Reliance Infrastructure Arbitration Award: अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Reliance Infrastructure) को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) के खिलाफ लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में बड़ी राहत मिली है। आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए MMRDA को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को ₹157.64 करोड़ की मूल राशि के साथ उस पर लागू ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह फैसला कंपनी के लिए वित्तीय रूप से अहम माना जा रहा है।
Highlights
- रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने MMRDA के खिलाफ आर्बिट्रेशन केस जीता।
- ट्रिब्यूनल ने कंपनी को ₹157.64 करोड़ और ब्याज देने का आदेश दिया।
- मामला मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) को दिए गए सबऑर्डिनेटेड डेट से जुड़ा था।
- फैसला 3:0 के बहुमत से रिलायंस इंफ्रा के पक्ष में आया।
- शेयरों में बुधवार को करीब 5% तक की गिरावट भी देखने को मिली।
Reliance Infrastructure को मिली बड़ी राहत
नई दिल्ली। अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को मुंबई मेट्रो परियोजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी विवाद में बड़ी सफलता मिली है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने MMRDA के खिलाफ उसके दावों को सही माना है और ₹157.64 करोड़ की मूल राशि के साथ उस पर देय ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह फैसला कंपनी की बैलेंस शीट और नकदी प्रवाह (Cash Flow) के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) को दिए गए सबऑर्डिनेटेड डेट (Subordinated Debt) से संबंधित था।
MMOPL, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और MMRDA का संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है, जिसमें—
- रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की हिस्सेदारी: 74%
- MMRDA की हिस्सेदारी: 26%
यही कंपनी वर्सोवा-अंधेरी-घाटकोपर मेट्रो कॉरिडोर का संचालन करती है। परियोजना के लिए रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा उपलब्ध कराए गए कर्ज की लागत और भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था।
ट्रिब्यूनल ने क्या फैसला सुनाया?
कंपनी के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने इस मामले में फैसला सुनाया, जिसकी जानकारी कंपनी को 29 जुलाई 2026 को प्राप्त हुई।
ट्रिब्यूनल ने 3:0 के सर्वसम्मत बहुमत से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों को स्वीकार करते हुए कहा कि कंपनी को:
- ₹157.64 करोड़ की मूल राशि
- उस राशि पर लागू ब्याज
का भुगतान किया जाए।
इस फैसले को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी और वित्तीय जीत माना जा रहा है।
शेयर बाजार में क्यों आई गिरावट?
दिलचस्प बात यह रही कि इस सकारात्मक फैसले के बावजूद 29 जुलाई 2026 को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान शेयर करीब 5% तक फिसल गए और खबर लिखे जाने तक लगभग 4.98% की गिरावट के साथ ₹60 के आसपास कारोबार कर रहे थे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार अच्छे कॉर्पोरेट घटनाक्रम के बावजूद व्यापक बाजार की कमजोरी, मुनाफावसूली या अन्य कारणों से शेयरों पर दबाव बना रह सकता है।
कंपनी के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पिछले कुछ वर्षों से कर्ज कम करने और अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में ट्रिब्यूनल का यह फैसला कंपनी के लिए अतिरिक्त नकदी प्राप्त करने का अवसर प्रदान कर सकता है। यदि आदेश के अनुरूप भुगतान होता है, तो इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और निवेशकों का भरोसा मजबूत होने की संभावना है।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


