नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026: भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने शनिवार को ₹10,000 करोड़ के Startup India Fund of Funds 2.0 (FoF 2.0) के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।
यह योजना देश में स्टार्टअप्स के लिए पूंजी उपलब्धता को आसान बनाने, निजी निवेश को आकर्षित करने और तकनीक आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह नया फंड-ऑफ-फंड्स भारत के स्टार्टअप सेक्टर को अगले स्तर पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
₹10,000 करोड़ का फंड कैसे काम करेगा?
Startup India FoF 2.0 को सीधे स्टार्टअप्स में निवेश करने के बजाय एक “कैटलिस्ट मॉडल” के रूप में डिजाइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य निजी निवेशकों को स्टार्टअप्स में अधिक भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
इस योजना के तहत पैसा SEBI-registered Category I और Category II Alternative Investment Funds (AIFs) में लगाया जाएगा, जो आगे DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे।
सरल शब्दों में समझें तो सरकार सीधे स्टार्टअप्स को पैसा नहीं देगी, बल्कि फंड्स के जरिए निवेश को कई गुना बढ़ाने की रणनीति अपनाएगी।
SIDBI निभाएगा अहम भूमिका
इस योजना के पहले चरण में Small Industries Development Bank of India (SIDBI) को Implementation Agency बनाया गया है।
SIDBI का काम होगा—
- AIFs का चयन करना
- निवेश की मॉनिटरिंग करना
- फंड के उपयोग को पारदर्शी बनाना
- और पूरी प्रक्रिया का निष्पादन सुनिश्चित करना
इसके अलावा DPIIT ने संकेत दिया है कि भविष्य में एक और Implementation Agency जोड़ी जाएगी ताकि योजना का दायरा और क्षमता दोनों बढ़ सके।
स्टार्टअप्स के लिए नया स्ट्रक्चर: सेक्टर वाइज फोकस
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका “segmented investment structure” है। यानी अलग-अलग प्रकार के फंड्स को अलग-अलग क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया गया है।
ऑपरेशनल गाइडलाइंस के अनुसार AIFs को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है—
1. Deep Tech Funds
ऐसे स्टार्टअप्स के लिए जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, स्पेस टेक और एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।
2. Micro Venture Capital Funds
यह फंड शुरुआती स्तर (early-stage startups) को सपोर्ट करेगा।
3. Manufacturing & Tech-led Innovation Funds
यह फंड मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी-आधारित इंडस्ट्री को बढ़ावा देगा।
4. General Sector Funds
ये फंड किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं होंगे और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करेंगे।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन शुरुआती चरण की फंडिंग और deep tech निवेश अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में—
- शुरुआती स्टार्टअप्स को फंडिंग मुश्किल से मिलती है
- Deep tech सेक्टर में निवेश कम है
- और निजी निवेशक अक्सर सुरक्षित क्षेत्रों की ओर झुकते हैं
FoF 2.0 इन समस्याओं को दूर करने के लिए एक structured capital flow मॉडल लाता है।
निवेश चयन की दो-स्तरीय प्रक्रिया
इस योजना में निवेश की प्रक्रिया को पारदर्शी और पेशेवर बनाने के लिए दो-स्तरीय चयन प्रणाली अपनाई गई है।
पहला चरण:
Implementation Agency AIFs की शुरुआती जांच और due diligence करेगी।
दूसरा चरण:
इसके बाद Venture Capital Investment Committee अंतिम मूल्यांकन करेगी।
यह समिति निवेश निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और निम्न आधारों पर फंड्स का चयन करेगी—
- फंड मैनेजमेंट टीम का अनुभव
- निवेश रणनीति की गुणवत्ता
- ट्रैक रिकॉर्ड
- और टेक्नोलॉजी फोकस
विशेषज्ञों की बड़ी समिति
इस समिति में भारत के प्रमुख उद्योग, नीति और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं, जिनमें—
- वल्लभ भंसाली
- डॉ. अशोक झुनझुनवाला
- डॉ. रेनू स्वरूप
- डॉ. चिंतन वैष्णव
- राजेश गोपीनाथन
शामिल हैं।
इनके अलावा Implementation Agency के प्रतिनिधि भी इस समिति का हिस्सा होंगे।
निजी निवेश को बढ़ावा देने की रणनीति
सरकार ने इस योजना में स्पष्ट किया है कि यह फंड केवल सरकारी निवेश पर आधारित नहीं होगा।
इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि AIFs को minimum private capital mobilization करना होगा।
इसका उद्देश्य है—
- निजी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना
- सरकारी पैसे पर निर्भरता कम करना
- और बाजार आधारित निवेश प्रणाली विकसित करना
भारत के स्टार्टअप सेक्टर पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि FoF 2.0 से भारत के स्टार्टअप सेक्टर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
संभावित प्रभाव—
- Deep tech स्टार्टअप्स को अधिक फंडिंग
- Early-stage कंपनियों के लिए बेहतर अवसर
- Manufacturing innovation को बढ़ावा
- और वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत
भारत पहले ही दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप हब्स में शामिल हो चुका है और यह योजना इस स्थिति को और मजबूत कर सकती है।
भारत का वैश्विक स्टार्टअप हब बनने का लक्ष्य
DPIIT ने कहा है कि इस योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर एक leading innovation hub बनाना है।
FoF 2.0 के जरिए सरकार का लक्ष्य है—
- निवेश की गुणवत्ता बढ़ाना
- टेक्नोलॉजी आधारित उद्यमों को बढ़ावा देना
- और रोजगार के नए अवसर पैदा करना
लचीलापन और भविष्य की रणनीति
ऑपरेशनल फ्रेमवर्क में यह भी कहा गया है कि योजना को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।
यानी—
- नए सेक्टर जोड़े जा सकते हैं
- निवेश नियम बदले जा सकते हैं
- और ecosystem की जरूरतों के अनुसार सुधार किए जाएंगे
निष्कर्ष
₹10,000 करोड़ का Startup India Fund of Funds 2.0 भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह सिर्फ फंडिंग स्कीम नहीं, बल्कि एक व्यापक निवेश मॉडल है जो सरकारी और निजी पूंजी को जोड़कर देश में innovation-driven economy को आगे बढ़ाएगा।
अगर यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत deep tech, AI और manufacturing startups का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सरकारी प्रेस रिलीज और समाचार एजेंसी रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी समय के साथ बदल सकती है।
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