Adani Group Projects in Opposition Ruled States: अडानी ग्रुप को अक्सर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कारोबारी स्तर पर समूह का विस्तार सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और अन्य गैर-बीजेपी शासित राज्यों में भी अडानी ग्रुप सड़क, पोर्ट, एयरपोर्ट, पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, सीमेंट और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल अडानी ग्रुप पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी से अपना विस्तार कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि समूह की निवेश योजनाएं केवल बीजेपी शासित राज्यों तक सीमित नहीं हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेतृत्व वाली सरकारों वाले राज्यों में भी अडानी ग्रुप की मौजूदगी और निवेश योजनाएं बढ़ रही हैं।
कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में समूह सड़क, बंदरगाह, बिजली, रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है या निवेश की संभावनाएं तलाश रहा है। उपलब्ध परियोजनाओं और प्रस्तावित निवेशों को देखें तो अलग-अलग राज्यों में समूह की संभावित निवेश हिस्सेदारी कई लाख करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
कर्नाटक में ₹22,267 करोड़ का टनल रोड प्रोजेक्ट
कर्नाटक में अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज को बेंगलुरु के नॉर्थ-साउथ टनल रोड प्रोजेक्ट में बड़ी सफलता मिली है। कंपनी ने हेब्बल से सेंट्रल सिल्क बोर्ड के बीच प्रस्तावित करीब 16.75 किलोमीटर लंबे टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाई है।
कंपनी की बोली करीब ₹22,267 करोड़ बताई गई है। यह दूसरी सबसे कम बोली से लगभग ₹3,500 करोड़ कम है। हालांकि, सबसे कम बोली लगाने का मतलब यह नहीं है कि कॉन्ट्रैक्ट अंतिम रूप से मिल गया है। इसके लिए संबंधित प्रक्रियाओं और मंजूरियों का पूरा होना जरूरी है।
यह प्रोजेक्ट बेंगलुरु के ट्रैफिक दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अडानी ग्रुप की कर्नाटक में पहले से भी बड़ी मौजूदगी है। समूह के पास राज्य में उडुपी पावर प्लांट और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियां हैं।
केरल में ₹30,000 करोड़ के करीब पहुंचा निवेश
केरल अडानी ग्रुप के दक्षिण भारत में सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक बनकर उभरा है। यहां समूह की सबसे बड़ी परियोजनाओं में विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट शामिल है।
इस पोर्ट का विकास अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने किया है। खास बात यह है कि इसकी परियोजना की शुरुआत पिछली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार के दौरान हुई थी और बाद में अलग राजनीतिक नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में भी इसका विस्तार जारी रहा।
जनवरी 2026 में परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत हुई, जिसमें करीब ₹16,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश किया जा रहा है। इसके बाद विझिंजम पोर्ट में अडानी ग्रुप का कुल निवेश करीब ₹30,000 करोड़ तक पहुंचने की बात कही गई है।
इसके अलावा अडानी ग्रुप तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन भी करता है। कोच्चि के कलमस्सेरी में समूह की ओर से 600 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाला लॉजिस्टिक्स पार्क भी विकसित किया जा रहा है। इससे 1,500 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
तेलंगाना में ₹12,400 करोड़ के निवेश की योजना
तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के साथ भी अडानी ग्रुप ने बड़े निवेश को लेकर समझौते किए हैं। जनवरी 2024 में राज्य सरकार और अडानी ग्रुप की कंपनियों के बीच चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इन समझौतों के तहत करीब ₹12,400 करोड़ के निवेश की योजना सामने आई थी। प्रस्तावित परियोजनाओं में डेटा सेंटर, एनर्जी स्टोरेज, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और अन्य कारोबार शामिल हैं।
डेटा सेंटर और एनर्जी स्टोरेज जैसे सेक्टरों में निवेश अडानी ग्रुप की पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों से आगे बढ़ते हुए नए डिजिटल और एनर्जी बिजनेस में विस्तार की रणनीति को भी दिखाता है।
