प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से एक साल तक सोने की खरीद सीमित करने और सादगी अपनाने की अपील का असर अब देश के बड़े सर्राफा बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक मेरठ सर्राफा बाजार में कारोबार लगभग ठहर सा गया है। कारोबारियों का कहना है कि बाजार में ग्राहक गायब हैं, दुकानें खाली पड़ी हैं और व्यापार 20-30 फीसदी तक सिमट गया है।
मेरठ का यह सर्राफा बाजार देश के पुराने बुलियन ट्रेडिंग हब्स में गिना जाता है। यहां सोना, चांदी और हीरे का बड़ा कारोबार होता है। लेकिन हाल के दिनों में बाजार में पसरा सन्नाटा कारोबारियों की चिंता बढ़ा रहा है। कई दुकानदार अब ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ₹5,000 से ₹7,000 प्रति 10 ग्राम तक की छूट देने लगे हैं।
₹20,000 करोड़ के कारोबार पर संकट
मेरठ बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के महासचिव विजय आनंद अग्रवाल के मुताबिक, पूरे मेरठ बुलियन बाजार का सालाना कारोबार करीब ₹20,000 करोड़ का है। यह कारोबार लगभग 200 होलसेल दुकानों और करीब 30,000 कारीगरों व गोल्डस्मिथ के नेटवर्क पर टिका हुआ है। इनमें बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल से आए कारीगरों की भी है।
उन्होंने कहा कि उद्योग पिछले तीन साल से पहले ही मंदी का सामना कर रहा था और अब प्रधानमंत्री की अपील के बाद हालात और मुश्किल हो गए हैं। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है ताकि सेक्टर के लिए राहत उपायों पर चर्चा की जा सके।
कारोबारियों ने दिए सरकार को सुझाव
व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में सोने के आयात पर दबाव कम करना चाहती है, तो पुराने गहनों की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना चाहिए। उनका सुझाव है कि बैंकों और घरों में पड़ा निष्क्रिय सोना बाजार में लाने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं बनाई जाएं।
एसोसिएशन ने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक के गोल्ड रिजर्व का एक हिस्सा बाजार में उतारने पर विचार किया जा सकता है ताकि सप्लाई बढ़े और आयात निर्भरता कम हो।
“सुबह दुकान खोलते हैं, शाम को खाली लौटते हैं”
मेरठ के BR Jewellers के मालिक अंकित जैन ने कहा कि कई दुकानों में पूरा दिन एक भी ग्राहक नहीं आ रहा। कारोबारियों के सामने कर्मचारियों की सैलरी देना और कारीगरों को काम उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में कारीगर और छोटे व्यापारी पहले से कर्ज और बैंक लोन पर निर्भर हैं। अगर यही स्थिति रही तो रोजगार संकट गहरा सकता है।
एक अन्य व्यापारी ने कहा कि व्यापारी अब रोज सुबह दुकान खोलते हैं और शाम को यही सोचते हुए घर लौटते हैं कि आगे क्या होगा। उनका सवाल है कि अगर फिजिकल गोल्ड खरीद पर नैतिक दबाव बनाया जा रहा है, तो गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड ट्रेडिंग पर कोई रोक क्यों नहीं है।
शादी-ब्याह और भारतीय संस्कृति से जुड़ा है सोना
कारोबारियों का कहना है कि भारत में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि “स्त्रीधन” और सामाजिक परंपरा का हिस्सा है। खासकर उत्तर भारत में शादी-ब्याह के मौसम में सोने की खरीद पारिवारिक और सांस्कृतिक जरूरत मानी जाती है।
व्यापारियों के मुताबिक, लंबे समय तक खरीद घटने से ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों पर असर पड़ सकता है।
बढ़ सकती है गोल्ड स्मगलिंग की आशंका
सर्राफा बाजार में कारोबारियों के बीच एक और चिंता तेजी से उभर रही है—सोने की तस्करी। कई व्यापारियों का मानना है कि यदि घरेलू बाजार में खरीद पर दबाव बढ़ा और कीमतें ऊंची रहीं, तो ग्रे मार्केट सक्रिय हो सकता है।
हाल के दिनों में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला है। फिलहाल देश में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹16,158 प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹14,806 प्रति ग्राम के आसपास बनी हुई है।
कारीगरों पर सबसे ज्यादा असर
मेरठ के अगरवाल मार्केट की नील गली में छोटे कमरे में काम करने वाले गोल्डस्मिथ नज़रुल ने बताया कि पहले मंदी के समय भी रोज 500 ग्राम तक काम मिल जाता था, लेकिन अब कई कारीगरों को सिर्फ 100 ग्राम तक का काम मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि कई दुकानों ने मजदूरों की संख्या कम करनी शुरू कर दी है। अब मेहनत के बाद मुश्किल से ₹500-700 रोज की कमाई हो पा रही है।
अर्थव्यवस्था बनाम कारोबार की चुनौती
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि वे देशहित और आर्थिक अनुशासन की जरूरत को समझते हैं, लेकिन लाखों लोगों की रोजी-रोटी भी इस उद्योग से जुड़ी हुई है। ऐसे में सरकार को संतुलित नीति बनानी होगी ताकि आयात नियंत्रण और रोजगार दोनों के बीच संतुलन बना रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की मांग लंबे समय तक दबाव में रहती है, तो इसका असर केवल ज्वैलरी दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि कारीगरों, छोटे फाइनेंसरों, लॉजिस्टिक्स और शादी उद्योग तक फैल सकता है।
Also Read:


