Neelkanth Mishra on India GDP Growth: भारत की GDP ग्रोथ को लेकर उठ रहे सवालों के बीच विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक और अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा ने आलोचकों के दावों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारत की 7.8% GDP ग्रोथ पर सवाल उठाने वाले तर्कों को गलत और भ्रामक बताया। मिश्रा का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों से जुड़े कई ऐसे संकेतक हैं, जो भारत की मजबूत ग्रोथ की तस्वीर पेश कर रहे हैं।
7.8% GDP ग्रोथ पर क्यों उठे सवाल?
As expected, with the fiscal headwinds fading and monetary headwinds (falling credit growth till 1HFY26) becoming tailwinds (credit growth accelerating), GDP growth is surprising on the upside, and should help push up consensus trend-growth estimates to 7%-plus. That is, with a…
— Neelkanth Mishra (@neelkanthmishra) September 3, 2026 भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। अप्रैल से जून 2026 के दौरान देश की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8% रही। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में दर्ज 6.9% की वृद्धि से काफी अधिक है। साथ ही, यह RBI के करीब 7% के अनुमान से भी बेहतर रही।
हालांकि, GDP के नए डेटा को लेकर कुछ अर्थशास्त्रियों और आलोचकों ने सवाल खड़े किए। विवाद का एक प्रमुख कारण नई राष्ट्रीय आय सीरीज में बेस ईयर से जुड़े आंकड़ों में बदलाव रहा।
नई सीरीज में पिछले साल की मौजूदा कीमतों पर GDP का अनुमान करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटकर 80 लाख करोड़ रुपये किया गया। आलोचकों का तर्क था कि अगर बेस में बदलाव नहीं किया जाता तो मौजूदा वित्त वर्ष की GDP ग्रोथ इतनी अधिक दिखाई नहीं देती।
नीलकंठ मिश्रा ने आलोचनाओं को बताया गलत
नीलकंठ मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर GDP से जुड़े इन दावों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मानना सही नहीं है कि नई बेस सीरीज की वजह से भारत की ग्रोथ दर कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई दिखाई दे रही है।
मिश्रा ने कहा कि उन्हें इस तरह के दावों को देखकर हैरानी हुई। उनके मुताबिक, अगर पुरानी बेस सीरीज को बनाए रखा जाता, तब भी भारत की आर्थिक वृद्धि कमजोर नहीं होती।
उन्होंने यह भी बताया कि फरवरी 2026 में लागू नई GDP सीरीज के जरिए डेटा की गुणवत्ता और गणना की पद्धति में सुधार किया गया है। इससे वास्तविक आर्थिक उत्पादन का अनुमान लगाने की विश्वसनीयता बढ़ी है।
तटस्थ नीतियों के बावजूद 7.5% ग्रोथ संभव
नीलकंठ मिश्रा का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में अभी इतनी ताकत है कि राजकोषीय और मौद्रिक नीतियां तटस्थ रहने की स्थिति में भी देश करीब 7.5% की आर्थिक वृद्धि हासिल कर सकता है।
उनके अनुसार, राजकोषीय दबाव कम होना और बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट ग्रोथ का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं। इन परिस्थितियों में भारत की ट्रेंड ग्रोथ रेट 7% से ऊपर बनी रह सकती है और यह करीब 7.5% तक पहुंच सकती है।
GDP के अलावा ये संकेतक भी दे रहे मजबूती के सबूत
मिश्रा ने GDP आंकड़ों पर होने वाली बहस के बजाय अर्थव्यवस्था के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स पर ध्यान देने की बात कही। उनका कहना है कि इन आंकड़ों में आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर दिखाई देती है और इन्हें कृत्रिम तरीके से बदलना आसान नहीं है।
