भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध एक बार फिर वैश्विक मंच पर सुर्खियों में हैं। एस. जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के भारत दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बातचीत दोनों देशों के बीच “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” को नई मजबूती देगी।
करीब आठ साल बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का भारत दौरा हो रहा है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के “रीबूट” के रूप में देखा जा रहा है। यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते समीकरणों के बीच एक रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है।
जयशंकर का बयान: “रिश्तों को नई दिशा मिलेगी”
Honoured to call on President @Jaemyung_Lee of the Republic of Korea as he begins his State Visit to India.
Value his commitment to deepen India – Korea relations across multiple domains.
Confident that his talks tomorrow with PM @narendramodi will further strengthen our… pic.twitter.com/xeiSRw2rud
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 19, 2026 एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राष्ट्रपति ली से मुलाकात के बाद लिखा कि:
- भारत और कोरिया के संबंध कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे हैं
- दोनों देश सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं
उन्होंने भरोसा जताया कि:
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली की बैठक द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
क्यों अहम है यह दौरा?
यह दौरा कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
1. 8 साल बाद हाई-लेवल विजिट
दक्षिण कोरिया के किसी राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है पिछले आठ वर्षों में। इससे साफ है कि:
दोनों देश रिश्तों को फिर से सक्रिय करना चाहते हैं
2. “ग्लोबल साउथ” रणनीति
दक्षिण कोरिया अब अपनी विदेश नीति में “ग्लोबल साउथ” पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
भारत इस रणनीति का अहम हिस्सा है।
3. इंडो-पैसिफिक में साझेदारी
भारत और दक्षिण कोरिया दोनों:
- चीन के बढ़ते प्रभाव
- सप्लाई चेन जोखिम
- क्षेत्रीय सुरक्षा
जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।
2015 से अब तक: कैसे मजबूत हुए रिश्ते?
भारत और दक्षिण कोरिया ने 2015 में अपने संबंधों को “Special Strategic Partnership” का दर्जा दिया था। तब से:
- व्यापार और निवेश बढ़ा
- टेक्नोलॉजी सहयोग मजबूत हुआ
- रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में साझेदारी बढ़ी
भारत सरकार और दक्षिण कोरिया सरकार के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में फैल चुका है।
किन-किन क्षेत्रों पर होगा फोकस?
इस बार की बातचीत में कुछ प्रमुख सेक्टर केंद्र में रहेंगे:
1. सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी
- चिप मैन्युफैक्चरिंग
- डिजिटल इनोवेशन
भारत के लिए यह सेक्टर रणनीतिक रूप से बेहद अहम है
2. ग्रीन एनर्जी
- रिन्यूएबल एनर्जी
- क्लीन टेक्नोलॉजी
दोनों देश जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं।
3. डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग
- “Make in India” के तहत कोरियाई कंपनियों की भागीदारी
- रक्षा उत्पादन में सहयोग
4. व्यापार और निवेश
- Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को मजबूत करना
- नई निवेश संभावनाएं तलाशना
बिजनेस फोरम: निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका
राष्ट्रपति ली भारत मंडपम में एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां:
- दोनों देशों के बड़े उद्योगपति मौजूद रहेंगे
- सप्लाई चेन और निवेश पर चर्चा होगी
यह दिखाता है कि:
रिश्ते सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं, बल्कि उद्योग जगत भी इसमें अहम भूमिका निभा रहा है।
सांस्कृतिक रिश्ते भी बन रहे मजबूत
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संबंध भी तेजी से बढ़ रहे हैं:
- भारत में K-pop और Korean culture की लोकप्रियता
- दक्षिण कोरिया में भारतीय संस्कृति और योग का बढ़ता प्रभाव
ये “people-to-people connections” दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा बनाते हैं।
कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल
राष्ट्रपति ली का दौरा कई अहम कार्यक्रमों से भरा हुआ है:
- राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत
- राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि
- हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ शिखर वार्ता
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात
इन बैठकों में कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
वैश्विक संदर्भ: क्यों बढ़ रही है साझेदारी?
यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब:
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है
- सप्लाई चेन अस्थिर हो रही है
- देशों को भरोसेमंद साझेदारों की जरूरत है
भारत और दक्षिण कोरिया इस स्थिति में एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी बन सकते हैं।
क्या बदलेगा इस दौरे के बाद?
अगर यह दौरा सफल रहता है, तो:
- भारत में कोरियाई निवेश बढ़ सकता है
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तेज हो सकता है
- रक्षा और ऊर्जा सहयोग मजबूत हो सकता है
और सबसे अहम:
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी
निष्कर्ष: रिश्तों को नई रफ्तार देने का मौका
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का भारत दौरा केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि भविष्य की साझेदारी का रोडमैप है।
नरेंद्र मोदी और ली जे-म्युंग के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी कितनी गहराई तक जाती है।
स्पष्ट है कि:
भारत और दक्षिण कोरिया अब सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
Also Read:


