Ram Mandir Chori News: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच में बड़ा अपडेट सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को मामले में क्लीन चिट दे दी है। SIT ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दी है।
यह मामला जून 2026 में उस समय सामने आया था, जब अयोध्या के राम मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे की रकम की गिनती में कथित तौर पर गड़बड़ी के आरोप लगे थे। शुरुआती जांच के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। SIT की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर आठ नामजद लोगों और कुछ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।
चंपत राय और अनिल मिश्रा को राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SIT की अंतिम जांच में चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ कथित दान घोटाले या चोरी में सीधे तौर पर शामिल होने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसी आधार पर दोनों को मामले में क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई है।
चंपत राय उस समय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव थे। दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर उनका नाम भी चर्चा में आया था। हालांकि, पूछताछ के दौरान उन्होंने किसी भी तरह की गलत गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राय ने जांचकर्ताओं को बताया कि कथित अनियमितता की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कार्रवाई की और संबंधित शिकायत भी दर्ज कराई थी। उनका पक्ष था कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना ट्रस्ट की जिम्मेदारी है और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी मिलने पर कार्रवाई की गई।
क्या है राम मंदिर चढ़ावा चोरी का पूरा मामला?
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्तों की ओर से मंदिर में दान और चढ़ावा भी दिया जाता है। जून 2026 की शुरुआत में इसी दान की गिनती और उससे जुड़ी व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए।
मामला सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से जांच की मांग की गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT गठित की।
SIT ने शुरुआती जांच के दौरान दान और चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड, संबंधित लोगों और पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की। इसके बाद 23 जून को राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई। इस रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सिफारिशें की गई थीं।
25 जून को दर्ज हुई थी FIR
SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज की गई। यह FIR 25 जून को आठ नामजद आरोपियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी।
FIR में जिन लोगों को नामजद किया गया, उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टीनू के नाम शामिल हैं।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। शुरुआती रिपोर्ट के बाद पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की थी।
SIT ने किन पहलुओं की जांच की?
SIT की जांच का मुख्य फोकस मंदिर में मिलने वाले दान और चढ़ावे की गिनती तथा उससे जुड़ी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर था। जांच टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की कि दान की रकम की गिनती और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया किस तरह संचालित होती थी और इसमें किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
जांच के दौरान संबंधित लोगों से पूछताछ की गई और उपलब्ध दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। शुरुआती जांच में कथित गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद ही FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।
हालांकि, SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा की कथित भूमिका को लेकर राहत मिलने की बात सामने आई है। इसका मतलब यह है कि उपलब्ध जांच के आधार पर दोनों के खिलाफ मामले में आगे कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया गया।
चंपत राय ने क्या कहा था?
पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कथित अनियमितताओं में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने SIT को बताया कि वह खुद शिकायत दर्ज कराने और संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया में शामिल थे।
राय के अनुसार, मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। उनका पक्ष था कि जैसे ही कथित गड़बड़ी की जानकारी सामने आई, मामले को गंभीरता से लिया गया और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
यही पहलू जांच के दौरान उनके पक्ष में महत्वपूर्ण माना गया। हालांकि, SIT की अंतिम रिपोर्ट के विस्तृत निष्कर्षों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
तीन सदस्यीय SIT ने की थी जांच
राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था।
इस SIT की अध्यक्षता लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने की। इसके अन्य सदस्यों में रेंज इंस्पेक्टर जनरल किरण एस और स्पेशल सेक्रेटरी (वित्त) नील रतन कुमार शामिल थे।
टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और आरोपों की जांच की। 23 जून को राज्य सरकार को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और 25 जून को FIR दर्ज हुई।
अब जांच के अंतिम चरण में SIT ने अपनी फाइनल रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है।
आठ आरोपियों पर क्या होगा?
SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को राहत मिलने की खबर सामने आने के बावजूद FIR में नामजद अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का सवाल अभी महत्वपूर्ण है।
शुरुआती जांच के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसलिए आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि SIT की अंतिम रिपोर्ट में प्रत्येक आरोपी की भूमिका को लेकर क्या निष्कर्ष निकाले गए हैं और संबंधित जांच एजेंसियां किस आधार पर आगे बढ़ती हैं।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी जांच में आरोपी बनाए जाने का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं होता। अंतिम कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली कार्रवाई और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होती है।
सुप्रीम कोर्ट से पहले सरकार ने बनाई थी SIT
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर हस्तक्षेप होने से पहले ही राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन कर दिया था। यानी राज्य सरकार ने शुरुआती आरोप सामने आने के बाद मामले की जांच के लिए विशेष टीम बनाई थी।
SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद FIR दर्ज हुई और अब अंतिम रिपोर्ट भी सौंप दी गई है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रस्ट और संबंधित जांच एजेंसियां अंतिम रिपोर्ट के आधार पर क्या कदम उठाती हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में अब आगे क्या?
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा अपडेट SIT की अंतिम रिपोर्ट है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिल गई है। वहीं, FIR में नामजद अन्य आरोपियों को लेकर आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।
राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे की बड़ी मात्रा को देखते हुए दान की गिनती और रिकॉर्डिंग में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि इस मामले की जांच पर शुरुआत से ही नजर बनी हुई है।
नोट: चंपत राय और अनिल मिश्रा को SIT की ओर से क्लीन चिट मिलने की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। मामले में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित जांच एजेंसी, ट्रस्ट और अदालत में होने वाली आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगी।


