Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव स्थिर रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दोनों में मजबूत तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान वार्ता, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है, जिससे बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
दिल्ली में सोना 100 रुपये चढ़ा, चांदी स्थिर
दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 100 रुपये बढ़कर 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। हालांकि यह बढ़त मामूली रही, लेकिन इससे संकेत मिलता है कि घरेलू बाजार में खरीदारी का रुझान बना हुआ है।
वहीं चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। कारोबारियों के अनुसार औद्योगिक मांग और निवेशकों की सीमित खरीदारी के कारण चांदी फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की जोरदार तेजी
वैश्विक बाजार में मंगलवार को कीमती धातुओं में अच्छी तेजी दर्ज की गई।
- स्पॉट गोल्ड 0.6% बढ़कर 4,078 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
- यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 1.1% चढ़कर 4,134.60 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
- स्पॉट सिल्वर 2.6% उछलकर 59.7 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस मजबूती का असर आने वाले दिनों में घरेलू बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता पर
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत को लेकर निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। बाजार में तब तक बड़ी खरीदारी की संभावना कम है, जब तक भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिल जाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में किसी भी नए घटनाक्रम का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है क्योंकि अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं।
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार
कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च विशेषज्ञ एवीबी कायनात चेनवाला का कहना है कि बाजार की अगली दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
यदि रोजगार, महंगाई या उपभोक्ता खर्च से जुड़े आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहते हैं तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें क्यों हैं अहम?
विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें अभी भी संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर से काफी ऊपर बनी हुई हैं। यदि क्रूड लंबे समय तक महंगा रहता है तो वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है।
महंगाई बढ़ने पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती टाल सकता है या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोने की मांग कमजोर पड़ती है क्योंकि निवेशकों का रुझान ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों की ओर बढ़ जाता है।
रिकॉर्ड हाई से करीब 28% नीचे है सोना
विश्लेषकों के मुताबिक इस साल जनवरी के अंत में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। इसके बाद फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने तथा वैश्विक बाजार में बदलते आर्थिक माहौल के चलते बुलियन बाजार में दबाव देखने को मिला।
वर्तमान स्तर पर सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से लगभग 28 फीसदी नीचे कारोबार कर रही हैं। हालांकि हाल के दिनों में इसमें रिकवरी के संकेत भी दिखाई दिए हैं।
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से क्या होगा असर?
अमेरिकी वित्तमंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौता होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।
यदि यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाता है तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बेहतर होगी और तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे महंगाई का दबाव कम होगा और भविष्य में सोने के लिए सकारात्मक माहौल बन सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
फिलहाल घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में सीमित तेजी दिखाई दे रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख मजबूत बना हुआ है। आने वाले दिनों में अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर संकेत, कच्चे तेल की चाल और मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे।
यदि आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो वैश्विक घटनाक्रम और बाजार की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा।


