केंद्र सरकार ने सभी कर्मचारियों के लिए हर साल competency-based training अनिवार्य की। iGOT पोर्टल पर कोर्स पूरा करना होगा, APAR से जुड़ा मूल्यांकन।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिसके तहत अब सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को हर साल अपनी भूमिका से जुड़े competency-based courses पूरे करना अनिवार्य होगा। यह जानकारी राज्यसभा में दी गई, जहां सरकार ने स्पष्ट किया कि इन कोर्सेज का प्रदर्शन कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (APAR) में भी जोड़ा जाएगा।
यह कदम सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रशासन को अधिक सक्षम, आधुनिक और परिणाम-केंद्रित बनाना है।
क्या है नया नियम और किस पर लागू होगा
केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि यह नियम सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के अधिकारियों पर लागू होगा।
सरकार के अनुसार, हर कर्मचारी को अपनी भूमिका और स्तर के अनुसार तय किए गए कोर्सेज पूरे करने होंगे। इन कोर्सेज का मूल्यांकन भी किया जाएगा और उसका प्रभाव सीधे उनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट में दिखेगा।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि कर्मचारी केवल काम ही नहीं करें, बल्कि लगातार सीखते भी रहें और अपने कौशल को बेहतर बनाते रहें।
iGOT पोर्टल क्या है और इसकी भूमिका
इन सभी ट्रेनिंग कोर्सेज को पूरा करने के लिए सरकार ने iGOT Karmayogi Platform (Integrated Government Online Training Platform) को मुख्य माध्यम बनाया है।
यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अनुसार कोर्सेज उपलब्ध कराए जाते हैं। कर्मचारी अपनी भूमिका के अनुसार कोर्स चुन सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं।
सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रेनिंग को ज्यादा सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है।
APAR से जुड़ने का क्या मतलब है
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन कोर्सेज का परिणाम अब सीधे Annual Performance Appraisal Reports (APARs) में शामिल किया जाएगा।
इसका मतलब है कि:
- अगर कर्मचारी कोर्स अच्छे से पूरा करते हैं, तो उनकी परफॉर्मेंस रेटिंग बेहतर होगी
- अगर वे कोर्स पूरा नहीं करते, तो इसका नकारात्मक असर उनके मूल्यांकन पर पड़ सकता है
यह कदम कर्मचारियों को सीखने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।
Competency-Based Training क्यों जरूरी है
सरकार ने competency-based capacity building मॉडल को अपनाया है, जिसका फोकस तीन मुख्य चीजों पर है:
- Role-based learning (भूमिका के अनुसार प्रशिक्षण)
- Continuous skill development (लगातार कौशल विकास)
- Alignment with job requirements (काम की जरूरतों के अनुसार ट्रेनिंग)
इस मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर कर्मचारी अपने काम के लिए जरूरी कौशल से लैस हो और बदलते समय के साथ खुद को अपडेट करता रहे।
FRAC Framework क्या है
सरकार ने एक खास फ्रेमवर्क भी तैयार किया है, जिसे FRAC (Framework of Roles, Activities and Competencies) कहा जाता है।
इसका उद्देश्य है:
- हर सरकारी पद के लिए स्पष्ट भूमिका तय करना
- उस भूमिका के लिए जरूरी कौशल और क्षमताएं निर्धारित करना
- कर्मचारियों को उसी आधार पर ट्रेनिंग देना
इसमें तीन प्रकार की competencies शामिल होती हैं:
- Behavioral (व्यवहारिक)
- Functional (कार्यात्मक)
- Domain (विशेषज्ञता आधारित)
यह फ्रेमवर्क सरकारी सिस्टम को अधिक structured और professional बनाने में मदद करेगा।
Mission Karmayogi से जुड़ा बड़ा बदलाव
यह पूरी पहल Mission Karmayogi का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सिविल सर्विसेज को modern, efficient और citizen-centric बनाना है।
Mission Karmayogi के तहत सरकार कर्मचारियों को केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि problem solver और innovation-driven professional बनाना चाहती है।
यह बदलाव पारंपरिक प्रशासनिक मॉडल से हटकर एक नए, dynamic और flexible सिस्टम की ओर इशारा करता है।
कंसल्टेंट्स की नियुक्ति पर सरकार का जवाब
एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि कंसल्टेंट्स की नियुक्ति का डेटा अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों द्वारा ही रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि General Financial Rules 2017 (GFR 2017) के तहत कंसल्टेंट्स और बाहरी पेशेवरों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।
यह नियम वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा संचालित होते हैं और सभी मंत्रालयों को इन्हीं के अनुसार काम करना होता है।
इस फैसले का कर्मचारियों पर क्या असर होगा
इस नए नियम का असर सरकारी कर्मचारियों पर कई स्तरों पर पड़ेगा:
पहला, उन्हें हर साल नए कौशल सीखने होंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी।
दूसरा, उनकी परफॉर्मेंस अब केवल अनुभव या वरिष्ठता पर नहीं, बल्कि कौशल और सीखने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी।
तीसरा, यह सिस्टम सरकारी कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी कर्मचारियों में continuous learning culture विकसित होगा, जो लंबे समय में प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाएगा।
क्या हैं संभावित चुनौतियां
हालांकि यह पहल सकारात्मक मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं:
- सभी कर्मचारियों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग आसान नहीं होगा
- ग्रामीण या दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या
- कुछ कर्मचारियों में बदलाव के प्रति प्रतिरोध
सरकार को इन चुनौतियों से निपटने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे ताकि यह पहल सफल हो सके।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। competency-based training को अनिवार्य बनाकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल अनुभव नहीं, बल्कि कौशल और सीखने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
अगर यह पहल सही तरीके से लागू होती है, तो इससे न केवल सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
यह बदलाव भारत के प्रशासनिक तंत्र को अधिक आधुनिक, जवाबदेह और परिणाम-केंद्रित बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
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