Akasa Air Plan: भारतीय एविएशन सेक्टर में तेजी से विस्तार कर रही अकासा एयर ने अगले दो से तीन वर्षों के लिए अपनी विस्तार योजना का संकेत दिया है। कंपनी की योजना हर साल अपने बेड़े में 12 से अधिक नए विमान शामिल करने की है। इसके साथ ही एयरलाइन 500 से ज्यादा नए पायलटों की भर्ती भी करेगी। विमानों की डिलीवरी बढ़ने के साथ कंपनी का फोकस घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी बढ़ने वाला है।
नई दिल्ली: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक रहे राकेश झुनझुनवाला की पहल से शुरू हुई अकासा एयर अब अपने अगले चरण के विस्तार की तैयारी कर रही है। एयरलाइन के सीईओ विनय दुबे के मुताबिक, अगले दो से तीन वर्षों में कंपनी अपने बेड़े और पायलट टीम दोनों का विस्तार करेगी। कंपनी की यह योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब विमान निर्माता बोइंग की उत्पादन और डिलीवरी व्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।
बोइंग की डिलीवरी सुधरने से अकासा को राहत
अकासा एयर के विस्तार में सबसे बड़ी भूमिका विमानों की उपलब्धता की है। पिछले कुछ समय से बोइंग की ओर से विमानों की डिलीवरी में देरी का असर एयरलाइन की विस्तार योजनाओं पर पड़ा था। इसी वजह से कंपनी ने 2024 में नए पायलटों की भर्ती पर भी रोक लगा दी थी।
अब बोइंग का उत्पादन स्थिर होने और डिलीवरी में सुधार आने की उम्मीद से अकासा एयर को अपने बेड़े को तेजी से बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। कंपनी ने डिलीवरी में व्यवधान के बावजूद अपने प्रशिक्षित पायलटों को बनाए रखा। हालांकि, लंबे समय तक बिना नए विमानों के पायलटों को बनाए रखना एयरलाइन के लिए महंगा साबित हो सकता है, लेकिन अब विमानों की संख्या बढ़ने के साथ इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
500 से ज्यादा नए पायलट होंगे भर्ती
अकासा एयर के सीईओ विनय दुबे ने बताया कि एयरलाइन ने करीब एक साल पहले पायलटों की भर्ती दोबारा शुरू कर दी थी। कंपनी अब अपने कैडेट प्रोग्राम के जरिए नए पायलट तैयार कर रही है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर कमर्शियल पायलट लाइसेंस यानी CPL रखने वाले अनुभवी पायलटों को भी सीधे भर्ती किया जा रहा है।
कंपनी के पास फिलहाल 800 से अधिक पायलट हैं। अगले दो से तीन वर्षों में कैडेट प्रोग्राम और ओपन मार्केट से भर्ती के जरिए 500 से ज्यादा नए पायलट जोड़े जाने की योजना है। इससे एयरलाइन को नए विमानों के संचालन के लिए पर्याप्त क्रू उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
पायलटों की संख्या में यह बढ़ोतरी केवल बेड़े के विस्तार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर लंबे समय की उड़ानों के लिए अधिक क्रू की जरूरत होती है, इसलिए अकासा एयर पहले से ही इस दिशा में तैयारी कर रही है।
अगस्त के अंत तक बेड़े में जुड़ सकते हैं 12 नए विमान
अकासा एयर के बेड़े में इस समय 40 बोइंग 737 MAX विमान शामिल हैं। कंपनी को इस कैलेंडर ईयर में अब तक विमानों की डिलीवरी को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन आने वाले समय में स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
कंपनी के मुताबिक, अगस्त के अंत तक करीब एक दर्जन नए विमान बेड़े में शामिल हो सकते हैं। अकेले इस महीने तीन नए विमानों के जुड़ने की संभावना बताई गई है। यदि डिलीवरी योजना के अनुसार होती है, तो एयरलाइन की कुल परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
यह विस्तार अकासा एयर के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी अपेक्षाकृत कम समय में भारतीय एविएशन मार्केट में अपनी मजबूत जगह बनाने की कोशिश कर रही है।
हर साल 12 से ज्यादा नए विमान जोड़ने की योजना
