जयपुर के रहने वाले Prateek Tiwari की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सुरक्षित नौकरी छोड़कर कुछ अपना करना चाहते हैं। उन्होंने कॉर्पोरेट करियर को अलविदा कहकर जोखिम उठाया और आज उनकी कंपनी Living Green Organics करोड़ों का बिजनेस बन चुकी है।
शानदार नौकरी छोड़ी, क्यों लिया इतना बड़ा रिस्क?

प्रतीक तिवारी ने एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद Mahindra, Reliance Fresh, ITC Limited और Walmart जैसी बड़ी कंपनियों में काम किया। लेकिन 2012 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
इस फैसले के पीछे एक निजी दर्द था—परिवार में कैंसर से हुई मौतों ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि पैसा जरूरी है, लेकिन सेहत उससे भी ज्यादा जरूरी है। यहीं से उन्होंने केमिकल-फ्री फूड की दिशा में काम करने का फैसला लिया।
छत पर 150 गमलों से शुरू हुआ सफर
2013 से 2015 के बीच प्रतीक ने अपनी छत पर 150 से ज्यादा गमलों के साथ लगातार प्रयोग किए। उन्होंने 14 अलग-अलग ऑर्गेनिक कंपोनेंट्स का इस्तेमाल किया और दो साल की मेहनत के बाद एक खास Portable Farming System (PFS) तैयार किया।
👉 खास बात:
- बिना मिट्टी खेती (Soilless farming)
- ऑटोमैटिक ड्रिप सिंचाई
- UV-protected ग्रो बैग्स
कैसे काम करता है उनका बिजनेस मॉडल?

आज Living Green Organics का मॉडल काफी मजबूत हो चुका है:
B2C (घरों के लिए)
- लोग अपनी छत पर खुद सब्जियां उगा सकते हैं
- ready-to-use farming kits मिलती हैं
B2B (संस्थानों के लिए)
- अस्पताल, स्कूल, होटल
- बड़े पैमाने पर rooftop farming setups
बोनस फायदा:
- छत ठंडी रहती है
- घर का तापमान 6–7°C तक कम
मुश्किल समय भी आया, लेकिन हार नहीं मानी
एक समय ऐसा भी आया जब उनका रेवेन्यू गिर गया, खासकर लेबर-इंटेंसिव “ग्रीन वॉल” बिजनेस के कारण। लेकिन उन्होंने तुरंत रणनीति बदली और scalable farming kits पर फोकस किया।
यही फैसला turning point साबित हुआ।
अब ₹2 करोड़ पार, अगला टारगेट बड़ा

वित्त वर्ष 2025-26 में उनका बिजनेस ₹2 करोड़ से ज्यादा पहुंच गया। अब उनका लक्ष्य है:
- फ्रेंचाइजी मॉडल लॉन्च करना
- हर शहर में rooftop farming फैलाना
- लोगों को केमिकल-फ्री सब्जियां उगाने के लिए सक्षम बनाना
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
सुरक्षित नौकरी छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन सही उद्देश्य हो तो रास्ता बनता है
छोटे स्तर से शुरू करके भी बड़ा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है
हेल्थ और सस्टेनेबिलिटी आने वाले समय के सबसे बड़े अवसर हैं
निष्कर्ष

Prateek Tiwari की कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप की सफलता नहीं, बल्कि सोच बदलने की मिसाल है। उन्होंने दिखा दिया कि अगर आपके पास स्पष्ट उद्देश्य और धैर्य है, तो छत पर शुरू किया गया छोटा प्रयोग भी करोड़ों का बिजनेस बन सकता है।
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