दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Meta ने पिछले एक साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में जिस तरह से आक्रामक भर्ती अभियान चलाया है, उसने पूरी सिलिकॉन वैली को चौंका दिया है। अरबों डॉलर की डील, करोड़ों डॉलर के साइनिंग बोनस और टॉप AI रिसर्चर्स को अपने पाले में लाने की होड़ ने AI इंडस्ट्री को किसी स्पोर्ट्स लीग जैसा बना दिया है।
लेकिन अब Meta के SuperIntelligence Lab के प्रमुख Alexandr Wang ने इस पूरी बहस पर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि Meta में आने वाले रिसर्चर्स सिर्फ पैसों के लिए कंपनी नहीं बदल रहे, बल्कि असली वजह “कंप्यूट पावर”, रिसर्च की आजादी और तेजी से काम करने का मौका है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब Meta पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि वह OpenAI, Google DeepMind और Anthropic जैसी कंपनियों से टैलेंट छीनने के लिए रिकॉर्ड स्तर के पैकेज ऑफर कर रही है।
AI सेक्टर में शुरू हो चुकी है नई ‘टैलेंट वॉर’
पिछले कुछ वर्षों में AI सेक्टर टेक इंडस्ट्री का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। ChatGPT के आने के बाद generative AI की दौड़ इतनी तेज हुई कि दुनिया की बड़ी कंपनियां अब सिर्फ उत्पाद नहीं बल्कि “सुपरइंटेलिजेंस” बनाने की बात कर रही हैं।
इसी रेस में Meta ने भी अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी। Metaverse पर अरबों डॉलर खर्च करने के बाद अब कंपनी तेजी से AI इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च पर निवेश बढ़ा रही है। इसी कड़ी में Meta ने पिछले साल Scale AI में करीब 14 अरब डॉलर का निवेश किया और उसके सह-संस्थापक Alexandr Wang को अपने नए AI लैब की जिम्मेदारी दी।
टेक इंडस्ट्री में इसे अब तक की सबसे महंगी “talent acquisition deals” में से एक माना जा रहा है।
कौन हैं Alexandr Wang?
28 वर्षीय Alexandr Wang सिलिकॉन वैली के सबसे चर्चित युवा उद्यमियों में गिने जाते हैं। उन्होंने कम उम्र में Scale AI की शुरुआत की थी, जो AI मॉडल्स के लिए data labeling और training infrastructure उपलब्ध कराती है।
AI मॉडल्स को बेहतर बनाने के लिए जिस बड़े पैमाने पर डेटा की जरूरत होती है, उसमें Scale AI की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही वजह है कि Meta ने Wang को सिर्फ एक executive की तरह नहीं बल्कि अपनी AI रणनीति के केंद्र में रखा है।
अब Wang Meta के SuperIntelligence Lab को लीड कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य भविष्य के advanced AI systems विकसित करना है।
“लोग सिर्फ पैसे के लिए नहीं आए”
“Core Memory” पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान Wang ने कहा कि बाहर के लोग Meta की hiring strategy को गलत तरीके से समझ रहे हैं।
उनके मुताबिक:
“यह मान लेना गलत है कि हमारी टीम सिर्फ पैसे के लिए Meta आई है।”
उन्होंने कहा कि ज्यादातर रिसर्चर्स पहले से ही OpenAI, Google DeepMind, Anthropic, Apple जैसी कंपनियों में बेहद अच्छी सैलरी और सुविधाएं पा रहे थे। अगर वे वहीं बने रहते तो भी करोड़ों डॉलर कमा सकते थे। बावजूद इसके उन्होंने Meta जॉइन करना चुना।
Wang का कहना है कि असली आकर्षण “compute access” था।
AI की दुनिया में GPU ही असली ताकत
आज AI इंडस्ट्री में सबसे बड़ा हथियार सिर्फ टैलेंट नहीं बल्कि कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है। बड़े language models को train करने के लिए हजारों हाई-एंड GPUs और विशाल डेटा सेंटर की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI की असली ताकत उन्हीं कंपनियों के पास होगी जिनके पास सबसे ज्यादा chips, सबसे बड़े data centers, सबसे सस्ता compute, और सबसे तेज training systems होंगे।
Wang ने कहा कि Meta ने रिसर्चर्स को भरोसा दिलाया कि उन्हें अपने projects के लिए बड़े स्तर पर dedicated GPU resources मिलेंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ वैज्ञानिकों को 30,000 तक chips allocation का वादा किया गया था।
