नई दिल्ली, 29 अप्रैल: घरेलू वायदा बाजार में बुधवार को चांदी (Silver) की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे सफेद धातु पर दबाव बढ़ा।
Multi Commodity Exchange (MCX) पर मई डिलीवरी वाली चांदी की कीमत ₹1,137 गिरकर ₹2,36,208 प्रति किलोग्राम पहुंच गई, जो करीब 0.48% की गिरावट है। इस दौरान बाजार में 2,020 लॉट्स का कारोबार दर्ज किया गया।
जुलाई कॉन्ट्रैक्ट में भी तेज गिरावट
मई के अलावा जुलाई डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट में भी गिरावट देखने को मिली:
- कीमत गिरी: ₹1,964 प्रति किलो
- गिरावट: 0.81%
- अंतिम भाव: ₹2,40,799 प्रति किलोग्राम
- कारोबार: 6,868 लॉट्स
गिरावट के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
विश्लेषकों के अनुसार चांदी की कीमतों पर तीन बड़े फैक्टर दबाव डाल रहे हैं:
1. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
तेल की तेजी से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका है, जिससे औद्योगिक धातुओं की मांग पर असर पड़ता है।
2. मजबूत अमेरिकी डॉलर
डॉलर मजबूत होने पर कमोडिटी कीमतें आमतौर पर दबाव में आ जाती हैं, क्योंकि ये महंगी हो जाती हैं।
3. निवेशकों की मुनाफावसूली
हाल की तेजी के बाद ट्रेडर्स ने अपने पोजीशन कम किए, जिससे बाजार में सेलिंग प्रेशर बढ़ा।
चांदी क्यों प्रभावित होती है तेल और डॉलर से?
चांदी सिर्फ निवेश धातु नहीं है, बल्कि एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है। इसका इस्तेमाल:
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- सोलर पैनल
- ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री
- मेडिकल उपकरण
में होता है। इसलिए वैश्विक आर्थिक संकेतों का सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ता है।
आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है:
- अगर डॉलर मजबूत रहा → दबाव बना रहेगा
- अगर औद्योगिक मांग बढ़ी → रिकवरी संभव
- अगर तेल की कीमतें स्थिर हुईं → राहत मिल सकती है
निष्कर्ष
Multi Commodity Exchange पर चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट वैश्विक संकेतों, खासकर तेल की तेजी और डॉलर की मजबूती का परिणाम है। हालांकि, औद्योगिक मांग मजबूत रहने पर लंबे समय में सपोर्ट मिलने की संभावना बनी हुई है।
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