नई दिल्ली: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद जून 2026 में म्यूचुअल फंड निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहा। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में इक्विटी म्यूचुअल फंड में 28,973 करोड़ रुपये का नेट निवेश हुआ, जो मई के 22,908 करोड़ रुपये की तुलना में करीब 26% अधिक है। वहीं SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए निवेश बढ़कर 31,781 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।
मई में इक्विटी फंड्स में निवेश 12 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन जून में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में आई मजबूती ने खुदरा निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ा दिया। इसका असर म्यूचुअल फंड निवेश के आंकड़ों में साफ दिखाई दिया।
SIP निवेश ने बनाया तीन महीने का रिकॉर्ड
AMFI के आंकड़ों के मुताबिक जून में SIP के जरिए कुल 31,781 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। यह मई की तुलना में लगभग 27 करोड़ रुपये अधिक है और मार्च के बाद का सबसे ऊंचा मासिक स्तर भी है। पिछले वर्ष जून की तुलना में SIP निवेश में करीब 17% की वृद्धि दर्ज की गई, जो यह दर्शाता है कि निवेशक नियमित निवेश की रणनीति पर लगातार भरोसा जता रहे हैं।
मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश
जून में सबसे अधिक निवेश मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में देखने को मिला। इन दोनों श्रेणियों में कुल 11,692 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो कुल इक्विटी इनफ्लो का लगभग 40% है।
विभिन्न कैटेगरी में निवेश का विवरण इस प्रकार रहा:
- मिड-कैप फंड्स: ₹6,090 करोड़
- स्मॉल-कैप फंड्स: ₹5,602 करोड़
- फ्लेक्सी-कैप फंड्स: ₹5,231 करोड़
- लार्ज-कैप फंड्स: ₹2,067 करोड़
हालांकि, डिविडेंड यील्ड फंड्स और इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) से निवेशकों ने निकासी जारी रखी।
डेट स्कीमों से भारी निकासी, फिर भी इक्विटी में भरोसा कायम
जून में डेट ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स से 1.09 ट्रिलियन रुपये की भारी निकासी हुई। इसी वजह से पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग में कुल 52,949 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसके बावजूद इक्विटी फंड्स में मजबूत निवेश यह संकेत देता है कि लंबी अवधि के निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार पर बना हुआ है।
गोल्ड ETF में भी निवेशकों की वापसी
जून में गोल्ड ETF में भी निवेशकों ने जोरदार वापसी की। इस दौरान 3,443.23 करोड़ रुपये का नेट निवेश दर्ज किया गया, जबकि मई में इस श्रेणी से 725.04 करोड़ रुपये की नेट निकासी हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जोखिम कम करने के लिए गोल्ड ETF की ओर लौटे हैं।
विशेषज्ञों की राय
TRUST म्यूचुअल फंड के प्रेसिडेंट एवं हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट सौरभ कटारिया का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है और घरेलू निवेश लगातार बाजार को सहारा दे रहा है।
वहीं, मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया की सीनियर एनालिस्ट नेहा मेश्राम के अनुसार, निवेशक जोखिम संतुलित करने और पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए गोल्ड ETF सहित अलग-अलग एसेट क्लास की ओर रुख कर रहे हैं।
समको म्यूचुअल फंड के CEO विराज गांधी ने कहा कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट ने हाल के महीनों में बेहतर प्रदर्शन किया है। यही वजह है कि निवेशकों ने इन कैटेगरी में अधिक भरोसा दिखाया, जबकि थीमैटिक और कुछ अन्य डाइवर्सिफाइड फंड्स में निवेश अपेक्षाकृत कम रहा।
क्यों बढ़ा जून में निवेश?
मई में वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने एकमुश्त निवेश (Lump Sum Investment) कम कर दिया था, जिससे इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 40% तक गिर गया था। लेकिन जून में बाजार में स्थिरता लौटने, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों की बेहतर रिकवरी तथा SIP के माध्यम से लगातार निवेश जारी रहने से निवेशकों का विश्वास दोबारा मजबूत हुआ।
निष्कर्ष
जून 2026 के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय निवेशकों का लंबी अवधि के निवेश पर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। SIP निवेश का रिकॉर्ड स्तर, इक्विटी फंड्स में 26% की बढ़ोतरी और मिड-कैप व स्मॉल-कैप फंड्स में तेज इनफ्लो इस बात का संकेत है कि बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक व्यवस्थित निवेश रणनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भी म्यूचुअल फंड उद्योग में मजबूत निवेश का सिलसिला जारी रह सकता है।


