Meerut Real Estate Price Boom: दिल्ली-NCR के पारंपरिक रियल एस्टेट हब्स में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ने के बीच अब खरीदार मेरठ, नौगांव और बड़ौदा मेव जैसे उभरते शहरों का रुख कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बेहतर कनेक्टिविटी, कम कीमत में ज्यादा स्पेस और एक्सप्रेसवे के कारण घटता सफर का समय है। पिछले 2-3 वर्षों में मेरठ के कुछ इलाकों में जमीन के दाम करीब दोगुने तक बढ़ने की बात सामने आई है।
दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी खरीदना लंबे समय से महंगा सौदा रहा है। नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों में अच्छी लोकेशन पर घर खरीदने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन अब रियल एस्टेट खरीदारों की प्राथमिकताएं बदलती दिख रही हैं। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नमो भारत (RRTS) और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने NCR के बाहर बसे कई शहरों को दिल्ली से तेज और आसान कनेक्टिविटी दे दी है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा मेरठ को मिलता दिख रहा है, जबकि राजस्थान के अलवर क्षेत्र में नौगांव और बड़ौदा मेव जैसे इलाके वीकेंड होम, फार्महाउस और लाइफस्टाइल प्रॉपर्टी के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
मेरठ में 2-3 साल में जमीन के दाम 100% तक बढ़े
मेरठ के रियल एस्टेट बाजार में आई तेजी को समझने के लिए एक स्थानीय खरीदार का अनुभव काफी कुछ बताता है। करीब ढाई साल पहले प्रदीप चौधरी ने शहर की एक पॉश कॉलोनी में 150 वर्ग गज के मकान की कीमत करीब ₹1.1 करोड़ देखी थी। हाल में उसी प्रॉपर्टी को उन्होंने करीब ₹2.5 करोड़ में खरीदा।
उनका कहना है कि इसी तरह की प्रॉपर्टी अगर नोएडा में ली जाए तो खर्च करीब ₹4-5 करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि गुरुग्राम में यह रकम और अधिक हो सकती है। दिल्ली में नौकरी होने के बावजूद अब उनके लिए मेरठ में रहना ज्यादा व्यावहारिक हो गया है।
दरअसल, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नमो भारत/RRTS ने मेरठ और दिल्ली के बीच यात्रा को काफी आसान बना दिया है। यही कारण है कि नौकरीपेशा लोगों का एक वर्ग अब महंगे NCR इलाकों में रहने के बजाय मेरठ जैसे शहरों को विकल्प के तौर पर देख रहा है।
रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ मेरठ (REDAM) के अध्यक्ष अशोक गर्ग के अनुसार, पहले दिल्ली से दूरी और ट्रैफिक मेरठ की बड़ी चुनौती थे। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस स्थिति को काफी हद तक बदल दिया है और पिछले 2-3 वर्षों में शहर के कई हिस्सों में जमीन की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।
मेरठ के पॉश इलाके साकेत में भी इसका असर नजर आता है। करीब ढाई साल पहले यहां जमीन के दाम लगभग ₹80,000-₹90,000 प्रति वर्ग गज बताए जाते थे, जो अब बढ़कर करीब ₹2 लाख-₹2.25 लाख प्रति वर्ग गज तक पहुंच गए हैं।
आखिर मेरठ लोगों को क्यों पसंद आ रहा है?
मेरठ के तेजी से उभरने के पीछे केवल जमीन की कीमतें नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी और लाइफस्टाइल का कॉम्बिनेशन है।
पहले दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में नौकरी करने वाले लोगों के लिए वहीं घर लेना स्वाभाविक विकल्प था। लेकिन लगातार बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों, ट्रैफिक और सीमित स्पेस ने इस सोच को बदलना शुरू कर दिया है।
मेरठ में अपेक्षाकृत कम बजट में बड़ा घर, स्वतंत्र मकान या विला मिल सकता है। वहीं नोएडा और गुरुग्राम में इसी बजट में कई मामलों में खरीदार को छोटा अपार्टमेंट ही मिलता है।
उदाहरण के तौर पर, मेरठ में करीब ₹1.5-₹2.5 करोड़ के बजट में बड़ा विला या स्वतंत्र मकान मिलने की संभावना रहती है, जबकि NCR के प्रीमियम इलाकों में इसी रकम में विकल्प सीमित हो सकते हैं।
यानी खरीदार अब सिर्फ यह नहीं देख रहा कि प्रॉपर्टी किस शहर में है। वह यह भी देख रहा है कि घर से ऑफिस तक पहुंचने में कितना समय लगेगा।
‘किलोमीटर’ नहीं, अब ‘मिनट’ में तय हो रही प्रॉपर्टी की कीमत
रियल एस्टेट बाजार में इंफ्रास्ट्रक्चर का असर हमेशा महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड पब्लिक ट्रांसपोर्ट ने इसका पैमाना बदल दिया है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नमो भारत/RRTS ने मेरठ की कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। इससे दिल्ली में काम करने वाले लोगों के लिए मेरठ से रोजाना आना-जाना पहले की तुलना में ज्यादा व्यवहारिक हो गया है।
यही पैटर्न NCR के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई दे रहा है। जहां पहले 50-60 किलोमीटर की दूरी किसी इलाके को ‘दूर’ बना देती थी, वहीं तेज एक्सप्रेसवे या रेल कनेक्टिविटी के बाद वही दूरी स्वीकार्य लगने लगती है।
इसलिए डेवलपर्स और प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए अब किसी इलाके की दूरी का मतलब केवल किलोमीटर नहीं रह गया है। सफर का समय और उसकी विश्वसनीयता ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
नौगांव और बड़ौदा मेव में फार्महाउस का बढ़ता आकर्षण
मेरठ जहां मुख्य रूप से नौकरीपेशा और परिवारों के लिए रेजिडेंशियल विकल्प बन रहा है, वहीं राजस्थान के अलवर क्षेत्र में स्थित नौगांव और बड़ौदा मेव का बाजार अलग तरह की मांग से गति पकड़ रहा है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी ने इन क्षेत्रों को दिल्ली और गुरुग्राम के लोगों के लिए ज्यादा सुलभ बनाया है। नतीजतन यहां वीकेंड होम, फार्महाउस, रिजॉर्ट और ग्लैंपिंग जैसी प्रॉपर्टीज में रुचि बढ़ी है।
स्थानीय रियल एस्टेट कारोबारियों के अनुसार, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बाद नौगांव और बड़ौदा मेव के कुछ शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में करीब 30-40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
राम रतन ग्रुप के चेयरमैन विजय राम रतन के मुताबिक, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी ने दिल्ली और गुरुग्राम से वीकेंड ट्रैवल को आसान बनाया है। इसका फायदा आसपास के होटल, फार्महाउस और रिजॉर्ट कारोबार को भी मिल रहा है।
यहां खरीदारों का उद्देश्य रोजाना ऑफिस जाना नहीं, बल्कि शहर से दूर एक प्राइवेट और शांत लाइफस्टाइल स्पेस तैयार करना है।
हाईवे किनारे बढ़ रहे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट
बढ़ती मांग को देखते हुए डेवलपर्स भी अपनी रणनीति बदल रहे हैं। पहले जहां अधिकांश प्रोजेक्ट दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम जैसे स्थापित बाजारों के आसपास केंद्रित रहते थे, वहीं अब नए एक्सप्रेसवे और कॉरिडोर के आसपास जमीन तलाशने का ट्रेंड बढ़ा है।
दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के आसपास बागपत और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास नौगांव जैसे इलाकों में प्लॉट, विला और गेटेड फार्म कम्युनिटी जैसे प्रोजेक्ट्स पर फोकस बढ़ रहा है।
इन इलाकों में डेवलपर्स को बड़े भूखंड अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं। इससे उन्हें बड़े प्रोजेक्ट विकसित करने की गुंजाइश मिलती है।
हाईवे के किनारे नजर आने वाले बड़े-बड़े रियल एस्टेट बिलबोर्ड भी इस बदलाव की ओर इशारा करते हैं। अब प्रॉपर्टी बेचने के लिए केवल ‘दिल्ली से कितनी दूर’ बताना पर्याप्त नहीं है। मार्केटिंग में ज्यादा जोर इस बात पर है कि दिल्ली या गुरुग्राम से वहां पहुंचने में कितने मिनट लगेंगे।
क्या यह सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने की कहानी है?
पूरी तस्वीर इससे थोड़ी बड़ी है। NCR के बाहर रियल एस्टेट की बढ़ती मांग को तीन प्रमुख बदलावों से जोड़कर देखा जा सकता है।
पहला, कनेक्टिविटी: एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल ने यात्रा का समय कम किया है।
दूसरा, कीमत: दिल्ली-NCR के महंगे बाजारों की तुलना में आसपास के शहरों में समान बजट में ज्यादा जमीन और बड़ा घर मिल सकता है।
तीसरा, लाइफस्टाइल: कोविड के बाद बड़े घर, खुली जगह और शहर की भीड़ से दूर रहने की मांग ने भी फार्महाउस और वीकेंड होम जैसे सेगमेंट को आकर्षित किया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर एक्सप्रेसवे के आसपास जमीन खरीदना फायदे का सौदा होगा। किसी भी निवेश से पहले जमीन का टाइटल, भूमि उपयोग, स्थानीय नियम, डेवलपमेंट प्लान, सड़क की वास्तविक कनेक्टिविटी और भविष्य की मांग की जांच जरूरी है।
आगे क्या है रियल एस्टेट का गेम?
मेरठ और नौगांव दो अलग-अलग तरह के रियल एस्टेट बाजारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मेरठ तेजी से रेजिडेंशियल और कम्यूटर हब के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जबकि नौगांव और बड़ौदा मेव वीकेंड होम, फार्महाउस और टूरिज्म आधारित प्रॉपर्टी के लिए उभर रहे हैं।
इन दोनों बाजारों में समानता सिर्फ एक है—कनेक्टिविटी।
जब सड़क और रेल नेटवर्क किसी शहर को बड़े रोजगार या कारोबारी केंद्र से जोड़ देता है, तो प्रॉपर्टी बाजार का पूरा समीकरण बदल सकता है। यही वजह है कि दिल्ली-NCR का रियल एस्टेट नक्शा अब केवल दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम तक सीमित नहीं रह गया है।
आने वाले वर्षों में जिन शहरों और कस्बों को बेहतर एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड रेल, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और रोजगार के नए केंद्रों का फायदा मिलेगा, वे NCR के पारंपरिक रियल एस्टेट बाजारों के मजबूत विकल्प बन सकते हैं।
हालांकि, बढ़ती कीमतों के बीच खरीदारों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर आ जाना अपने आप में कीमतों के लगातार बढ़ने की गारंटी नहीं है। प्रॉपर्टी निवेश में लोकेशन, कानूनी स्थिति, डेवलपमेंट की वास्तविक प्रगति और स्थानीय मांग सबसे अहम फैक्टर बने रहेंगे।


