New Closing Auction System (CAS): शेयर बाजार में लागू हुए नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (CAS) को लेकर ट्रेडर्स और निवेशकों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। बाजार बंद होने के अंतिम मिनटों में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से कई ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग तेज हो गई है, लेकिन सेबी ने फिलहाल किसी भी बदलाव से साफ इनकार कर दिया है।
नए CAS सिस्टम पर बढ़ा विवाद
भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में लागू किए गए Closing Auction System (CAS) ने ट्रेडर्स की रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है। खासकर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) से जुड़े शेयरों में क्लोजिंग प्राइस तय करने के नए तरीके के कारण बाजार बंद होने के समय अचानक बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं।
कई निवेशकों और प्रोफेशनल ट्रेडर्स का कहना है कि इस बदलाव से उन्हें अप्रत्याशित नुकसान हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी CAS को वापस लेने की मांग लगातार उठ रही है।
इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बढ़ते विरोध को देखते हुए SEBI और प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों ने बड़े ब्रोकरेज हाउस के साथ बैठक की। हालांकि, सेबी ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल CAS सिस्टम में किसी प्रकार का बदलाव करने की कोई योजना नहीं है। साथ ही ब्रोकर्स से अधिक से अधिक निवेशकों और ट्रेडर्स को इस नई व्यवस्था के बारे में जागरूक करने को कहा गया है।
क्या है नया Closing Auction System (CAS)?
Closing Auction System वह प्रक्रिया है जिसके जरिए बाजार बंद होने के समय शेयरों की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय की जाती है।
पहले कैसे तय होती थी क्लोजिंग प्राइस?
पुराने सिस्टम में दोपहर 3:00 बजे से 3:30 बजे के बीच हुए सभी ट्रेड्स के औसत (Average Price) के आधार पर क्लोजिंग प्राइस तय होती थी।
नए सिस्टम में क्या बदला?
अब F&O सेगमेंट के करीब 200 शेयरों के लिए क्लोजिंग प्राइस एक ऑक्शन प्रक्रिया के जरिए तय की जाती है।
- ऑक्शन प्रक्रिया लगभग 3:15 बजे से 3:35 बजे तक चलती है।
- पहले खरीद और बिक्री के ऑर्डर इकट्ठे किए जाते हैं।
- इसके बाद सभी ऑर्डर मैच कर एक आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय की जाती है।
इस बदलाव का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और संस्थागत ट्रेडिंग के अनुरूप बनाना है, लेकिन शुरुआती दिनों में इससे अस्थिरता भी बढ़ी है।
Algo Trading पर सबसे ज्यादा असर
नए CAS सिस्टम का सबसे अधिक असर Algorithmic Trading (Algo Trading) करने वाले निवेशकों पर पड़ा है।
ज्यादातर एल्गोरिदम पुराने क्लोजिंग पैटर्न और ऐतिहासिक डेटा के आधार पर तैयार किए गए थे। नए ऑक्शन सिस्टम में अंतिम मिनटों में कीमतों में होने वाले बड़े बदलाव के कारण ये मॉडल सही अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं। परिणामस्वरूप कई ऑटोमेटेड ट्रेडिंग रणनीतियां लगातार गलत संकेत दे रही हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
Wave Analytics के फाउंडर पीयूष चौधरी के अनुसार, CAS की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ट्रेडर्स को पहले से यह अंदाजा नहीं लग पाता कि अंतिम क्लोजिंग प्राइस क्या होगी।
उनका कहना है कि प्रोफेशनल ट्रेडर्स ऑर्डर फ्लो, लिक्विडिटी, डेरिवेटिव पोजिशन और ऐतिहासिक डेटा के आधार पर रणनीति बनाते हैं। लेकिन यदि क्लोजिंग प्राइस अनुमान से बिल्कुल अलग निकलती है, तो पूरी ट्रेडिंग रणनीति विफल हो सकती है और अचानक बड़ा नुकसान हो सकता है।
सेंसेक्स और निफ्टी की चाल क्यों अलग दिख रही है?
पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी के क्लोजिंग मूवमेंट में स्पष्ट अंतर देखने को मिला है।
उदाहरण के तौर पर, गुरुवार को:
- सेंसेक्स 373.76 अंक (0.48%) बढ़कर 78,954.76 पर बंद हुआ।
- निफ्टी 50 केवल 11.35 अंक (0.05%) की बढ़त के साथ 24,636 पर बंद हुआ।
इससे पहले भी एक सत्र में दिनभर दोनों इंडेक्स कमजोरी में कारोबार कर रहे थे, लेकिन क्लोजिंग के समय सेंसेक्स सकारात्मक क्षेत्र में बंद हुआ जबकि निफ्टी लगभग सपाट रहा।
इसकी वजह क्या है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए CAS सिस्टम का असर निफ्टी के शेयरों पर अधिक दिखाई दे रहा है क्योंकि इनमें बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी ज्यादा होती है।
ऑक्शन के दौरान बड़े ऑर्डर्स निफ्टी के कई शेयरों की अंतिम कीमतों को प्रभावित करते हैं, जबकि सेंसेक्स के शेयरों पर फिलहाल इसका असर अपेक्षाकृत कम नजर आ रहा है।
फरीदाबाद की ट्रेडर शिखा गुप्ता का कहना है कि कई बार दोपहर 3:15 बजे तक फायदे में दिख रही ट्रेड बाजार बंद होने तक घाटे में बदल जाती है, जिससे जोखिम काफी बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
नया CAS सिस्टम बाजार की क्लोजिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। हालांकि शुरुआती चरण में इससे ट्रेडर्स, खासकर शॉर्ट टर्म और एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग करने वालों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
फिलहाल सेबी ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों में तत्काल बदलाव नहीं होगा। ऐसे में बाजार सहभागियों को नए सिस्टम के अनुरूप अपनी ट्रेडिंग रणनीतियों और जोखिम प्रबंधन को अपडेट करना होगा।


