रहे हैं
- बड़े संस्थागत निवेशक फिलहाल wait-and-watch मोड में हैं
- फिजिकल डिमांड स्थिर है लेकिन निवेश मांग कमजोर है
सोने और चांदी दोनों में यह देखा जा रहा है कि तेजी के बाद तुरंत प्रॉफिट बुकिंग हो रही है, जिससे कीमतों में स्थिरता नहीं बन पा रही है।
क्या आगे सोने-चांदी में तेजी आएगी?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगा:
- वैश्विक आर्थिक संकेत
- डॉलर इंडेक्स और ब्याज दरें
अगर वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षण हासिल कर सकता है। वहीं चांदी में औद्योगिक मांग बढ़ने पर सुधार देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, कमोडिटी बाजार फिलहाल दबाव में है। सोना, चांदी और धनिया जैसे प्रमुख उत्पादों में गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार अभी अस्थिर दौर से गुजर रहा है।
निवेशकों के लिए यह समय सावधानी बरतने का है, क्योंकि वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर संकेत मिश्रित बने हुए हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाओं और मांग-आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करेगी।
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