नई दिल्ली: भारत और एशिया के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शामिल गौतम अडानी अब एल्युमीनियम सेक्टर में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अडानी समूह और अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) मिलकर 11.5 अरब डॉलर (करीब ₹10,94,18,53,25,000 या लगभग ₹94,000 करोड़) के निवेश से ओडिशा में एक विशाल इंटीग्रेटेड एल्युमीनियम प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। यह प्रोजेक्ट भारत के मेटल्स और मिनरल्स सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में शामिल हो सकता है।
अगर यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो देश की एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता में करीब 50% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही, इस सेक्टर की दिग्गज कंपनियों हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और वेदांता एल्युमीनियम को भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
ओडिशा में बनेगा 20 लाख टन से अधिक क्षमता वाला प्लांट
रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह और IHC ओडिशा में 2 मिलियन टन (20 लाख टन) से अधिक वार्षिक क्षमता वाला एल्युमीनियम स्मेल्टर स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। इस परियोजना में स्मेल्टर के साथ-साथ रिफाइनरी और कैप्टिव पावर प्लांट भी शामिल होगा, जिससे उत्पादन लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
बताया जा रहा है कि इस परियोजना के लिए निवेश कर्ज और इक्विटी दोनों माध्यमों से किया जाएगा।
धामरा पोर्ट देगा लॉजिस्टिक सपोर्ट
इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए लॉजिस्टिक्स की दृष्टि से ओडिशा स्थित धामरा पोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह बंदरगाह अडानी समूह के स्वामित्व में है और कच्चे माल की आपूर्ति तथा तैयार उत्पाद के निर्यात के लिए बड़ी सुविधा प्रदान करेगा।
कॉपर के बाद अब एल्युमीनियम पर फोकस
अडानी समूह ने पिछले वर्ष गुजरात में अपना कॉपर स्मेल्टर शुरू किया था। अब एल्युमीनियम क्षेत्र में प्रवेश कंपनी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग कारोबार के लिए कच्चे माल की आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है।
एल्युमीनियम की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने का अनुमान है, इसलिए इस क्षेत्र में समय रहते निवेश करना समूह के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
भारत में क्यों बढ़ रही है एल्युमीनियम की मांग?
भारत वर्तमान में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक है। पिछले वर्ष देश में लगभग 4.2 मिलियन टन एल्युमीनियम का उत्पादन हुआ, जबकि घरेलू खपत 5.5 मिलियन टन रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में एल्युमीनियम की खपत अभी भी वैश्विक औसत से काफी कम है।
भारत में एल्युमीनियम खपत
- प्रति व्यक्ति खपत: 3.4 से 3.9 किलोग्राम
- वैश्विक औसत: 8 से 12 किलोग्राम
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एल्युमीनियम उपभोक्ता
यही कारण है कि आने वाले वर्षों में इस धातु की मांग तेज़ी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
2047 तक कई गुना बढ़ सकती है मांग
अनुमानों के मुताबिक भारत में एल्युमीनियम की मांग लगातार बढ़ेगी।
- 2030 तक: 8.5 मिलियन टन
- 2040 तक: 18 मिलियन टन
- 2047 तक: 28 मिलियन टन से अधिक
सरकार का लक्ष्य 2047 तक देश की एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता को करीब 37 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने का है।
ओडिशा क्यों बना पहली पसंद?
ओडिशा इस परियोजना के लिए सबसे उपयुक्त राज्यों में माना जा रहा है क्योंकि—
- देश के लगभग 60% बॉक्साइट भंडार ओडिशा में हैं।
- बंदरगाह और रेल नेटवर्क की अच्छी सुविधा उपलब्ध है।
- धामरा पोर्ट के जरिए निर्यात आसान होगा।
- बिजली और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है।
इन सभी कारणों से परियोजना की लागत और संचालन दोनों में लाभ मिलने की संभावना है।
वेदांता और हिंडाल्को के सामने बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
फिलहाल भारत के एल्युमीनियम बाजार में वेदांता एल्युमीनियम और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज का दबदबा है। दोनों कंपनियां भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में जुटी हैं।
अगर अडानी समूह का यह प्लांट शुरू होता है तो—
- घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
- आयात पर निर्भरता और कम हो सकती है।
- निर्यात के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
सरकार भी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर दे रही जोर
केंद्र सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की नीति पर लगातार काम कर रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन, रेलवे, एयरोस्पेस और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में एल्युमीनियम की मांग तेजी से बढ़ रही है।
इसी वजह से देश की बड़ी कंपनियां भविष्य की मांग को देखते हुए नई उत्पादन क्षमता विकसित कर रही हैं।
अन्य कंपनियां भी कर रही हैं निवेश
केवल अडानी समूह ही नहीं, बल्कि वैश्विक माइनिंग कंपनी रियो टिंटो भी AMG मेटल्स एंड मैटीरियल्स के साथ मिलकर भारत में क्लीन एनर्जी आधारित इंटीग्रेटेड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इस परियोजना को ग्रीनको ग्रुप के संस्थापकों का भी समर्थन प्राप्त है।
इससे साफ है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक एल्युमीनियम उद्योग का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
क्या रहेगा सबसे बड़ा असर?
यदि अडानी समूह और IHC की यह परियोजना साकार होती है, तो इससे भारत की एल्युमीनियम इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे, विदेशी निवेश आकर्षित होगा और देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। हालांकि, इससे मौजूदा दिग्गज कंपनियों वेदांता और हिंडाल्को के सामने प्रतिस्पर्धा भी पहले से कहीं अधिक कड़ी हो जाएगी।


