NPS New Rules PFRDA: नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करने वाले सब्सक्राइबर्स के लिए पेंशन फंड नियामक PFRDA ने स्कीम्स के वर्गीकरण और नामकरण को लेकर नया फ्रेमवर्क जारी किया है। इसका उद्देश्य NPS की अलग-अलग स्कीम्स को एक समान तरीके से पेश करना और निवेशकों के लिए रिस्क व रिटर्न की तुलना आसान बनाना है।
NPS Schemes New Changes: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए महत्वपूर्ण अपडेट है। पेंशन फंड नियामक PFRDA (Pension Fund Regulatory and Development Authority) ने NPS की स्कीम्स के वर्गीकरण, नामकरण और उनके प्रेजेंटेशन को लेकर नया फ्रेमवर्क पेश किया है।
नए नियमों का सबसे बड़ा उद्देश्य NPS में मौजूद अलग-अलग स्कीम्स को एक तय ढांचे में लाना है, ताकि निवेशक आसानी से समझ सकें कि किसी स्कीम में कितना इक्विटी एक्सपोजर है, उसका जोखिम कितना है और अलग-अलग विकल्पों की तुलना कैसे की जाए।
इस नए फ्रेमवर्क के तहत स्कीम्स की कैटेगरी तय करने के साथ-साथ उनके नाम, रिस्क प्रोफाइल, फंड साइज और अन्य जरूरी जानकारियों को भी अधिक पारदर्शी तरीके से दिखाने की व्यवस्था की गई है।
NPS की स्कीम्स अब 5 प्रमुख हिस्सों में होंगी
PFRDA के नए फ्रेमवर्क के तहत NPS की मौजूदा और नई स्कीम्स को मुख्य रूप से पांच श्रेणियों में व्यवस्थित किया जाएगा।
1. लाइफसाइकिल बेस्ड स्कीम्स
लाइफसाइकिल आधारित स्कीम्स में निवेशक की उम्र के हिसाब से इक्विटी और डेट जैसे एसेट्स का आवंटन बदलता रहता है। इसमें LC-Aggressive, LC-50 Moderate और LC-25 Low जैसे विकल्प शामिल हैं।
इसका मकसद उम्र बढ़ने के साथ पोर्टफोलियो के जोखिम को धीरे-धीरे कम करना है।
2. एक्टिव चॉइस
इस विकल्प में निवेशक खुद यह तय कर सकता है कि उसके निवेश का कितना हिस्सा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में लगाया जाए।
यानी यहां एसेट एलोकेशन को लेकर निवेशक के पास अपेक्षाकृत ज्यादा नियंत्रण रहता है।
3. NPS संचय
NPS संचय को अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े निवेशकों के लिए तैयार किया गया है। इसका ढांचा सरकारी क्षेत्र के NPS पैटर्न पर आधारित है।
4. 4A स्कीम्स
इस श्रेणी में विशेष उद्देश्य वाली योजनाओं को शामिल किया जाएगा। इसमें NPS वात्सल्य, NPS स्वास्थ्य और NPS MSME जैसी स्कीम्स शामिल होंगी।
5. Multiple Scheme Framework यानी MSF
नए फ्रेमवर्क में Multiple Scheme Framework (MSF) सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत स्कीम्स को उनके इक्विटी एक्सपोजर और जोखिम के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाएगा।
MSF में इक्विटी के आधार पर 5 कैटेगरी
MSF के तहत स्कीम्स को पांच कैटेगरी में बांटा गया है। इक्विटी में ज्यादा निवेश वाली स्कीम का जोखिम भी अपेक्षाकृत ज्यादा होगा।
| कैटेगरी | इक्विटी में निवेश | रिस्क प्रोफाइल |
|---|---|---|
| कैटेगरी A | 80% से 100% | बहुत ज्यादा जोखिम |
| कैटेगरी B | 60% से 80% | ज्यादा जोखिम |
| कैटेगरी C | 35% से 60% | मध्यम जोखिम |
| कैटेगरी D | 10% से 35% | कम जोखिम |
| कैटेगरी E | 0% से 10% | न्यूनतम जोखिम |
इस व्यवस्था से निवेशकों को स्कीम चुनते समय यह समझने में आसानी होगी कि उनका पैसा किस स्तर तक इक्विटी मार्केट में लगाया जा सकता है।
30 दिनों के अंदर बदलेंगे कई NPS स्कीम्स के नाम
नए फ्रेमवर्क में स्कीम्स के नाम को लेकर भी एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग पेंशन फंड्स की योजनाओं को एक समान तरीके से पहचानने में मदद करना है।
MSF के तहत आने वाली स्कीम के नाम में फंड हाउस का नाम, NPS, संबंधित कैटेगरी कोड और स्कीम का नाम शामिल करना होगा। अगर स्कीम Tier-II से संबंधित है, तो नाम के अंत में Tier-II की पहचान भी दी जाएगी।
PFRDA के निर्देश के अनुसार पेंशन फंड्स को सर्कुलर जारी होने के 30 दिनों के भीतर मौजूदा स्कीम्स के नाम नए फॉर्मेट के अनुरूप करने होंगे।
एक कैटेगरी में अधिकतम 2 स्कीम्स
नए नियमों में स्कीम्स की संख्या को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
अब कोई भी पेंशन फंड Tier-I या Tier-II के तहत एक ही कैटेगरी में अधिकतम दो स्कीम्स चला सकेगा।
यदि किसी पेंशन फंड के पास किसी एक कैटेगरी में दो से अधिक स्कीम्स मौजूद हैं, तो उसे तय समय सीमा के भीतर इन स्कीम्स का मर्जर या रीस्ट्रक्चरिंग करना होगा।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक ही पेंशन फंड के भीतर समान प्रकृति वाली कई स्कीम्स की संख्या कम होगी और निवेशकों के लिए विकल्पों को समझना आसान हो सकता है।
