Shree Jagannath Temple: ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर की आर्थिक स्थिति को लेकर मंदिर प्रशासन ने अहम जानकारी सार्वजनिक की है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुताबिक, 31 अगस्त तक मंदिर के बैंक खातों में करीब 1,912 करोड़ रुपये जमा हैं। प्रशासन ने यह भी बताया है कि मंदिर की आय किन-किन स्रोतों से होती है और इस रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।
मंदिर प्रशासन ने कहा है कि मंदिर के वित्तीय मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित अकाउंटिंग और ऑडिट की व्यवस्था है। SJTA के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी के मुताबिक, मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाती है।
मंदिर की कमाई के प्रमुख स्रोत क्या हैं?
श्री जगन्नाथ मंदिर को अलग-अलग माध्यमों से आय प्राप्त होती है। इसमें सबसे प्रमुख स्रोत भक्तों की ओर से मिलने वाला दान और चढ़ावा है। इसके अलावा मंदिर की अपनी खदानों से होने वाली आय, फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज, जमीन से जुड़े लेन-देन से होने वाली आमदनी और सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट भी मंदिर की आय का हिस्सा हैं।
प्रशासन के मुताबिक, मंदिर को मिलने वाली पूरी रकम एक ही खाते में नहीं रखी जाती। आय का एक हिस्सा अलग-अलग फंड में सुरक्षित किया जाता है, जबकि शेष रकम मंदिर के नियमित खर्चों के लिए इस्तेमाल होती है।
तीन प्रमुख फंड में रखी जाती है रकम
SJTA के अनुसार, मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में कॉर्पस फंड, फाउंडेशन फंड और मंदिर फंड प्रमुख हैं। आय का एक निर्धारित हिस्सा कॉर्पस फंड के तहत फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाता है। इसी तरह फाउंडेशन फंड के लिए भी रकम अलग रखी जाती है।
बाकी राशि मंदिर के फंड अकाउंट में रहती है। इस पैसे का इस्तेमाल मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक गतिविधियों, सेवाओं और प्रशासन से जुड़े रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में किया जाता है।
अगर नियमित खर्चों के बाद कोई अतिरिक्त रकम बचती है तो उसे भी भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया जाता है। इसका उद्देश्य मंदिर की संपत्ति को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।
बैंक में जमा रकम कितनी है?
मंदिर प्रशासन के अनुसार, 31 अगस्त तक श्री जगन्नाथ मंदिर की बैंक संपत्ति करीब 1,912 करोड़ रुपये हो गई थी। इसमें कॉर्पस, फाउंडेशन और मंदिर की जमा राशि समेत अलग-अलग मदों में रखी रकम शामिल है।
इस राशि में जून 2024 में राज्य सरकार की ओर से कॉर्पस फंड में दिया गया 500 करोड़ रुपये का योगदान भी शामिल है।
प्रशासन ने बैंक खातों में रखी रकम के अलावा सेविंग्स, करंट और फ्लेक्सी अकाउंट्स में उपलब्ध राशि की भी जानकारी दी है। इन खातों में करीब 100 करोड़ 70 लाख 66 हजार 868 रुपये होने की बात बताई गई है।
रोजाना गिनी जाती है हुंडी की रकम
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, भक्तों की ओर से हुंडी में जमा की जाने वाली रकम की हर दिन गिनती की जाती है। इसका उद्देश्य दान की रकम को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना है।
SJTA का कहना है कि हुंडी से मिलने वाली रकम की जानकारी आधिकारिक नोटिस बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाती है, ताकि देश-विदेश में मौजूद भक्त भी मंदिर की आय से जुड़ी जानकारी देख सकें।
डिजिटल हुंडी से भी मिला दान
श्री जगन्नाथ मंदिर में डिजिटल तरीके से दान देने की सुविधा भी शुरू की गई है। इस साल 15 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने डिजिटल हुंडी ‘समर्पण’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था।
SJTA के मुताबिक, प्लेटफॉर्म लॉन्च होने के बाद से भक्तों ने ऑनलाइन डोनेशन के जरिए करीब 56.7 लाख रुपये का योगदान दिया है। इससे मंदिर में दान देने की प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई है।
मंदिर में चोरी की घटनाएं भी सामने आई हैं
मंदिर प्रशासन ने आर्थिक पारदर्शिता से जुड़ी जानकारी जारी की है। हालांकि, मंदिर के फंड के गलत इस्तेमाल का कोई आरोप सामने आने की बात नहीं कही गई है, लेकिन पुलिस सूत्रों के हवाले से मंदिर में पिछले 25 वर्षों के दौरान चोरी की कम से कम सात घटनाओं का जिक्र किया गया है।
इन घटनाओं में नकदी, गहने और मूर्तियों से जुड़ी चोरी के मामले शामिल बताए गए हैं।
एक मामले में मंदिर के क्लर्क प्रदीप कुमार महापात्रा पर 7 फरवरी 2024 को दान की रकम गिनते समय 31,940 रुपये नकद चोरी करने का आरोप लगा था। CCTV निगरानी के दौरान मामला सामने आने के बाद कार्रवाई की गई थी।
इसी तरह 15 जुलाई 2023 को मंदिर के चपरासी सुशांत कुमार राउतराय को 800 रुपये चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
मंदिर की वित्तीय व्यवस्था क्यों है अहम?
पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर को मिलने वाले दान, संपत्तियों से होने वाली आय और दूसरे वित्तीय स्रोतों का पारदर्शी प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है।
SJTA की ओर से बैंक बैलेंस और आय-व्यय से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना इसी पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि नियमित ऑडिट, अकाउंटिंग व्यवस्था और दान की दैनिक गिनती के जरिए भक्तों के भरोसे को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।


