भारत में सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है। सोमवार, 4 मई को सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, जिससे 24 कैरेट गोल्ड ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं चांदी की कीमतों में भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई। ऐसे में निवेशकों और आम खरीदारों के मन में बड़ा सवाल है—क्या 5 मई को सोने-चांदी की कीमतों में रिकवरी होगी या गिरावट जारी रहेगी?
यह पूरा ट्रेंड केवल घरेलू मांग का परिणाम नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजार, जियो-पॉलिटिकल तनाव और डॉलर की चाल जैसे कई बड़े फैक्टर्स इसके पीछे काम कर रहे हैं।
भारत में आज का सोना: 24K, 22K और 18K रेट
सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख कैटेगरी के रेट इस प्रकार रहे:
- 24 कैरेट सोना: ₹14,962 प्रति ग्राम (₹1,49,620 प्रति 10 ग्राम)
- 22 कैरेट सोना: ₹13,715 प्रति ग्राम (₹1,37,150 प्रति 10 ग्राम)
- 18 कैरेट सोना: लगभग ₹11,200–₹11,300 प्रति ग्राम के आसपास
यह गिरावट उस समय आई है जब पिछले कुछ महीनों में सोने ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया था और सालाना आधार पर अभी भी कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
चांदी का हाल: स्थिर लेकिन दबाव में
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी स्थिरता के साथ हल्का दबाव देखने को मिला।
- चांदी (1 किलोग्राम): ₹2,64,900
- चांदी (100 ग्राम): ₹26,490
- चांदी (10 ग्राम): ₹2,649
फरवरी और मार्च के दौरान चांदी में काफी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, लेकिन फिलहाल बाजार थोड़ा स्थिर नजर आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
सोने की कीमतों को समझने के लिए केवल भारत के आंकड़े देखना काफी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बड़ा मूवमेंट हुआ है। 5 मई 2026 को वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत करीब 4,500 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास बनी रही। पिछले सत्र में लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन उसके बाद हल्की रिकवरी देखने को मिली। दिलचस्प बात यह है कि:
- पिछले 1 महीने में सोना करीब 2.4% गिरा है
- लेकिन सालाना आधार पर यह अभी भी 33% से ज्यादा ऊपर है
इससे साफ है कि लॉन्ग-टर्म ट्रेंड अभी भी मजबूत है, भले ही शॉर्ट-टर्म में कमजोरी दिख रही हो।
गिरावट की असली वजह क्या है?
सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। हालांकि युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है, लेकिन संभावित सीजफायर की खबरों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। ऐसे में निवेशक सुरक्षित निवेश (safe haven) से थोड़ा पीछे हट रहे हैं। इसके अलावा:
- डॉलर मजबूत होने से सोना दबाव में आता है
- ऊर्जा (क्रूड ऑयल) की कीमतें बढ़ने से महंगाई का डर बढ़ता है
- सेंट्रल बैंक की नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है
इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार को “range-bound” बना दिया है।
5 मई का आउटलुक: क्या आज बढ़ेगा सोना?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज यानी 5 मई को सोने की कीमतों में बहुत बड़ा मूवमेंट देखने को नहीं मिलेगा। बाजार फिलहाल एक सीमित दायरे (range) में रह सकता है। हालांकि कुछ प्रमुख संकेत ऐसे हैं जो दिशा तय करेंगे:
- अगर जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ता है → सोना चढ़ सकता है
- अगर डॉलर और मजबूत होता है → सोना दबाव में रहेगा
- अगर निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ती है → कीमतों में उछाल संभव
एक रिसर्च एनालिस्ट के अनुसार, “फिलहाल बाजार में मिश्रित संकेत हैं और शॉर्ट टर्म में सोना एक सीमित दायरे में ही ट्रेड कर सकता है।”
क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। इसका जवाब पूरी तरह आपके निवेश लक्ष्य पर निर्भर करता है। अगर आप:
- लॉन्ग टर्म निवेशक हैं → गिरावट खरीदने का मौका हो सकती है
- शॉर्ट टर्म ट्रेडर हैं → अभी बाजार में स्पष्ट ट्रेंड नहीं है
- ज्वेलरी खरीदना चाहते हैं → यह कीमतें पहले से थोड़ी राहत दे रही हैं
ध्यान देने वाली बात यह है कि सोना अभी भी अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर के करीब है, इसलिए बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल कम है।
आने वाले दिनों में क्या तय करेगा ट्रेंड?
आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा पूरी तरह कुछ प्रमुख वैश्विक और आर्थिक कारकों पर निर्भर रहने वाली है। सबसे अहम भूमिका जियो-पॉलिटिकल हालात की होगी, खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, जो निवेशकों के रुझान को तेजी से बदल सकता है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर नीति भी बाजार पर सीधा असर डालती है, क्योंकि दरों में बदलाव से निवेश का फ्लो प्रभावित होता है। डॉलर और भारतीय रुपये के बीच विनिमय दर भी कीमतों को ऊपर-नीचे करती है, जबकि दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी लंबी अवधि के ट्रेंड को मजबूती या कमजोरी दे सकती है। इन सभी फैक्टर्स में से किसी एक में भी अचानक बदलाव आता है, तो सोने और चांदी की कीमतों में तेज और अप्रत्याशित मूवमेंट देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष: गिरावट के बाद संतुलन की स्थिति
सोने का ₹1.5 लाख से नीचे आना एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर है, लेकिन इसे बड़ी गिरावट का संकेत नहीं माना जा सकता। फिलहाल बाजार “करेक्शन + कंसोलिडेशन” फेज में है। चांदी भी इसी ट्रेंड को फॉलो कर रही है, जहां बड़ी गिरावट नहीं है लेकिन तेजी भी सीमित है। आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे—यही तय करेंगे कि सोना फिर से तेजी पकड़ेगा या कुछ समय तक इसी दायरे में रहेगा।
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