पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत को मिली राहत
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) लेकर आ रहे दो बड़े जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और अगले सप्ताह भारत के बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं। ऐसे समय में जब दुनिया को तेल और गैस सप्लाई बाधित होने का डर सता रहा है, भारत के लिए यह घटनाक्रम ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों जहाजों में कुल 66,392 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है। यह गैस घरेलू जरूरतों और औद्योगिक उपयोग दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कौन-कौन से जहाज भारत आ रहे हैं?
भारत की ओर आने वाले दोनों जहाज अलग-अलग देशों के झंडे वाले हैं और इनमें बड़ी मात्रा में एलपीजी भरी हुई है।
1. SYMI जहाज
मार्शल द्वीप के झंडे वाला SYMI नाम का जहाज 19,965 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इस जहाज ने 13 मई को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। इसके 16 मई को गुजरात के कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है।
इस जहाज पर कुल 21 विदेशी चालक दल के सदस्य मौजूद हैं। मंत्रालय के अनुसार जहाज फिलहाल सुरक्षित भारतीय समुद्री मार्ग की ओर बढ़ रहा है।
2. NV SUNSHINE जहाज
दूसरा जहाज NV SUNSHINE है, जो वियतनाम के झंडे वाला पोत है। यह जहाज 46,427 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इसने 14 मई को होर्मुज पार किया और इसके 18 मई तक कर्नाटक के न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचने की संभावना जताई गई है।
इस जहाज पर 24 विदेशी क्रू सदस्य सवार हैं। दोनों जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को भारत के लिए बड़ी रणनीतिक राहत माना जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह रास्ता वैश्विक तेल और गैस सप्लाई की जीवनरेखा माना जाता है।
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य-पूर्वी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में होर्मुज में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे भारत की अर्थव्यवस्था, पेट्रोल-डीजल कीमतों और एलपीजी सप्लाई को प्रभावित कर सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित होता है तो भारत में:
- एलपीजी की कीमतें बढ़ सकती हैं
- पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं
- महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है
- उद्योगों की लागत बढ़ सकती है
इसी वजह से इन दोनों जहाजों का सुरक्षित निकलना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत में क्यों बढ़ी चिंता?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। एलपीजी के मामले में भी भारत खाड़ी देशों से भारी मात्रा में सप्लाई लेता है। पिछले कुछ वर्षों में घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने की कोशिश हुई है, लेकिन मांग के मुकाबले आयात अभी भी काफी अहम बना हुआ है।
हाल के महीनों में:
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
- पश्चिम एशिया में युद्ध
- समुद्री मार्गों पर हमले
- जहाज बीमा लागत में बढ़ोतरी
जैसे कारणों ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर सप्लाई चेन प्रभावित होती तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता था।
भारतीय जहाज ‘हाजी अली’ पर हमला
जहां एक ओर एलपीजी जहाजों के सुरक्षित निकलने की खबर राहत देने वाली है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जहाज ‘हाजी अली’ पर हमला चिंता बढ़ाने वाला रहा।
मुकेश मंगल के मुताबिक यह भारतीय ध्वज वाला लकड़ी का जहाज सोमालिया से शारजाह जा रहा था। 13 मई की सुबह जहाज पर हमला हुआ जिसके बाद यह समुद्र में डूब गया।
हालांकि राहत की बात यह रही कि ओमान कोस्ट गार्ड ने जहाज पर मौजूद सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। सभी सदस्य अब ओमान के दिब्बा पोर्ट पहुंच चुके हैं।
इस घटना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया संकट की गंभीरता को उजागर किया है।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
पश्चिम एशिया में हालात तब और खराब हो गए जब अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त कार्रवाई की। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जब तक परमाणु मुद्दे का “सीधा समाधान” नहीं निकलता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की अर्थव्यवस्था भारी दबाव में है और वह जल्द से जल्द होर्मुज मार्ग को सामान्य करना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव अगर लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
भारत सरकार की क्या तैयारी है?
ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकारी एजेंसियां:
- एलपीजी स्टॉक की निगरानी
- वैकल्पिक सप्लाई रूट
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार
- समुद्री सुरक्षा
जैसे मुद्दों पर सक्रिय हैं।
भारत पहले भी कई बार पश्चिम एशिया संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में सफल रहा है। इस बार भी सरकार सप्लाई चेन बाधित न हो, इसके लिए लगातार समुद्री और कूटनीतिक स्तर पर काम कर रही है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
फिलहाल इन जहाजों के सुरक्षित पहुंचने से तत्काल एलपीजी संकट की आशंका कम हुई है। इससे घरेलू गैस सप्लाई सामान्य रहने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो आने वाले समय में:
- LPG सिलेंडर महंगे हो सकते हैं
- पेट्रोल-डीजल कीमतों में उछाल आ सकता है
- ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ सकती है
- खाद्य महंगाई पर असर पड़ सकता है
इसलिए भारत के लिए होर्मुज की स्थिति आने वाले हफ्तों में बेहद अहम बनी रहेगी।
निष्कर्ष
दो बड़े एलपीजी जहाजों का सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। 66 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गैस की यह खेप ऐसे समय में आ रही है जब पूरी दुनिया पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंतित है।
हालांकि समुद्री हमलों और अमेरिका-ईरान तनाव ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक सप्लाई रणनीति पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
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