Naseeruddin Shah News: दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड स्वीकार करने से इनकार करने की वजह बताई। उनका कहना है कि ऐसे अवॉर्ड अक्सर यह संकेत देते हैं कि कलाकार का सफर पूरा हो चुका है, जबकि वह अभी भी अभिनय करना चाहते हैं और उनका काम बाकी है।
76 साल की उम्र में भी नसीरुद्दीन शाह अभिनय की दुनिया में लगातार सक्रिय हैं। इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में उनकी दमदार परफॉर्मेंस को दर्शकों और समीक्षकों से काफी सराहना मिल रही है। इसके अलावा उन्हें अमेजन MX प्लेयर के शो ‘मेड इन इंडिया’ में उद्योगपति जेआरडी टाटा का किरदार निभाने के लिए भी खूब प्रशंसा मिली थी।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड क्यों नहीं लेते नसीरुद्दीन शाह?
मुंबई में आयोजित फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की सक्सेस पार्टी में नसीरुद्दीन शाह ने अपने करियर और अवॉर्ड्स को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में उन्हें कई लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देने की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने उन्हें लेने से मना कर दिया।
अभिनेता ने कहा, “लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड्स का मतलब होता है कि आपका काम पूरा हो गया है। यह कहने का एक तरीका है कि अब आप किसी काम के नहीं रहे। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है कि मैं इसे लेकर बैठ जाऊं। मुझे नहीं लगता कि मेरा काम अभी पूरा हुआ है।”
नसीरुद्दीन शाह ने यह भी साफ किया कि वह अभी अभिनय से दूर जाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं और आगे भी अच्छे किरदार निभाते रहना चाहते हैं।
‘मैं वापस आऊंगा’ के लिए दर्शकों का जताया आभार
नसीरुद्दीन शाह ने फिल्म की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए दर्शकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें इस फिल्म का हिस्सा बनने का मौका मिला।
उन्होंने कहा, “मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानता हूं कि मैं इस फिल्म का हिस्सा बना और मुझे इस पर बहुत गर्व है। आपके प्यार और सपोर्ट के लिए धन्यवाद।”
फिल्म की सफलता पार्टी उस समय आयोजित की गई जब फिल्म ने सिनेमाघरों में 50 दिन पूरे किए। आज के समय में किसी फिल्म का इतने लंबे समय तक थिएटर में बने रहना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
नसीरुद्दीन शाह का शानदार फिल्मी सफर
नसीरुद्दीन शाह ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1970 के दशक में समानांतर सिनेमा से की थी। इसके बाद उन्होंने मुख्यधारा की फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने ‘हम पांच’ जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में लोकप्रियता हासिल की। 1980 के दशक में ‘कर्मा’, ‘जलवा’ और ‘मालामाल’ जैसी फिल्मों के जरिए वह बड़े पर्दे के चर्चित अभिनेता बने।
अपने शानदार अभिनय के लिए नसीरुद्दीन शाह को कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने साल 1979 में फिल्म ‘स्पर्श’ और 1984 में ‘पार’ के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जीता। इसके अलावा 2005 में फिल्म ‘इकबाल’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला।
‘मैं वापस आऊंगा’ की कहानी और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन
इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ एक इमोशनल पीरियड ड्रामा है। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह 95 वर्षीय ईशर सिंह ग्रेवाल की भूमिका में नजर आते हैं।
कहानी एक ऐसे बुजुर्ग व्यक्ति की है, जो अपने अतीत और बंटवारे के समय की यादों से जूझ रहा है। पाकिस्तान के सरगोधा जाने की कोशिश के दौरान उन्हें स्ट्रोक आ जाता है। इसके बाद उनके परिवार के पुराने राज सामने आने लगते हैं।
फिल्म में दिलजीत दोसांझ, शरवरी और वेदांग रैना भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म को शुरुआत में धीमी प्रतिक्रिया मिली, लेकिन बाद में दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के कारण इसकी कमाई में तेजी आई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की लोकप्रियता को देखते हुए इसके वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर ₹100 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
नसीरुद्दीन शाह आज भी क्यों हैं खास?
नसीरुद्दीन शाह उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने अपने करियर में लगातार अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। वह सिर्फ लोकप्रियता के लिए नहीं बल्कि अभिनय की गुणवत्ता और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर उनका नजरिया यह दिखाता है कि वह अभी भी खुद को एक सक्रिय कलाकार मानते हैं और नए अनुभवों के लिए तैयार हैं।


