अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया दिन के कारोबार के दौरान 95.96 तक फिसल गया और अंत में 95.73 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ। यह पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में सात पैसे की गिरावट है।
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बने संशय ने डॉलर को मजबूत किया है। इसका सीधा असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ा है, जिनमें भारतीय रुपया भी शामिल है। खास बात यह है कि 2026 में अब तक रुपया छह प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है और एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है।
दिनभर भारी उतार-चढ़ाव में रहा रुपया
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.74 प्रति डॉलर पर कमजोर खुला। कारोबार के दौरान इसमें भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक समय यह 95.61 तक संभला, लेकिन बाद में बिकवाली दबाव बढ़ने से 95.96 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। अंत में भारतीय मुद्रा 95.73 प्रति डॉलर पर बंद हुई।
एक दिन पहले यानी बुधवार को भी रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा था। उस दिन यह 95.80 तक गिर गया था और 95.66 पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन रिकॉर्ड गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में निवेशकों की धारणा अभी भी दबाव में बनी हुई है।
क्यों टूट रहा है रुपया?
विश्लेषकों के मुताबिक रुपये की कमजोरी के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
1. मजबूत अमेरिकी डॉलर
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 98.51 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों ने संकेत दिया है कि वहां मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इससे यह आशंका बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है।
जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तब वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर आधारित परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ाते हैं। इससे भारत जैसे देशों की मुद्रा पर दबाव बढ़ता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये पर पड़ता है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में बढ़त के साथ 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने तेल कीमतों को ऊपर बनाए रखा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां आपूर्ति प्रभावित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल हो सकती है।
ऊंचे तेल दाम भारत के आयात बिल को बढ़ाते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी रुपये पर दबाव डाल रही है। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 4,703 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे।
जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, तो उन्हें डॉलर में रकम वापस ले जानी होती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ जाता है।
क्या महंगाई और बढ़ सकती है?
रुपये में गिरावट का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कई जरूरी औद्योगिक उत्पाद आयात करता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो इन वस्तुओं का आयात महंगा हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपया लंबे समय तक कमजोर बना रहता है, तो पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, सीएनजी और कई आयातित वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई भी प्रभावित हो सकती है।
RBI क्या कर सकता है?
बाजार को अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप का इंतजार है। आमतौर पर जब रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव होता है, तब RBI डॉलर बेचकर बाजार में स्थिरता लाने की कोशिश करता है।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, मजबूत डॉलर और बढ़ती मुद्रास्फीति चिंताओं के कारण रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, RBI का संभावित हस्तक्षेप और सरकार द्वारा सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने जैसे कदम रुपये को कुछ समर्थन दे सकते हैं।
उन्होंने अनुमान जताया कि निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपया 95.50 से 96.10 के दायरे में कारोबार कर सकता है।
शेयर बाजार में रही मजबूती
दिलचस्प बात यह रही कि रुपये की रिकॉर्ड गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 789 अंकों की तेजी के साथ 75,398.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 277 अंक चढ़कर 23,689.60 पर पहुंच गया।
विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी और कुछ चुनिंदा सेक्टरों में तेजी ने बाजार को सहारा दिया। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
क्या आगे और गिर सकता है रुपया?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में तीन चीजों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी:
- अमेरिका की ब्याज दर नीति
- पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति
- कच्चे तेल की कीमतें
यदि तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाती हैं और डॉलर मजबूत बना रहता है, तो रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे भी जा सकता है। हालांकि RBI की सक्रियता और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आने पर कुछ राहत मिल सकती है।
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