नई दिल्ली। भारतीय परिवारों में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं बल्कि सुरक्षा, परंपरा और निवेश का प्रतीक माना जाता है। समय के साथ सोने में निवेश के तरीके भी बदलते गए हैं। पहले लोग गहने, सिक्के और बिस्कुट खरीदते थे, फिर गोल्ड ETF, डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) जैसे विकल्प आए। अब एक नया निवेश विकल्प तेजी से चर्चा में है, जिसे टोकनाइज्ड गोल्ड (Tokenised Gold) कहा जाता है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि निवेशक मात्र ₹100 जैसी छोटी रकम से भी सोने में निवेश शुरू कर सकते हैं। हालांकि, इसके साथ कुछ ऐसे जोखिम भी जुड़े हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे में निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि टोकनाइज्ड गोल्ड क्या है, यह कैसे काम करता है और इसमें निवेश कितना सुरक्षित है।
क्या है टोकनाइज्ड गोल्ड?
टोकनाइज्ड गोल्ड ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित एक डिजिटल एसेट है। इसमें असली सोना किसी सुरक्षित वॉल्ट (तिजोरी) में रखा जाता है और उसके बदले निवेशक को डिजिटल टोकन जारी किए जाते हैं। प्रत्येक टोकन एक निश्चित मात्रा के वास्तविक सोने का प्रतिनिधित्व करता है।
इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे उसके मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का लाभ उठा सकते हैं। साथ ही, छोटे निवेशक भी कुछ सौ रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी प्लेटफॉर्म पर 1 ग्राम सोने का मूल्य ₹10,000 है, तो आप ₹100 लगाकर उसका 1% हिस्सा खरीद सकते हैं। यह निवेश आपके डिजिटल वॉलेट में टोकन के रूप में दिखाई देगा।
कैसे काम करता है टोकनाइज्ड गोल्ड?
टोकनाइज्ड गोल्ड की प्रक्रिया तीन स्तरों पर आधारित होती है।
- एक कंपनी वास्तविक सोना खरीदकर वॉल्ट में रखती है।
- उसी सोने के बराबर डिजिटल टोकन जारी किए जाते हैं।
- निवेशक इन टोकन को खरीदते, बेचते या अपने डिजिटल वॉलेट में रखते हैं।
कुछ प्लेटफॉर्म निवेशकों को बाद में टोकन के बदले फिजिकल गोल्ड की डिलीवरी लेने का विकल्प भी देते हैं। हालांकि इसके लिए अतिरिक्त शुल्क और टैक्स देना पड़ सकता है।
टोकनाइज्ड गोल्ड, गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड में क्या अंतर है?
तीनों विकल्पों का उद्देश्य सोने की कीमत से फायदा कमाना है, लेकिन इनके नियम, टैक्स और सुरक्षा व्यवस्था अलग-अलग हैं।
Gold ETF
गोल्ड ETF को विशेषज्ञ सबसे सुरक्षित विकल्पों में गिनते हैं। यह शेयर बाजार में ट्रेड होता है और इसकी निगरानी सेबी के नियमों के तहत होती है। इसे खरीदना और बेचना आसान होता है। 12 महीने से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है।
Digital Gold
डिजिटल गोल्ड में निवेशक ऑनलाइन सोना खरीद सकते हैं। इसमें छोटे निवेश की सुविधा मिलती है, लेकिन खरीदारी पर 3% GST और खरीद-बिक्री के बीच अतिरिक्त स्प्रेड कॉस्ट देनी पड़ती है।
Physical Gold
गहने, सिक्के और बार के रूप में खरीदा जाने वाला सोना सबसे पारंपरिक विकल्प है। हालांकि इसमें मेकिंग चार्ज, सुरक्षा और स्टोरेज जैसी अतिरिक्त लागतें जुड़ी रहती हैं।
Tokenised Gold
इसमें 24 घंटे ट्रेडिंग की सुविधा मिल सकती है, लेकिन भारत में इसे वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) की श्रेणी में रखा जाता है। इसके मुनाफे पर 30% फ्लैट टैक्स और 1% TDS लागू हो सकता है, जिससे निवेशकों का रिटर्न प्रभावित हो सकता है।
क्या भारत में टोकनाइज्ड गोल्ड रेगुलेटेड है?
