PM Kisan Yojana: पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जारी होने से पहले किसानों के लिए एक और राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 17 लाख टन यूरिया आयात करने का फैसला किया है। सरकार का दावा है कि देश में फिलहाल खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
Highlights
- सरकार 17 लाख टन यूरिया आयात करेगी।
- देश में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद।
- खरीफ सीजन में खाद की कमी नहीं होने का दावा।
- किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था।
- 23वीं पीएम किसान किस्त से पहले किसानों को बड़ी राहत।
नई दिल्ली। पीएम किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) की 23वीं किस्त को लेकर देशभर के करोड़ों किसान इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने किसानों को एक और बड़ी राहत देने वाली घोषणा की है। खरीफ सीजन में बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में यूरिया और अन्य उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। साथ ही घरेलू आपूर्ति को और मजबूत करने के लिए 17 लाख टन यूरिया आयात की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
कृषि क्षेत्र में खरीफ सीजन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दौरान धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और अन्य प्रमुख फसलों की बुवाई होती है। ऐसे समय में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता रहती है। सरकार ने कहा है कि इस बार उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था पहले से कर ली गई है।
खरीफ सीजन में तेजी से बढ़ रही खाद की मांग
देश के विभिन्न राज्यों में मानसून की प्रगति के साथ खरीफ फसलों की बुवाई भी तेजी पकड़ रही है। ऐसे में यूरिया और अन्य उर्वरकों की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव वंदना प्रेयशी के अनुसार वर्तमान समय में देश में उर्वरकों का स्टॉक संतोषजनक स्तर पर है और आपूर्ति को लेकर किसी प्रकार की गंभीर समस्या नहीं है।
सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों के अनुभव को देखते हुए इस बार पहले से पर्याप्त स्टॉक तैयार रखा गया है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कितना है देश में उर्वरकों का स्टॉक?
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2026 सीजन के लिए देश में कुल 383.9 लाख टन उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है। इसके मुकाबले वर्तमान में 196.65 लाख टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है।
यह स्टॉक सामान्य आवश्यकता से लगभग 33 प्रतिशत अधिक बताया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक यह उपलब्धि बेहतर योजना, मजबूत सप्लाई चेन और समय रहते भंडारण व्यवस्था तैयार करने की वजह से संभव हो पाई है।
अब तक किसान लगभग 102.78 लाख टन रासायनिक उर्वरकों की खरीद कर चुके हैं, जो पूरे सीजन की अनुमानित मांग का करीब 37 प्रतिशत है।
17 लाख टन यूरिया आयात की तैयारी
सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) ने 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए वैश्विक निविदा जारी की थी। अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।
जानकारी के मुताबिक इस टेंडर के लिए दुनिया भर की कंपनियों से 60 लाख टन से अधिक यूरिया की पेशकश प्राप्त हुई है। सबसे कम बोली लगभग 445 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई है। इससे सरकार को बेहतर कीमत पर यूरिया उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा सरकार ने 50 लाख टन से अधिक यूरिया और पीएंडके (फॉस्फेटिक एवं पोटासिक) उर्वरकों की अतिरिक्त व्यवस्था भी सुनिश्चित की है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयात प्रक्रिया तय समय पर पूरी हो जाती है तो खरीफ सीजन के दौरान यूरिया की उपलब्धता बनी रहेगी। इससे किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा और फसलों की बुवाई समय पर हो सकेगी।
हालांकि फिलहाल सरकार ने यूरिया की कीमतों में किसी प्रकार की कटौती या राहत की घोषणा नहीं की है। लेकिन पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने से बाजार में कृत्रिम कमी और वितरण संबंधी समस्याओं को रोका जा सकेगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध होना किसानों के लिए किसी भी मूल्य राहत से कम नहीं है, क्योंकि बुवाई के दौरान उर्वरकों की कमी सीधे उत्पादन पर असर डाल सकती है।
पीएम किसान की 23वीं किस्त से पहले डबल राहत
केंद्र सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की जाएगी। इसके तहत पात्र किसानों के बैंक खातों में ₹2,000 की राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी।
अब यूरिया आयात और खाद उपलब्धता को लेकर सरकार के आश्वासन ने किसानों को दोहरी राहत दी है। एक तरफ उन्हें आर्थिक सहायता मिलेगी तो दूसरी तरफ खेती के लिए जरूरी उर्वरकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।
निष्कर्ष: खरीफ सीजन के बीच सरकार का 17 लाख टन यूरिया आयात करने का फैसला किसानों के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है। पर्याप्त स्टॉक और अतिरिक्त आयात व्यवस्था से इस बार खाद की कमी की आशंका काफी हद तक कम हो गई है। ऐसे में किसान बिना किसी चिंता के बुवाई और खेती के कार्य पर ध्यान दे सकते हैं।


