1977 Tata Salary: आज के समय में लाखों रुपये के पैकेज की चर्चा आम है, लेकिन करीब 49 साल पहले एक युवा इंजीनियर को टाटा की ओर से सिर्फ ₹960 महीने की नौकरी का ऑफर मिला था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने ज्यादा वेतन वाले दूसरे विकल्पों को छोड़कर इस ऑफर को स्वीकार किया और आगे चलकर देश के प्रमुख बैंकों में से एक सिंडिकेट बैंक के चेयरमैन बने। उनकी यह कहानी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और युवाओं के बीच करियर की शुरुआत में सैलरी बनाम सीख को लेकर नई बहस छेड़ रही है।
अमेरिका से पढ़ाई के बाद मिला सिर्फ ₹960 का ऑफर

अमेरिका से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अजय नानावटी भारत लौटे। उन्हें उम्मीद थी कि विदेशी डिग्री के दम पर शानदार वेतन वाली नौकरी मिलेगी। लेकिन जब पहला ऑफर लेटर मिला तो उसमें मासिक वेतन ₹960 लिखा था।
पहली नजर में यह रकम उन्हें काफी कम लगी। परिवार के लोग भी कुछ समय के लिए हैरान रह गए। हालांकि इसी मोड़ पर उनके पिता की एक सलाह ने उनकी सोच और भविष्य दोनों बदल दिए।
पिता ने दी ऐसी सलाह जिसने बदल दी जिंदगी
अजय नानावटी ने बताया कि उनके पिता एक बहुराष्ट्रीय (MNC) कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर थे। बेटे की पढ़ाई पर अच्छा-खासा खर्च करने के बावजूद उन्होंने सैलरी को लेकर निराश होने के बजाय सिर्फ एक बात कही—“वेतन मत देखो, सीखने का मौका देखो।”
उन्होंने बेटे को सलाह दी कि प्रतिष्ठित संस्थान में काम करने का अवसर लंबे समय में ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होगा। यही सलाह बाद में उनके सफल करियर की नींव बनी।
4 जुलाई 1977 को मिला था टाटा का ऑफर लेटर
अजय नानावटी को 4 जुलाई 1977 को टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की ओर से Assistant Commercial Officer पद के लिए नियुक्ति पत्र मिला था।
ऑफर लेटर में यह भी उल्लेख था कि कंपनी की आवश्यकता के अनुसार उन्हें भारत या विदेश में कहीं भी नियुक्त किया जा सकता है। इसके बावजूद उन्होंने बिना हिचकिचाए यह अवसर स्वीकार कर लिया।
ज्यादा सैलरी वाले ऑफर भी थे, फिर भी चुना टाटा
नानावटी के अनुसार, उनके पास उस समय अधिक वेतन देने वाली अन्य कंपनियों के ऑफर भी मौजूद थे। लेकिन उन्होंने सिर्फ शुरुआती वेतन के आधार पर फैसला नहीं लिया।
उनका मानना था कि:
- एक प्रतिष्ठित संस्था में काम करने का अनुभव ज्यादा मूल्यवान होता है।
- शुरुआती वर्षों में सीखने का अवसर भविष्य तय करता है।
- सही कार्य संस्कृति और मार्गदर्शन लंबे समय में अधिक लाभ देता है।
- करियर की शुरुआत में अनुभव, वेतन से अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसी सोच के कारण उन्होंने टाटा को चुना और आगे चलकर बैंकिंग सेक्टर में बड़ी पहचान बनाई।
49 साल बाद बोले- यही था सबसे सही फैसला
करीब पांच दशक बाद अजय नानावटी मानते हैं कि यदि उन्होंने उस समय केवल अधिक सैलरी को प्राथमिकता दी होती, तो शायद उनका करियर अलग दिशा में चला जाता।
उनके मुताबिक, करियर के शुरुआती वर्षों में मिली सीख, नेटवर्क और अनुभव ही आगे की सफलता की सबसे बड़ी पूंजी बनते हैं। उनका मानना है कि शुरुआती वेतन अस्थायी होता है, लेकिन सही संस्थान में मिला अनुभव जीवनभर साथ रहता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
अजय नानावटी द्वारा अपना पहला जॉब ऑफर लेटर साझा करने के बाद सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने अपनी पहली नौकरी और शुरुआती सैलरी की यादें साझा कीं।
कई लोगों ने बताया कि उन्होंने 50 या 100 रुपये महीने से करियर शुरू किया था, जबकि कुछ ने कुछ सौ रुपये की पहली नौकरी का अनुभव साझा किया। इस चर्चा ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया—
क्या करियर की शुरुआत में ज्यादा जरूरी है मोटी सैलरी या बेहतर सीख?
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती करियर में कौशल, अनुभव, अच्छे मेंटर और मजबूत कार्य संस्कृति पर ध्यान देने वाले पेशेवर लंबे समय में बेहतर सफलता हासिल करते हैं।