यही इसका सबसे बड़ा जोखिम है।
फिलहाल भारत में टोकनाइज्ड गोल्ड के लिए कोई स्पष्ट और व्यापक नियामकीय ढांचा मौजूद नहीं है। यह गोल्ड ETF की तरह सेबी की निगरानी में नहीं आता। इसका मतलब है कि निवेशक को प्लेटफॉर्म, वॉल्ट ऑपरेटर और टोकन जारी करने वाली कंपनी पर भरोसा करना पड़ता है।
अगर भविष्य में कोई विवाद या समस्या उत्पन्न होती है तो निवेशकों के पास शिकायत के लिए सीमित विकल्प हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल: क्या वॉल्ट में वास्तव में सोना मौजूद है?
ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी यह तो सुनिश्चित कर सकती है कि आपके पास मौजूद टोकन असली हैं और आपके नाम पर दर्ज हैं, लेकिन यह सत्यापित नहीं कर सकती कि संबंधित वॉल्ट में वास्तव में उतना सोना मौजूद है या नहीं।
इसलिए निवेश से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों की जांच करनी चाहिए:
- वॉल्ट ऑपरेटर की विश्वसनीयता।
- सोने का BIS हॉलमार्क होना।
- स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध होना।
- इंश्योरेंस कवर की जानकारी।
- फिजिकल गोल्ड डिलीवरी की स्पष्ट नीति।
अगर प्लेटफॉर्म बंद हो जाए तो क्या होगा?
गोल्ड ETF में निवेशकों को एक्सचेंज, AMC और नियामकों की सुरक्षा मिलती है। लेकिन टोकनाइज्ड गोल्ड में ऐसी सुरक्षा सीमित हो सकती है।
यदि टोकन जारी करने वाला प्लेटफॉर्म बंद हो जाए, दिवालिया हो जाए या किसी कानूनी विवाद में फंस जाए, तो निवेशकों को अपना पैसा वापस पाने में कठिनाई हो सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे हाई रिस्क कैटेगरी का निवेश मानते हैं।
क्या टोकन के बदले असली सोना लिया जा सकता है?
अधिकांश प्लेटफॉर्म निवेशकों को टोकन के बदले फिजिकल गोल्ड प्राप्त करने की सुविधा देते हैं। आमतौर पर 0.5 ग्राम से लेकर 10 ग्राम या उससे अधिक मात्रा में सोना मंगाया जा सकता है।
हालांकि, इसके लिए अतिरिक्त खर्च देना पड़ सकता है:
- 3% GST
- मिंटिंग या ढलाई शुल्क
- कूरियर चार्ज
- इंश्योरेंस शुल्क
इसलिए केवल डिजिटल मूल्य देखकर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
क्या टोकनाइज्ड गोल्ड में निवेश करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि टोकनाइज्ड गोल्ड तकनीक और ब्लॉकचेन आधारित निवेश को पसंद करने वाले निवेशकों के लिए एक दिलचस्प विकल्प हो सकता है। लेकिन इसे अभी मुख्य निवेश साधन नहीं माना जाना चाहिए।
जो निवेशक इसमें पैसा लगाना चाहते हैं, उन्हें अपने कुल पोर्टफोलियो का बहुत छोटा हिस्सा ही इसमें निवेश करना चाहिए। दीर्घकालिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश के लिए गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प अभी भी अधिक भरोसेमंद माने जाते हैं।
यदि कोई प्लेटफॉर्म गारंटीड रिटर्न का दावा करे, या खुद को RBI अथवा SEBI से अप्रूव्ड बताकर निवेश आकर्षित करे, तो निवेशकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
निष्कर्ष
टोकनाइज्ड गोल्ड सोने में निवेश का एक आधुनिक और तकनीकी तरीका है, जहां मात्र ₹100 से भी शुरुआत की जा सकती है। लेकिन इसकी चमक के पीछे नियामकीय अनिश्चितता, प्लेटफॉर्म जोखिम और भारी टैक्स जैसे कई बड़े खतरे छिपे हुए हैं। ऐसे में निवेश करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना और जोखिम को समझना बेहद जरूरी है। फिलहाल, सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से गोल्ड ETF और SGB जैसे विकल्प निवेशकों के लिए अधिक भरोसेमंद माने जा रहे हैं।