1. कार और SUV की बिक्री में 35% उछाल
मिश्रा के मुताबिक, अगस्त में कार और SUV की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 35% की वृद्धि देखने को मिली। यह बताता है कि शहरी और ग्रामीण मांग में मजबूती बनी हुई है।
2. टू-व्हीलर बिक्री भी मजबूत
अगस्त में दोपहिया वाहनों की बिक्री में करीब 20% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। टू-व्हीलर की बिक्री को खासतौर पर व्यापक उपभोक्ता मांग का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
3. कमर्शियल वाहनों की बिक्री 40% से ज्यादा बढ़ी
कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 40% से अधिक की वृद्धि भी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है। इससे ट्रांसपोर्ट, निर्माण और कारोबारी गतिविधियों में सुधार का संकेत मिलता है।
4. टैक्स कलेक्शन में सुधार
मिश्रा ने टैक्स कलेक्शन में आई तेजी को भी आर्थिक गतिविधियों के मजबूत होने का प्रमाण बताया। टैक्स संग्रह में बढ़ोतरी आम तौर पर कारोबार और खपत में सुधार का संकेत देती है।
5. क्रेडिट ग्रोथ में तेजी
उनके अनुसार, बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों और अन्य आर्थिक क्षेत्रों की फंडिंग से जुड़ी स्थिति में सुधार हुआ है।
6. कंस्ट्रक्शन सेक्टर में मजबूती
कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में मजबूती को भी उन्होंने महत्वपूर्ण संकेतक बताया। उनके मुताबिक, निर्माण गतिविधियों के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि निजी निवेश में धीरे-धीरे तेजी आ रही है।
फिर भी अर्थव्यवस्था के सामने एक चुनौती
हालांकि, नीलकंठ मिश्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर को पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं बताया। उन्होंने वास्तविक वेतन वृद्धि की धीमी रफ्तार को एक चुनौती के तौर पर सामने रखा।
उनके अनुसार, अर्थव्यवस्था में अभी कुछ अतिरिक्त क्षमता मौजूद है। कमजोर वास्तविक वेतन वृद्धि इसी ओर इशारा करती है। इस अतिरिक्त क्षमता को पूरी तरह खत्म होने में अभी कई तिमाहियां लग सकती हैं।
मिश्रा का मानना है कि जब अर्थव्यवस्था की अतिरिक्त क्षमता खत्म होगी और मांग मजबूत बनी रहेगी, तब औसत से तेज ग्रोथ के कारण महंगाई का दबाव दोबारा बढ़ सकता है।
GDP विवाद के बीच मिश्रा का क्या है संदेश?
नीलकंठ मिश्रा की टिप्पणी का व्यापक संदेश यह है कि भारत की आर्थिक स्थिति को केवल एक GDP आंकड़े या बेस ईयर में बदलाव के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। वाहन बिक्री, टैक्स कलेक्शन, बैंक क्रेडिट और कंस्ट्रक्शन जैसे कई वास्तविक आर्थिक संकेतक भी अर्थव्यवस्था की दिशा बताते हैं।
उनके मुताबिक, इन संकेतकों में मौजूदा मजबूती को देखते हुए 7.5% की ग्रोथ का लक्ष्य असंभव नहीं है। हालांकि, आगे की वृद्धि के साथ महंगाई और वास्तविक वेतन जैसे मुद्दों पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
भारत की 7.8% GDP ग्रोथ को लेकर जारी बहस में नीलकंठ मिश्रा ने आंकड़ों की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों को खारिज किया है। उन्होंने वाहन बिक्री, टैक्स कलेक्शन, क्रेडिट ग्रोथ और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों को अर्थव्यवस्था की मजबूती के अहम संकेतक बताया है।
मिश्रा के मुताबिक, अगर नीतिगत माहौल तटस्थ भी रहता है तो भारत की अर्थव्यवस्था 7.5% के आसपास की ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता रखती है। हालांकि, आने वाले समय में वेतन वृद्धि और महंगाई से जुड़ी चुनौतियां महत्वपूर्ण रहेंगी।


