भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी हुई है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही सीएनजी की कीमतों में भी इजाफा हुआ है, जिससे आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल और सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के कारण यह फैसला लेना पड़ा। खास बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक तनाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
दिल्ली समेत बड़े शहरों में पेट्रोल के नए रेट
नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। पहले यह 94.77 रुपये प्रति लीटर था। यानी एक झटके में 3 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वहीं डीजल की कीमत 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
देश के अन्य महानगरों में भी तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। कोलकाता में पेट्रोल सबसे ज्यादा 3.29 रुपये महंगा हुआ है। वहीं मुंबई और चेन्नई में भी कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
देश के बड़े शहरों में पेट्रोल की नई कीमतें
| शहर | नई कीमत (रु./लीटर) | बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| दिल्ली | 97.77 | 3.00 |
| कोलकाता | 108.74 | 3.29 |
| मुंबई | 106.68 | 3.14 |
| चेन्नई | 103.67 | 2.83 |
डीजल भी हुआ महंगा
पेट्रोल के साथ-साथ डीजल की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में डीजल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसलिए इसका असर सीधे महंगाई पर पड़ सकता है।
| शहर | नई कीमत (रु./लीटर) | बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| दिल्ली | 90.67 | 3.00 |
| कोलकाता | 95.13 | 3.11 |
| मुंबई | 93.14 | 3.11 |
| चेन्नई | 95.25 | 2.86 |
सीएनजी के दाम भी बढ़े
दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। नई दरों के बाद राजधानी में सीएनजी 79.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। इसका असर ऑटो, टैक्सी और कमर्शियल वाहनों पर पड़ सकता है, जिससे शहरों में यात्रा महंगी होने की आशंका है।
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध संकट है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव ने वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित किया है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में बाधा आने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी तेजी आई है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है।
ब्रेंट क्रूड में लगातार तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.35 फीसदी की तेजी के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चा तेल लगभग 50 फीसदी तक महंगा हो चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
तेल कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव
#BREAKING: Fuel prices have increased significantly. Petrol prices rose from 94.77 to 97.81, while diesel prices increased from 87.67 to 90.71, marking a hike of 3.04 per litre for both fuels pic.twitter.com/iosWA3DsaL
— IANS (@ians_india) May 15, 2026 सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के कारण उनका मार्जिन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनियों को हर महीने लगभग 30,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। इसी दबाव को कम करने के लिए अब कीमतों में इजाफा किया गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर स्थिर रहता है तो तेल कंपनियां आगे भी कीमतें बढ़ा सकती हैं।
आम आदमी पर कैसे पड़ेगा असर?
पेट्रोल और डीजल महंगा होने का असर केवल वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहता। भारत में ट्रांसपोर्टेशन का बड़ा हिस्सा डीजल आधारित है। ऐसे में जब डीजल महंगा होता है तो:
- सब्जियों की ढुलाई महंगी होती है
- दूध और राशन के दाम बढ़ सकते हैं
- ऑनलाइन डिलीवरी खर्च बढ़ सकता है
- बस और ट्रक किराए में इजाफा हो सकता है
- खेती और सिंचाई की लागत भी बढ़ती है
यानी आने वाले समय में रसोई से लेकर यात्रा तक हर चीज महंगी हो सकती है।
थोक महंगाई पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर
सरकार द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। पेट्रोल की महंगाई दर 32.4 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि हाई-स्पीड डीजल की महंगाई 25 फीसदी से ज्यादा रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन कीमतों में यह तेजी जारी रही तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई भी तेजी से बढ़ सकती है।
क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?
ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे। यदि ईरान युद्ध और ज्यादा बढ़ता है या होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई संकट गहरा सकता है।
भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लगातार दबाव बना रह सकता है।
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