नई दिल्ली: गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से बड़ी सकारात्मक खबर आई है। दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक धातु एक्सचेंज लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) ने Adani Copper ब्रांड को अपने कॉपर कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत डिलीवरी के लिए आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अडानी कॉपर की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ेगी और कंपनी को अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों व वित्तीय संस्थानों के बीच मजबूत पहचान मिलेगी।
एलएमई की मंजूरी को भारतीय कॉपर उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश में निर्मित कॉपर की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
10 जुलाई से जारी होंगे Adani Copper के वारंट
लंदन मेटल एक्सचेंज द्वारा जारी बयान के अनुसार, 10 जुलाई से Adani Copper ब्रांड के लिए वारंट (Warrants) जारी किए जा सकेंगे। इसके साथ ही एलएमई से पंजीकृत सभी गोदामों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने ऑफ-वारंट स्टॉक रिपोर्ट में अडानी कॉपर को तत्काल प्रभाव से शामिल करें।
गौरतलब है कि कच्छ कॉपर लिमिटेड ने अगस्त 2025 में एलएमई रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
कच्छ कॉपर लिमिटेड कर रही है उत्पादन
Adani Copper का निर्माण अडानी एंटरप्राइजेज की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड (Kutch Copper Limited) द्वारा किया जा रहा है।
कंपनी का अत्याधुनिक कॉपर स्मेल्टर प्लांट गुजरात के मुंद्रा (कच्छ) में स्थित है। लगभग 1.2 अरब डॉलर (करीब 11,000 करोड़ रुपये) की लागत से तैयार यह परियोजना दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन कॉपर स्मेल्टर प्लांट मानी जाती है।
इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 5 लाख मीट्रिक टन रिफाइंड कॉपर है, जिससे भारत के कॉपर उत्पादन में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
भारत की आयात निर्भरता होगी कम
देश में कॉपर उत्पादन बढ़ने से भारत की रिफाइंड कॉपर आयात पर निर्भरता लगातार कम हो सकती है।
उपलब्ध ट्रेड आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने लगभग 2,38,080 टन रिफाइंड कॉपर का आयात किया। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 18 प्रतिशत कम रहा, जो घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी का संकेत देता है।
फिलहाल जापान भारत को रिफाइंड कॉपर की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश है, लेकिन कच्छ कॉपर की पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू होने के बाद आयात में और गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है।
LME की मंजूरी क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) औद्योगिक धातुओं के कारोबार का सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक प्लेटफॉर्म माना जाता है। किसी भी कॉपर ब्रांड को LME की मान्यता मिलने का मतलब है कि उसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार कर लिया गया है।
इस मंजूरी के बाद:
- Adani Copper की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ेगी।
- अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ कारोबार आसान होगा।
- एलएमई-लिस्टेड ब्रांड होने के कारण ट्रेडिंग और सप्लाई में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- विदेशी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कम लागत पर फाइनेंस जुटाने में सुविधा मिलेगी।
- निर्यात के नए अवसर खुलेंगे और भारतीय कॉपर उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा फायदा
तांबा (Copper) बिजली, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), अक्षय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण धातु है। ऐसे समय में जब भारत तेजी से विनिर्माण और हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है, घरेलू स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले कॉपर का उत्पादन रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि LME की यह मंजूरी न केवल Adani Copper बल्कि पूरे भारतीय धातु उद्योग की वैश्विक साख को मजबूत करेगी।
निष्कर्ष
Adani Copper को LME की मंजूरी मिलना अडानी ग्रुप के लिए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि है। इससे कंपनी की वैश्विक बाजार में मौजूदगी मजबूत होगी, निर्यात के अवसर बढ़ेंगे और भारत को कॉपर आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। आने वाले वर्षों में कच्छ कॉपर प्लांट के पूर्ण क्षमता से संचालन के साथ भारत वैश्विक कॉपर बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है।


