भारत के पावर सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार Power Finance Corporation (PFC) और Rural Electrification Corporation (REC) के मर्जर के बाद अपनी कम से कम 51% हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है।
यह कदम देश के सबसे बड़े सरकारी NBFC (Non-Banking Financial Company) को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकार क्यों रखना चाहती है 51% हिस्सेदारी?
वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बजट FY27 में PFC और REC के पुनर्गठन (restructuring) की घोषणा की थी।
सरकार की प्राथमिकता साफ है:
- मर्जर के बाद कंपनी Government Company बनी रहे
- रणनीतिक नियंत्रण सरकार के पास रहे
- बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए मजबूत फाइनेंसिंग क्षमता तैयार हो
Companies Act के अनुसार, किसी कंपनी को सरकारी कंपनी कहलाने के लिए सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51% होनी जरूरी है।
किन विकल्पों पर चल रही है चर्चा?
सरकार अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रही है:
1. Preference Shares जारी करना
- PFC सरकार को प्रेफरेंस शेयर जारी कर सकती है
- इससे सरकार की हिस्सेदारी बढ़ेगी
2. Fresh Equity जारी करना
- नई इक्विटी सरकार को दी जा सकती है
- इससे भी हिस्सेदारी 51% से ऊपर रखी जा सकती है
दोनों ही विकल्पों का मकसद है कि मर्जर के बाद भी कंपनी पर सरकार का नियंत्रण बना रहे।
अभी कितनी है हिस्सेदारी?
- PFC में सरकार की हिस्सेदारी: 55.99%
- REC में सरकार की हिस्सेदारी: 52.63%
बाकी शेयर पब्लिक और निवेशकों के पास हैं।
मर्जर के बाद कितना बड़ा होगा नया NBFC?
मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी बेहद बड़ी और ताकतवर होगी:
- PFC का लोन बुक: ₹11.51 लाख करोड़
- REC का लोन बुक: ₹5.82 लाख करोड़
यानी कुल मिलाकर एक विशाल फाइनेंसिंग संस्था तैयार होगी, जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड कर सकेगी।
पावर सेक्टर को क्या होगा फायदा?
इस मर्जर से कई बड़े फायदे देखने को मिल सकते हैं:
- बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए ज्यादा फंडिंग क्षमता
- जोखिम (Risk) उठाने की क्षमता में वृद्धि
- Renewable energy सेक्टर में विस्तार
- Transmission और distribution में निवेश बढ़ेगा
- NBFC सेक्टर में बेहतर प्रतिस्पर्धा
मार्केट पर क्या असर?
मंगलवार को शेयर बाजार में:
- PFC शेयर: ₹407.95
- REC शेयर: ₹329.05
मर्जर की खबर से निवेशकों की नजर इस सेक्टर पर बनी हुई है।
आगे क्या?
सरकार अभी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है, लेकिन साफ संकेत हैं कि:
- मर्जर जल्द आगे बढ़ सकता है
- सरकार कंट्रोल छोड़ने के मूड में नहीं है
- पावर सेक्टर में बड़े निवेश की तैयारी है
निष्कर्ष
PFC और REC का मर्जर सिर्फ एक कॉर्पोरेट फैसला नहीं, बल्कि भारत के पावर सेक्टर को मजबूत करने की रणनीति है। सरकार का 51% हिस्सेदारी बनाए रखने का प्लान यह सुनिश्चित करेगा कि यह नई संस्था सरकारी नियंत्रण में रहकर बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट्स को फंड कर सके।
यह कदम आने वाले समय में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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