AI रिसर्च में यह बहुत बड़ी बात मानी जाती है क्योंकि कई कंपनियों में researchers को GPU access के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार internal approvals और resource allocation policies research speed को धीमा कर देती हैं।
Meta की नई रणनीति: कम लोग, लेकिन सबसे बेहतरीन
Wang ने अपनी टीम को “truly cracked group” बताया। उनका कहना है कि Meta बड़ी लेकिन धीमी organization के बजाय एक ऐसी elite टीम बनाना चाहता है जहां bureaucracy कम हो, फैसले तेजी से लिए जाएं, और researchers बिना ज्यादा approval process के bold experiments कर सकें।
सिलिकॉन वैली में इसे “talent density” कहा जाता है। Netflix, OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियां भी इसी मॉडल पर काम कर रही हैं, जहां कम लेकिन बेहद high-skilled engineers की टीम बनाई जाती है।
Meta vs OpenAI: टेक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी लड़ाई
Meta और OpenAI के बीच यह टैलेंट वॉर पिछले साल टेक इंडस्ट्री का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गई थी।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि Meta ने कई AI researchers को 100 मिलियन डॉलर तक के signing packages, और चार साल में 300 मिलियन डॉलर तक की compensation offers दीं।
हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन उद्योग जगत में इस पर व्यापक चर्चा हुई।
इसी दौरान Meta ने कई बड़े नाम अपनी टीम में शामिल किए:
- पूर्व GitHub CEO Nat Friedman
- Apple foundation models टीम के पूर्व प्रमुख Ruoming Pang
- पूर्व OpenAI researcher Trapit Bansal
OpenAI के Chief Research Officer Mark Chen ने उस समय कर्मचारियों से कहा था कि ऐसा महसूस हो रहा है जैसे “किसी ने हमारे घर में घुसकर कुछ चुरा लिया हो।”
जब Zuckerberg खुद पहुंचे ‘सूप’ लेकर
इस टैलेंट वॉर की सबसे दिलचस्प कहानी “सूप डिप्लोमेसी” रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक Mark Zuckerberg खुद OpenAI के एक कर्मचारी को मनाने उसके घर पहुंचे थे और साथ में सूप भी लेकर गए थे। बाद में Mark Chen ने मजाक में कहा कि उन्होंने भी Meta से लोगों को हायर करने के लिए “सूप डिलीवर” किया।
अब Wang ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वह सूप वास्तव में घर का बना हुआ था, लेकिन इससे Meta का संदेश साफ था:
“हम इस तकनीक को लेकर बेहद गंभीर हैं।”
उनके मुताबिक Meta हर researcher की specific research direction को समझकर personalized तरीके से recruitment कर रहा था।
AI सेक्टर में बदल रहा है पावर बैलेंस
AI इंडस्ट्री अब सिर्फ software engineering तक सीमित नहीं रह गई है। यह semiconductor supply, energy infrastructure, cloud computing, और geopolitical competition से भी जुड़ चुकी है।
NVIDIA जैसी कंपनियों के chips की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। अमेरिका और चीन के बीच AI supremacy की प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है। ऐसे में Meta, Google, Microsoft और Amazon जैसी कंपनियां अरबों डॉलर AI data centers पर खर्च कर रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में AI sector में वही कंपनियां आगे रहेंगी जिनके पास सबसे मजबूत infrastructure, top researchers, massive datasets, और long-term capital होगा।
क्या Meta AI रेस में वापसी कर पाएगी?
Meta ने open-source AI मॉडल्स Llama के जरिए पहले ही AI इंडस्ट्री में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। लेकिन कंपनी अभी भी OpenAI और Google DeepMind से आगे निकलने की कोशिश कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Meta अपने researchers को promised compute access दे पाती है, internal politics कम रखती है, और innovation speed बनाए रखती है, तो आने वाले वर्षों में AI race और भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि AI सेक्टर में अब सिर्फ salary नहीं, बल्कि “research freedom + compute power + elite talent ecosystem” ही असली हथियार बन चुका है।
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