किसी स्कीम के विलय या दूसरे बदलाव से पहले संबंधित सब्सक्राइबर्स को इसकी जानकारी देने की व्यवस्था भी होगी।
Risk-o-meter से पता चलेगा स्कीम का जोखिम
NPS निवेशकों के लिए एक और अहम बदलाव Risk-o-meter से जुड़ा है।
स्कीम चुनते समय निवेशकों को केवल रिटर्न की जानकारी ही नहीं, बल्कि स्कीम के जोखिम और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
इन जानकारियों में मुख्य रूप से शामिल होंगे:
- पेंशन फंड और स्कीम का नाम
- स्कीम लॉन्च होने की तारीख
- पिछला प्रदर्शन/रिटर्न
- संबंधित बेंचमार्क
- लागू चार्जेस
- Risk-o-meter
- Assets Under Management यानी AUM
इससे निवेशक केवल पिछले रिटर्न को देखकर फैसला लेने के बजाय स्कीम के जोखिम और आकार को भी ध्यान में रख सकेंगे।
हर MSF स्कीम के लिए मिलेगा Scheme Essentials Document
नए फ्रेमवर्क में प्रत्येक MSF स्कीम के लिए NPS Scheme Essentials Document उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
इस दस्तावेज में स्कीम के उद्देश्य, जोखिम, टैक्स से जुड़े पहलुओं और निकासी यानी विड्रॉल के नियमों जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।
इसका फायदा यह होगा कि निवेशक किसी स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसके प्रमुख नियमों और जोखिमों को एक जगह समझ सकेंगे।
साल में 2 बार बदल सकेंगे फंड या स्कीम
निवेशकों को पेंशन फंड या निवेश स्कीम बदलने की सुविधा भी दी गई है। एक वित्त वर्ष में निवेशक अधिकतम दो बार पेंशन फंड या इन्वेस्टमेंट स्कीम बदलने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं।
खास बात यह है कि फंड या स्कीम बदलने से निवेशक का मूल vesting period प्रभावित नहीं होगा।
यानी केवल फंड या स्कीम बदलने के कारण निवेश की मूल अवधि नए सिरे से शुरू नहीं होगी।
अगर MSF स्कीम बंद हुई तो क्या होगा?
अगर भविष्य में कोई MSF स्कीम बंद की जाती है, तो सब्सक्राइबर्स को दूसरी उपलब्ध स्कीम में जाने का विकल्प दिया जाएगा।
अगर निवेशक तय समय में कोई विकल्प नहीं चुनता है, तो उसे उसी पेंशन फंड की LC-50 Moderate (10E/55Y) स्कीम में ट्रांसफर किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्कीम बंद होने की स्थिति में निवेशक का पैसा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के न रह जाए।
NPS निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?
PFRDA के नए फ्रेमवर्क का सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता और तुलना में आसानी के रूप में सामने आ सकता है।
अगर किसी निवेशक की मौजूदा स्कीम का नाम नए स्टैंडर्ड के कारण बदलता है, तो केवल नाम बदलने का मतलब यह नहीं है कि निवेश की प्रकृति भी जरूरी तौर पर बदल गई है। हालांकि, अगर स्कीम का मर्जर या रीस्ट्रक्चरिंग होती है, तो निवेशकों को संबंधित सूचना ध्यान से देखनी चाहिए।
नए निवेशकों के लिए खास तौर पर यह बदलाव उपयोगी हो सकता है, क्योंकि अब स्कीम की कैटेगरी, इक्विटी एक्सपोजर और Risk-o-meter जैसी जानकारी के आधार पर विकल्पों को समझना आसान होगा।
वहीं, मौजूदा सब्सक्राइबर्स को अपने पेंशन फंड की ओर से मिलने वाले नोटिस और स्कीम से संबंधित नए दस्तावेजों पर नजर रखनी चाहिए।
सरकारी कर्मचारियों के NPS पर लागू नहीं होगा यह फ्रेमवर्क
यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान रखना जरूरी है। PFRDA का यह नया क्लासिफिकेशन फ्रेमवर्क रिटेल/आम नागरिकों के NPS अकाउंट्स के लिए है। यह सरकारी कर्मचारियों के NPS अकाउंट्स पर लागू नहीं होगा।
इसलिए निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि उनके NPS खाते की कैटेगरी क्या है और उनके लिए कौन से नियम लागू होते हैं।
निष्कर्ष
NPS के नए नियमों से स्कीम्स के नामकरण, वर्गीकरण, इक्विटी एक्सपोजर और जोखिम की जानकारी को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है। खास तौर पर MSF की पांच कैटेगरी, एक कैटेगरी में अधिकतम दो स्कीम्स, Risk-o-meter, AUM की जानकारी और स्कीम मर्जर के नियम निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हैं।
हालांकि, किसी भी NPS स्कीम को चुनने से पहले केवल रिटर्न देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशक को अपनी उम्र, निवेश अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और रिटायरमेंट लक्ष्य के आधार पर स्कीम का चुनाव करना चाहिए।


