BSE Share Price: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के शेयरों में 3 सितंबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। बीएसई के एमडी और सीईओ सुंदररमण रामामूर्ति के एक अहम बयान के बाद शेयर 4 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया। उन्होंने NSE के आगामी IPO और उसके शेयरों की ट्रेडिंग से जुड़ी स्थिति पर बड़ा अपडेट दिया है।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE के शेयरों में गुरुवार, 3 सितंबर को तेज खरीदारी देखने को मिली। कारोबार के दौरान बीएसई का शेयर करीब 4.26 फीसदी उछलकर 3,303 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी के पीछे एक्सचेंज के एमडी और सीईओ सुंदररमण रामामूर्ति का वह बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने NSE के IPO के बाद उसके शेयरों की ट्रेडिंग से जुड़ी स्थिति को स्पष्ट किया।
सुंदररमण रामामूर्ति ने CNBC-TV18 से बातचीत में कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने पुष्टि की है कि ऑफर डॉक्युमेंट के साथ सेल्फ-ट्रेडिंग के लिए कोई अडेन्डम जारी नहीं किया जाएगा। NSE का IPO अगले एक-दो महीनों में आने की उम्मीद है।
NSE के शेयरों की ट्रेडिंग अपने ही प्लेटफॉर्म पर नहीं होगी
BSE के एमडी और सीईओ के मुताबिक, NSE ने यह साफ कर दिया है कि उसके शेयरों को उसके अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की सुविधा नहीं मिलेगी।
उन्होंने बताया कि साल 2017 में BSE के शेयरों को अपने ही एक्सचेंज पर ट्रेड करने की अनुमति हासिल करने की कोशिश की गई थी, लेकिन इसकी इजाजत नहीं मिली थी। उनका कहना है कि नियमों के तहत किसी स्टॉक एक्सचेंज के शेयर को उसके अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट करने की अनुमति नहीं है।
NSE के IPO को लेकर बाजार में लंबे समय से चर्चा चल रही है। ऐसे में NSE के शेयरों की लिस्टिंग और उनके ट्रेडिंग मैकेनिज्म को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
NSE के अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग होती तो BSE को हो सकता था नुकसान
इससे पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि NSE के शेयर BSE पर लिस्ट होने के बाद ‘Permitted to Trade’ कैटेगरी के जरिए NSE के अपने प्लेटफॉर्म पर भी ट्रेड किए जा सकते हैं।
हालांकि, अब BSE के सीईओ के बयान से इस संभावना पर काफी हद तक स्थिति साफ होती नजर आ रही है।
PL Capital की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर NSE के शेयरों में उसके अपने एक्सचेंज पर ट्रेडिंग होती, तो इसका असर वित्त वर्ष 2027 में BSE की कमाई (Earnings) पर पड़ सकता था। ऐसे में NSE के अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग नहीं होने की खबर को BSE के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
CAS पर भी BSE डीलर्स से ले रहा फीडबैक
BSE के एमडी ने Closing Auction Session (CAS) को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक्सचेंज इस व्यवस्था पर डीलर्स के साथ लगातार बैठकें कर रहा है और उनसे फीडबैक लिया जा रहा है।
डीलर्स की तरफ से मिले सुझावों में F&O एक्सपायरी को CAS से अलग रखना भी शामिल है। इसके अलावा CAS को धीरे-धीरे लागू करने और ऑर्डर मॉडिफिकेशन की अनुमति नहीं देने जैसे सुझाव भी मिले हैं।
रामामूर्ति ने कहा कि एक्सचेंज सभी डीलर्स के फीडबैक पर विचार कर रहा है। इसके बाद इन सुझावों को रेगुलेटर्स के सामने रखा जाएगा।
CAS की शुरुआत 3 अगस्त से हुई
BSE में Closing Auction Session यानी CAS की शुरुआत 3 अगस्त 2026 से हुई थी। इस व्यवस्था में सामान्य कारोबार खत्म होने के बाद एक छोटा ऑक्शन सेशन होता है। इसमें खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स को मैच किया जाता है और इसके आधार पर शेयर का क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है।
इस तरह की व्यवस्था चीन, ताइवान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे कुछ एशियाई बाजारों में भी देखने को मिलती है।
हालांकि, BSE के सीईओ के मुताबिक CAS लागू होने के बाद इंडेक्स ऑप्शंस के वॉल्यूम पर असर पड़ा है। उनका कहना है कि CAS के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी जरूरी है और लिक्विडिटी कम होने से बाजार में पार्टिसिपेशन भी प्रभावित हुआ है।
एक साल में करीब 50% चढ़ चुका है BSE का शेयर
BSE के शेयर में हालिया तेजी के बावजूद निवेशकों की नजर अब एक्सचेंज की आगे की ग्रोथ, NSE IPO और डेरिवेटिव्स कारोबार पर बनी रहेगी।
3 सितंबर को दोपहर करीब 1:15 बजे BSE का शेयर 4.26 फीसदी की तेजी के साथ 3,303 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। पिछले एक साल में शेयर करीब 50 फीसदी की बढ़त दर्ज कर चुका है।
NSE के IPO के आने के बाद भारतीय स्टॉक एक्सचेंज सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और कारोबार के आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में BSE और NSE से जुड़े नियमों और ट्रेडिंग वॉल्यूम में होने वाले बदलाव निवेशकों के लिए अहम रहेंगे।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


