Businessman Ice Cream Company: कारोबार की दुनिया में सफलता हासिल करने के बाद एक थाई बिजनेसमैन ने अब पूरी तरह अलग रास्ता चुनने का फैसला किया है। वह अपनी दशकों पुरानी आइसक्रीम कंपनी को करीब ₹47 करोड़ में बेचकर भिक्षु बनने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद उनका इरादा जंगल में एकांतवास में रहकर ध्यान और आध्यात्मिक साधना करने का है।
नई दिल्ली: आमतौर पर कारोबारी अपनी कंपनी को बढ़ाने और ज्यादा मुनाफा कमाने की योजना बनाते हैं, लेकिन थाईलैंड के कारोबारी सिरिपोंग अक्काराश्रीयुक (Siripong Akkarasriyuk) ने इससे बिल्कुल अलग फैसला लिया है। वह अपनी मशहूर आइसक्रीम कंपनी Hawell’s को बेचने जा रहे हैं।
सिरिपोंग कंपनी के चेयरमैन हैं और उन्होंने Hawell’s की कीमत 1,650 लाख थाई बहत, यानी करीब ₹47.2 करोड़ तय की है। कंपनी बेचने के पीछे उनका मकसद आर्थिक परेशानी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जीवन अपनाना है। वह आने वाले समय में भिक्षु बनने और जंगल में एकांत में रहकर ध्यान करने की तैयारी कर रहे हैं।
भिक्षु बनकर जंगल में साधना करने की योजना
सिरिपोंग का लक्ष्य बौद्ध धर्म में बताई गई सर्वोच्च आध्यात्मिक अवस्था अरहंत (Arahant) प्राप्त करना है। इसके लिए वह अगले करीब दो वर्षों में खुद को भिक्षु जीवन के लिए तैयार करना चाहते हैं।
उनकी योजना जंगल में जमीन तलाशकर एक ऐसा रिट्रीट तैयार करने की है, जहां वह बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रहकर ध्यान और साधना कर सकें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिरिपोंग पिछले करीब 15 वर्षों से अपने जीवन के इस बदलाव की योजना बना रहे हैं।
वह बौद्ध धर्म से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक रूप से भी अपनी बात रखते रहे हैं। साल 2016 में उन्होंने ‘Success Derived from the Buddha’ नाम की किताब भी लिखी थी।
सिरिपोंग के मुताबिक, करीब दो साल बाद वह जंगल में जाकर ध्यान करना शुरू करेंगे और भिक्षु के रूप में वहीं रहेंगे। वह बेहद सीमित लोगों के संपर्क में रहना चाहते हैं। उनकी योजना के अनुसार उनके साथ केवल एक अन्य भिक्षु रहेगा, जबकि एक शिष्य उनके लिए भोजन लेकर आएगा।
1999 में शुरू की थी Hawell’s
सिरिपोंग ने 1999 में Hawell’s की शुरुआत की थी। कंपनी ने शुरुआती वर्षों में तेजी से विस्तार किया और महज तीन साल के भीतर इसके 22 आउटलेट खुल गए थे।
एक समय थाईलैंड के बड़े शॉपिंग मॉल्स में Hawell’s की अच्छी-खासी मौजूदगी थी। हालांकि, बाद में कंपनी के विस्तार में मुश्किलें आने लगीं। सिरिपोंग का दावा है कि कई मॉल्स में जगह उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नए आउटलेट खोलने के लिए जगह नहीं दी गई।
धीरे-धीरे कंपनी के स्टोर कम होते गए और अब Hawell’s का केवल एक स्टैंडअलोन स्टोर बचा है। इसके बावजूद कंपनी के पास जमीन, फैक्ट्री, ब्रांड और लंबे समय से विकसित की गई आइसक्रीम रेसिपी जैसी कई अहम संपत्तियां मौजूद हैं।
₹47 करोड़ की डील में खरीदार को क्या मिलेगा?
सिरिपोंग ने कंपनी की कीमत 1,650 लाख थाई बहत यानी करीब ₹47.2 करोड़ रखी है। इस कीमत में सिर्फ Hawell’s का ब्रांड नाम शामिल नहीं है, बल्कि खरीदार को कंपनी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां भी मिलेंगी।
डील में मुख्य तौर पर शामिल हैं:
- 1.1 हेक्टेयर जमीन, जो करीब 2.77 एकड़ के बराबर है।
- जमीन पर मौजूद ऑफिस बिल्डिंग।
- मशीनरी और जरूरी लाइसेंस के साथ चल रही फैक्ट्री।
- Hawell’s Ice Cream & Fast Food का आउटलेट।
- कंपनी का आधिकारिक ट्रेडमार्क और ब्रांड।
- सॉफ्ट-सर्व और हार्ड आइसक्रीम बनाने की करीब 37 साल की रेसिपी और बिजनेस सीक्रेट्स।
यानी यह डील सिर्फ एक आइसक्रीम ब्रांड खरीदने तक सीमित नहीं है। संभावित खरीदार को कंपनी की जमीन, मैन्युफैक्चरिंग सेटअप, ब्रांड और लंबे समय से विकसित उत्पाद ज्ञान भी मिलेगा।
खरीदार तक पहुंचाने वाले को ₹1.43 करोड़ का इनाम
कंपनी बेचने के लिए सिरिपोंग ने संभावित खरीदार तक पहुंचाने वाले व्यक्ति के लिए भी बड़ा ऑफर रखा है। अगर कोई व्यक्ति उन्हें सफलतापूर्वक अंतिम खरीदार से मिलवाता है और डील पूरी हो जाती है, तो उसे 50 लाख थाई बहत, यानी करीब ₹1.43 करोड़ की रेफरल फीस दी जाएगी।
इस तरह सिरिपोंग का फैसला सिर्फ एक कारोबारी सौदा नहीं है। उन्होंने दशकों तक खड़े किए गए अपने बिजनेस को किसी दूसरे व्यक्ति को सौंपकर अब जीवन का अगला चरण आध्यात्मिक साधना को समर्पित करने का रास्ता चुना है। कारोबार से दूर होकर जंगल में एकांतवास और ध्यान की उनकी योजना इस वजह से भी चर्चा में है कि उन्होंने इसके लिए कई साल पहले से तैयारी शुरू कर दी थी।