तमिलनाडु में ₹42,700 करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव
तमिलनाडु में भी अडानी ग्रुप की निवेश योजनाएं काफी बड़ी हैं। वर्ष 2024 में समूह ने राज्य में ₹42,700 करोड़ से अधिक के निवेश से जुड़े एमओयू किए थे।
इन प्रस्तावित परियोजनाओं में:
- करीब ₹24,500 करोड़ के तीन पंप्ड-स्टोरेज प्रोजेक्ट
- लगभग ₹13,200 करोड़ का हाइपरस्केल डेटा सेंटर
- करीब ₹3,500 करोड़ का सीमेंट ग्राइंडिंग प्लांट
शामिल हैं।
इसके अलावा अडानी एंटरप्राइजेज ने चेन्नई आउटर रिंग रोड के ऑपरेशन, मेंटेनेंस और टोलिंग से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किया है। इसके लिए कंपनी की वित्तीय बोली करीब ₹2,511 करोड़ बताई गई थी।
इस तरह तमिलनाडु अडानी ग्रुप के लिए रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमेंट जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण राज्य बन गया है।
आंध्र प्रदेश में भी बढ़ रहा अडानी ग्रुप का कारोबार
आंध्र प्रदेश में भी अडानी ग्रुप की मौजूदगी कई क्षेत्रों में है। विशाखापत्तनम में प्रस्तावित गूगल AI हब में AdaniConneX और Airtel इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर हैं। गूगल ने वर्ष 2026 से 2030 के बीच इस AI हब के लिए करीब 15 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
अडानी ग्रुप के पास आंध्र प्रदेश में कृष्णापट्टनम पोर्ट जैसी महत्वपूर्ण परिसंपत्ति भी है। इसके अलावा समूह रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ट्रांसमिशन के क्षेत्र में भी निवेश कर रहा है।
राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़ाने के लिए ₹20,000 करोड़ से ज्यादा के निवेश की योजनाएं बताई गई हैं। इसमें पंप्ड-स्टोरेज प्रोजेक्ट और ट्रांसमिशन लाइनें भी शामिल हैं।
बिहार और झारखंड में भी निवेश की संभावनाएं
अडानी ग्रुप की नजर बिहार और झारखंड पर भी है। झारखंड में समूह पहले से 1,600 मेगावाट के गोड्डा अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट का संचालन करता है। इस परियोजना में 16,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है।
फरवरी में गौतम अडानी ने झारखंड और बिहार में समूह की परियोजनाओं की समीक्षा भी की थी। दोनों राज्यों में समूह की ओर से ₹40,000 करोड़ से अधिक के संभावित निवेश की दिशा में काम किए जाने की बात सामने आई है।
बिहार में निवेश की संभावनाएं खास तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। वहीं झारखंड में पावर सेक्टर में समूह की पहले से मौजूदगी है।
हिमाचल प्रदेश में सप्लाई चेन पर फोकस
हिमाचल प्रदेश में अडानी ग्रुप की गतिविधियां मुख्य रूप से सीमेंट और एग्री-सप्लाई चेन से जुड़ी हैं। समूह राज्य में सेब उत्पादकों की सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
इसके अलावा अडानी ग्रुप की राज्य में सीमेंट से जुड़ी परिसंपत्तियां मौजूद हैं। इससे पता चलता है कि समूह अलग-अलग राज्यों में स्थानीय अर्थव्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से अपने कारोबार का विस्तार कर रहा है।
सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों तक सीमित नहीं कारोबार
अडानी ग्रुप की इन परियोजनाओं को एक साथ देखें तो यह साफ होता है कि समूह की कारोबारी रणनीति किसी एक राजनीतिक दल द्वारा शासित राज्यों तक सीमित नहीं है।
जहां राज्य सरकारों को बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की जरूरत है, वहीं अडानी ग्रुप के लिए ऐसे प्रोजेक्ट्स नए बाजार और लंबे समय के कारोबार के अवसर पैदा करते हैं।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि प्रस्तावित निवेश, एमओयू, बोली और अंतिम रूप से मंजूर परियोजना एक जैसी चीजें नहीं होतीं। किसी प्रोजेक्ट का वास्तविक निवेश उसके अंतिम कॉन्ट्रैक्ट, सरकारी मंजूरी, वित्तीय क्लोजर और परियोजना के क्रियान्वयन पर निर्भर करता है।
इसलिए अलग-अलग राज्यों में बताई गई निवेश राशि को अडानी ग्रुप का तत्काल या पूरा किया जा चुका निवेश मानना सही नहीं होगा। फिर भी इन परियोजनाओं से यह जरूर संकेत मिलता है कि समूह भारत के अलग-अलग राजनीतिक और भौगोलिक क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार का विस्तार करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।


