केरल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राहुल गांधी ने UDF नेताओं के साथ नाश्ते पर बैठकर शिक्षा, बेरोजगारी और FCRA संशोधन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। जानें उनकी प्रमुख बातें और चुनावी रणनीति।
केरल में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह राज्य के नेताओं के साथ नाश्ते पर बैठकर चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते दिखे। यह नाश्ता, जिसमें अप्पम, पुट्टू और ऑमलेट शामिल थे, सिर्फ खाने का समय नहीं बल्कि केरल की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर गहन चर्चा का अवसर भी बन गया।
वीडियो में राहुल गांधी कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशान, और कुछ पार्टी उम्मीदवारों के साथ बैठकर ब्रेन ड्रेन, बेरोजगारी, शिक्षा प्रणाली और FCRA संशोधनों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करते दिखाई दिए।
UDF: केरल के लिए नया आशा का प्रतीक
राहुल गांधी ने पोस्ट में लिखा,
“केरल को बदलाव की जरूरत है—शिक्षा प्रणाली का पुनर्निर्माण, युवाओं के लिए वास्तविक अवसर, और ऐसी सरकार जो बीमारियों और वृद्धावस्था में अपने लोगों का समर्थन करे। UDF केरल के लोगों के लिए नया आशा है—हमारी टीम मजबूत, एकजुट और नेतृत्व करने के लिए तैयार है।”
इस बयान से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी UDF (United Democratic Front) केरल में जनता के बीच विश्वास और उम्मीद लौटाने की कोशिश कर रहे हैं।
शिक्षा प्रणाली और ब्रेन ड्रेन
बैठक के दौरान सतीशान ने राहुल गांधी को बताया कि कांग्रेस-नेतृत्व वाली UDF लंबे समय से सरकार की विफलताओं को उजागर और आलोचना कर रही है। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया:
- विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम पुराने और अप्रासंगिक हैं, जिससे युवा राज्य से बाहर रोजगार की तलाश में जा रहे हैं।
- अंगमाली के कांग्रेस विधायक रोजी एम जॉन ने कहा कि अधिकांश कला और विज्ञान कॉलेजों में दाखिला कम है और कई सीटें खाली हैं, क्योंकि “कोई वहां पढ़ाई करना नहीं चाहता।”
- इस स्थिति के कारण युवाओं का पलायन बढ़ रहा है।
वेणुगोपाल ने भी शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इसे अत्याधुनिक और रोजगार-केंद्रित बनाना होगा।
रोजगार और उद्योग
राहुल गांधी ने बेरोजगारी की समस्या पर भी विचार किया। उन्होंने कहा कि आज रोजगार के अवसर चीन, उसके पड़ोसी देशों और वियतनाम में मौजूद हैं, क्योंकि वही देश उत्पादन कर रहे हैं।
राहुल ने उल्लेख किया कि भारत में बड़े व्यापारी जैसे अडानी और अंबानी उत्पादन से बचते हैं और चीन के उत्पादों को बेचने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उनका तर्क था कि जब भारत में निर्माण होगा, तो कांग्रेस जैसी पार्टियों को शक्ति मिलेगी क्योंकि मजदूर फैक्ट्रियों में शामिल होंगे।
राहुल ने कहा,
“वे भारत में फैक्ट्रियां बनाने के बजाय चीन में उत्पादन करते हैं और फिर वही उत्पाद भारत में बेचते हैं।”
इस चर्चा ने यह रेखांकित किया कि रोजगार सृजन और उत्पादन केंद्रित नीतियां केरल और देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं।
FCRA संशोधन और धार्मिक संपत्ति विवाद
बैठक में राहुल गांधी और पार्टी नेताओं ने विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों पर भी चर्चा की। वेणुगोपाल ने इसे “हाइजैकिंग बिल” बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कोई संगठन विदेश से छोटी रकम प्राप्त करता है, तो पूरा संगठन अधिग्रहित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह विशिष्ट धार्मिक संपत्तियों पर नियंत्रण की कोशिश का हिस्सा है, जैसे कि Waqf Act में संशोधन के दौरान मुस्लिम भूमि और अब ईसाई संपत्तियों पर ध्यान।
इस चर्चा ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर UDF का ध्यान केंद्रित है और वे इसे जनता के सामने लाना चाहते हैं।
हल्के-फुल्के क्षण और चुनावी माहौल
भले ही बैठक गंभीर मुद्दों पर केंद्रित थी, नेताओं ने कुछ हल्के क्षण भी साझा किए। राहुल गांधी ने CPI(M) नेताओं पर आधारित सबरिमाला मंदिर के सोने की चोरी के परोडी गीत की एक पंक्ति गाई, जिससे मीडिया में चर्चा फिर से उभरी।
राहुल ने नेताओं से नाश्ते के खाने पर मजाक भी किया, जिसमें मछली और मटन शामिल थे। सतीशान ने जवाब दिया, “अन्यथा हम दोपहर का भोजन नहीं कर पाएंगे।” राहुल ने हंसते हुए कहा, “मुझे पता है कि आप रोज़ खाना खाते हैं। केरल के लोग कभी भोजन छोड़ते नहीं।”
इन क्षणों ने दिखाया कि नेताओं और नेताओं के बीच सहज संवाद चुनाव प्रचार का हिस्सा भी बन सकता है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी की केरल यात्रा और UDF नेताओं के साथ बैठक यह दिखाती है कि केरल चुनावों में बदलाव की उम्मीद, युवाओं के रोजगार, शिक्षा सुधार, और पारदर्शिता प्रमुख मुद्दे हैं।
- UDF को केरल में विश्वास और नई उम्मीद लौटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
- शिक्षा और रोजगार पर केंद्रित चर्चा ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक सुधार और नीति निर्माण कितने जरूरी हैं।
- FCRA संशोधन और धार्मिक संपत्तियों पर चर्चा ने UDF के सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के दृष्टिकोण को उजागर किया।
यह बैठक यह भी दिखाती है कि राजनीति केवल नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि जनता से जुड़े संवाद और हल्के क्षण भी चुनावी माहौल का हिस्सा हैं।
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