Amardeep Kumar Story: झारखंड के रांची से सामने आई एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। तस्वीर में एक सब्जी की दुकान पर गोल्ड मेडल लटका नजर आया। जब लोगों को पता चला कि ये मेडल किसी आम व्यक्ति के नहीं, बल्कि भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड मेडल जीत चुके थ्रो-बॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार के हैं, तो उनकी कहानी तेजी से वायरल हो गई।
रांची के अरगोरा चौक पर अमरदीप सब्जियां बेचते नजर आए। बताया जा रहा है कि वह परिवार का खर्च चलाने के लिए सब्जी बेचने के साथ कैब भी चलाते हैं। खास बात यह है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेल से नाता नहीं तोड़ा है।
सब्जी की दुकान पर टंगे हैं गोल्ड मेडल
.@SportsJhr तत्काल संज्ञान लें। https://t.co/ftH7BnKAbj
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) September 1, 2026 सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अमरदीप को अपनी दुकान पर सब्जियां बेचते हुए देखा जा सकता है। दुकान पर कई तरह की सब्जियां रखी हैं और वह ग्राहकों के लिए उन्हें तराजू पर तौलते नजर आते हैं।
इस वीडियो ने सबसे ज्यादा ध्यान इसलिए खींचा क्योंकि दुकान की दीवार पर उनके गोल्ड मेडल टंगे हुए दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ रोजी-रोटी के लिए सब्जियां बेचने की मजबूरी और दूसरी तरफ देश के लिए जीते गए पदक—इस तस्वीर ने खेलों में खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और करियर सपोर्ट को लेकर बहस छेड़ दी।
सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि किसी खिलाड़ी का सब्जी बेचना अपने आप में गलत नहीं है। मेहनत और ईमानदारी से किया गया कोई भी काम सम्मानजनक है। चिंता इस बात को लेकर है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने और मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को खेल के बाद बेहतर करियर और आर्थिक सुरक्षा क्यों नहीं मिल पाती।
चार अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीत चुके हैं अमरदीप
Heartbreaking visuals 💔
Ranchi Gold medalist selling vegetables on road 😢
This is Amardeep Kumar from Ranchi, a throwball player who represented India in Malaysia and won gold medal.
Now he is selling vegetables with medals hanging on the wall 💔💔 pic.twitter.com/oKoqpZumjR
— Desi Lord (@DesiLord_) August 31, 2026 अमरदीप कुमार ने थ्रो-बॉल में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की शुरुआत 2015 में हुई, जब उन्होंने मलेशिया में आयोजित एशियन जूनियर थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।
इसके बाद 2017 में काठमांडू में आयोजित इंडो-नेपाल थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। साल 2019 में बेंगलुरु में हुई साउथ एशियन थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे और टीम ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
अमरदीप की उपलब्धियों में चौथा अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल 2026 में जुड़ा। रांची में आयोजित साउथ एशियन थ्रो-बॉल चैंपियनशिप के दूसरे संस्करण में उन्होंने एक बार फिर स्वर्ण पदक जीता।
इस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उनके नाम चार गोल्ड मेडल दर्ज हैं।
सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद का इंतजार
रिपोर्ट के मुताबिक, अमरदीप ने साल 2016 में झारखंड सरकार से पुरस्कार और प्रोत्साहन के लिए संपर्क किया था। बताया जा रहा है कि कैश इनाम और सरकारी नौकरी से जुड़ी उनकी मांगों पर अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
अमरदीप का कहना है कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दूसरे काम करने पड़ रहे हैं। इसी वजह से वह सब्जियां बेचने के अलावा कैब भी चलाते हैं।
उनके कई साथी खिलाड़ी दूसरे राज्यों में सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं। रिपोर्ट में छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार के खिलाड़ियों का उदाहरण दिया गया है, जिन्हें खेल उपलब्धियों के बाद सरकारी नौकरी मिली।
सोशल मीडिया पर लोगों ने उठाए सवाल
अमरदीप का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे खिलाड़ियों को लेकर व्यवस्था की गंभीर स्थिति बताया।
लोगों का कहना है कि जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए पदक जीतता है तो उसके प्रदर्शन की खूब सराहना होती है। लेकिन प्रतियोगिता खत्म होने के बाद उसके करियर, रोजगार और आर्थिक भविष्य को लेकर भी ठोस व्यवस्था होनी चाहिए।
कुछ यूजर्स ने सरकार से अमरदीप को आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि सब्जी बेचना समस्या नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि उनकी खेल उपलब्धियों के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाया।
मुश्किलों के बावजूद खेल जारी
आर्थिक परेशानियों के बीच भी अमरदीप ने थ्रो-बॉल खेलना नहीं छोड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह अभी भी अभ्यास और प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं।
बताया गया है कि अक्टूबर 2026 के अंत में वह श्रीलंका में होने वाले एक टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। यानी जिस खिलाड़ी को परिवार चलाने के लिए सब्जियां बेचनी पड़ रही हैं, वह अभी भी देश के लिए मैदान पर उतरने की तैयारी कर रहा है।
वायरल कहानी पर CM हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान
अमरदीप कुमार की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस मामले का संज्ञान लिया।
हेमंत सोरेन ने X पर पोस्ट के जरिए खेल विभाग को अमरदीप के मामले में तत्काल संज्ञान लेने और जरूरी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि अमरदीप की खेल उपलब्धियों और उनकी मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार की ओर से उचित कदम उठाया जाएगा।
अमरदीप की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की आर्थिक परेशानी की कहानी नहीं है। यह इस बड़े सवाल को भी सामने लाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के खेल करियर के साथ-साथ उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए व्यवस्था कितनी मजबूत है।


