नई दिल्ली में भारत की मेजबानी में BRICS विदेश मंत्रियों की दो-दिवसीय बैठक जारी है। इस बैठक में दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे समय में BRICS+ समूह की आर्थिक ताकत, वैश्विक प्रभाव और सदस्य देशों की संपत्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
BRICS अब केवल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं। यही वजह है कि यह समूह अब वैश्विक व्यापार, ऊर्जा और निवेश की राजनीति में पहले से कहीं ज्यादा अहम माना जा रहा है।
दिल्ली में चल रही बैठक के दौरान भी यह बात सामने आई कि BRICS+ समूह अब दुनिया की अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। IMF के आंकड़ों के मुताबिक, BRICS+ देशों की संयुक्त नॉमिनल GDP करीब 31.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है, जो वैश्विक GDP का लगभग 27-30 फीसदी हिस्सा है। वहीं क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर इसकी हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा बताई जा रही है।
लेकिन सवाल यह है कि BRICS देशों में सबसे अमीर कौन है? क्या चीन सबसे आगे है? क्या रूस ने भारत को पीछे छोड़ दिया है? या फिर तेल संपदा वाले खाड़ी देशों ने बाजी मार ली है?
GDP और प्रति व्यक्ति आय में बड़ा फर्क
जब देशों की आर्थिक ताकत की बात होती है, तो अक्सर कुल GDP को देखा जाता है। इस आधार पर चीन BRICS समूह में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चीन की अर्थव्यवस्था अकेले कई BRICS देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था से भी बड़ी है।
हालांकि किसी देश के नागरिक औसतन कितने अमीर हैं, यह समझने के लिए GDP Per Capita यानी प्रति व्यक्ति आय को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। यह बताता है कि किसी देश की कुल आय वहां की आबादी में बांटने पर प्रति व्यक्ति कितनी पड़ती है।
इसी पैमाने पर देखने पर तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। यहां चीन, भारत और रूस से आगे UAE और सऊदी अरब जैसे देश निकल जाते हैं।
BRICS देशों में कौन सबसे अमीर?
IMF के 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार BRICS देशों की प्रति व्यक्ति आय के आधार पर रैंकिंग इस प्रकार है:
| रैंक | देश | प्रति व्यक्ति आय (डॉलर में) |
|---|---|---|
| 1 | UAE | 50,273.5 |
| 2 | सऊदी अरब | 35,121.7 |
| 3 | रूस | 14,889 |
| 4 | चीन | 13,303.1 |
| 5 | ब्राजील | 10,310.5 |
| 6 | दक्षिण अफ्रीका | 6,267.2 |
| 7 | ईरान | 5,190.2 |
| 8 | इंडोनेशिया | 4,925.4 |
| 9 | मिस्र | 3,338.5 |
| 10 | भारत | 2,694.7 |
| 11 | इथियोपिया | 1,133.9 |
इस सूची में सबसे ऊपर संयुक्त अरब अमीरात है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 50 हजार डॉलर से ज्यादा है। तेल, वित्तीय सेवाओं, पर्यटन और ग्लोबल निवेश केंद्र बनने की वजह से UAE ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त आर्थिक ताकत हासिल की है।
चीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, लेकिन सबसे अमीर नहीं
चीन BRICS समूह की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जरूर है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में वह चौथे स्थान पर है।
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह चीन की विशाल आबादी है। चीन की कुल GDP बहुत बड़ी है, लेकिन आबादी 140 करोड़ से ज्यादा होने के कारण प्रति व्यक्ति आय सीमित हो जाती है।
फिर भी चीन की प्रति व्यक्ति आय भारत से लगभग पांच गुना ज्यादा है। इसका कारण वहां का मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, एक्सपोर्ट आधारित अर्थव्यवस्था, हाई-टेक इंडस्ट्री और बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश है।
रूस ने कैसे बनाई बढ़त?
रूस इस सूची में तीसरे स्थान पर है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध के बावजूद रूस की प्रति व्यक्ति आय चीन से भी थोड़ी ज्यादा बनी हुई है।
इसके पीछे रूस का विशाल ऊर्जा क्षेत्र सबसे बड़ा कारण है। तेल, गैस और कमोडिटी निर्यात से रूस को भारी विदेशी मुद्रा मिलती है। इसके अलावा रूस की आबादी चीन और भारत की तुलना में काफी कम है, जिससे प्रति व्यक्ति आय ज्यादा दिखाई देती है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रहने पर रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत क्यों पीछे है?
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। भारत की कुल GDP तेजी से बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसके जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ने की संभावना जताई जा रही है।
लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत अभी BRICS देशों में निचले पायदान पर है। इसकी सबसे बड़ी वजह विशाल आबादी है।
भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बड़ा होने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय अभी लगभग 2,700 डॉलर के आसपास है। हालांकि सकारात्मक बात यह है कि भारत में middle class तेजी से बढ़ रही है, डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और manufacturing, semiconductor, defence तथा infrastructure sectors में निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत अगले 10-15 वर्षों तक 6-7 फीसदी की स्थिर आर्थिक वृद्धि बनाए रखता है, तो प्रति व्यक्ति आय में बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है।
तेल संपदा ने बदली खाड़ी देशों की तस्वीर
UAE और सऊदी अरब की ऊंची प्रति व्यक्ति आय के पीछे तेल और गैस सबसे बड़ा कारण रहे हैं।
हालांकि अब ये देश सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहते। UAE ने खुद को वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया है। वहीं सऊदी अरब “Vision 2030” के तहत tourism, entertainment, technology और manufacturing sectors में भारी निवेश कर रहा है।
यही वजह है कि BRICS में शामिल होने के बाद इन देशों का आर्थिक प्रभाव और बढ़ सकता है।
BRICS+ क्यों बन रहा है दुनिया का नया पावर सेंटर?
BRICS+ अब केवल एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है। यह पश्चिमी देशों के प्रभाव को संतुलित करने वाला बड़ा geopolitical bloc बनता जा रहा है।
इस समूह में दुनिया के बड़े तेल उत्पादक, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं और विशाल उपभोक्ता बाजार शामिल हैं।
विशेष रूप से:
- चीन वैश्विक manufacturing hub है
- भारत तेजी से बढ़ता consumer market है
- रूस energy superpower है
- UAE और सऊदी अरब global investment centers बन रहे हैं
यही कारण है कि BRICS+ अब डॉलर आधारित वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को चुनौती देने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मंच?
भारत के लिए BRICS केवल एक diplomatic group नहीं बल्कि strategic opportunity भी है।
भारत इस मंच के जरिए:
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना चाहता है
- Global South की आवाज बनना चाहता है
- व्यापार और निवेश बढ़ाना चाहता है
- चीन के प्रभाव को संतुलित करना चाहता है
नई दिल्ली में हो रही BRICS बैठक को भी इसी नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।
कौन है असली विजेता?
अगर कुल GDP देखें तो चीन BRICS का सबसे बड़ा आर्थिक खिलाड़ी है।
अगर प्रति व्यक्ति आय देखें तो UAE सबसे अमीर देश है।
अगर ऊर्जा ताकत देखें तो रूस और सऊदी अरब बेहद प्रभावशाली हैं।
वहीं भारत अभी प्रति व्यक्ति आय में पीछे जरूर है, लेकिन उसकी growth potential सबसे ज्यादा मानी जा रही है। आने वाले दशक में भारत BRICS समूह की सबसे बड़ी growth story बन सकता है।
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