अकासा एयर की योजना अगले तीन वर्षों तक हर साल 12 से अधिक नए विमान अपने बेड़े में शामिल करने की है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में एयरलाइन के बेड़े का आकार मौजूदा स्तर की तुलना में काफी बढ़ सकता है।
विमानों की डिलीवरी में सुधार कंपनी को नए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट शुरू करने का मौका देगा। अकासा एयर का लक्ष्य सिर्फ विमानों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि उनका बेहतर इस्तेमाल करके नेटवर्क और कमाई दोनों को मजबूत करना है।
एयरलाइन का मानना है कि बोइंग की उत्पादन क्षमता स्थिर होने के साथ विमान डिलीवरी में तेजी आ सकती है। इससे अकासा को अपनी पहले से बनाई गई विस्तार योजनाओं को लागू करने में मदद मिलेगी।
इंटरनेशनल रूट्स पर बढ़ेगा फोकस
अकासा एयर आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के मुताबिक, अगले दो से तीन वर्षों में उसके कुल विमानों में करीब 40 फीसदी विमानों को अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर तैनात करने की योजना है।
इस समय कंपनी का बड़ा फोकस घरेलू बाजार पर है, लेकिन बेड़े में लगातार नए विमान शामिल होने के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का हिस्सा बढ़ाया जाएगा। कंपनी का अनुमान है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर विमानों की तैनाती का अनुपात लगभग 60:40 हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय विस्तार से अकासा एयर को नए यात्रियों और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का मौका मिलेगा। साथ ही, लंबी दूरी वाले अंतरराष्ट्रीय रूट्स कंपनी के लिए राजस्व बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।
कंपनी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह विस्तार?
अकासा एयर की विस्तार योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब भारतीय एविएशन मार्केट में यात्रियों की संख्या और हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नए विमानों और पायलटों की उपलब्धता एयरलाइन को अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
विमानों की संख्या बढ़ने से कंपनी ज्यादा शहरों को जोड़ सकती है और मौजूदा रूट्स पर उड़ानों की संख्या भी बढ़ा सकती है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार से कंपनी को भारतीय यात्रियों के साथ-साथ विदेशी बाजारों से आने वाले यात्रियों को भी जोड़ने का अवसर मिलेगा।
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस विस्तार को लागत और संचालन क्षमता के बीच संतुलित रखना होगी। नए विमान, पायलट, क्रू और अंतरराष्ट्रीय संचालन पर खर्च बढ़ेगा। ऐसे में विमान के बेहतर उपयोग और मजबूत यात्री मांग के जरिए इन लागतों को संभालना महत्वपूर्ण होगा।
RASK में सुधार की उम्मीद
अकासा एयर के लिए अंतरराष्ट्रीय रूट्स का विस्तार सिर्फ नेटवर्क बढ़ाने की रणनीति नहीं है। कंपनी को उम्मीद है कि इससे उपलब्ध सीट किलोमीटर से जुड़ी आय यानी RASK में भी सुधार होगा।
जैसे-जैसे एयरलाइन के बेड़े का आकार बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का हिस्सा बढ़ेगा, कंपनी को अपनी सीट क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा। यदि यात्री मांग मजबूत बनी रहती है, तो इससे एयरलाइन की कमाई और परिचालन दक्षता में सुधार हो सकता है।
कुल मिलाकर, अकासा एयर के लिए अगले दो से तीन साल काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। बोइंग से विमानों की डिलीवरी में सुधार, हर साल 12 से ज्यादा नए विमानों को शामिल करना और 500 से अधिक पायलटों की भर्ती कंपनी के विस्तार की बड़ी आधारशिला बन सकते हैं। अब देखना होगा कि अकासा एयर अपनी इस योजना को कितनी तेजी से लागू करती है और घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय एविएशन मार्केट में अपनी हिस्सेदारी कितनी बढ़ा पाती है।


