PFC Dividend: पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। जून तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 2.1 फीसदी बढ़ा है। हालांकि, नेट इंटरेस्ट इनकम में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है। महारत्न कंपनी के इस फैसले से निवेशकों का ध्यान एक बार फिर इस डिविडेंड देने वाले सरकारी शेयर पर गया है।
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन यानी PFC पावर सेक्टर को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाली प्रमुख सरकारी कंपनियों में शामिल है। कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करने से जुड़ा है। कंपनी के जून तिमाही के आंकड़ों के साथ-साथ डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट और शेयर के प्रदर्शन पर भी निवेशकों की नजर है।
जून तिमाही में 2.1 फीसदी बढ़ा PFC का मुनाफा
Power Finance Corporation का जून तिमाही में कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 2.1 फीसदी बढ़कर 7,012 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 6,866 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था।
इस तरह कंपनी के मुनाफे में करीब 146 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, मुनाफे में वृद्धि बहुत तेज नहीं रही। यही वजह है कि तिमाही नतीजों को पूरी तरह मजबूत प्रदर्शन के बजाय मिश्रित प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
PFC को भारत सरकार की महारत्न कंपनियों में शामिल किया गया है। कंपनी देश में बिजली क्षेत्र के लिए फाइनेंस उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
NII में आई 3.3 फीसदी गिरावट
जून तिमाही में PFC की नेट इंटरेस्ट इनकम यानी NII 3.3 फीसदी घटकर 10,696 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी की NII 11,061 करोड़ रुपये थी।
किसी बैंक या वित्तीय कंपनी के लिए NII एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है। आसान भाषा में समझें तो वित्तीय संस्थान जिस ब्याज दर पर पैसा जुटाते हैं और जिस ब्याज दर पर उसे लोन के रूप में देते हैं, उनके बीच का अंतर कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम को प्रभावित करता है।
इस लिहाज से PFC की NII में गिरावट कंपनी के कोर ब्याज कारोबार पर दबाव का संकेत देती है। हालांकि, दूसरी ओर कंपनी के लोन पोर्टफोलियो में लगातार विस्तार हुआ है और इसी वजह से निवेशकों के लिए कंपनी की ग्रोथ स्टोरी अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
11.6 लाख करोड़ रुपये की हुई लोन बुक
PFC का कंसॉलिडेटेड लोन एसेट पोर्टफोलियो जून 2026 के अंत तक बढ़कर करीब 11.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह आंकड़ा बताता है कि कंपनी देश के पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े पैमाने पर फाइनेंस उपलब्ध करा रही है।
लोन बुक में बढ़ोतरी कंपनी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भविष्य में ब्याज आय और कारोबार के विस्तार की संभावनाएं बनती हैं। हालांकि, लोन बुक बढ़ने के साथ एसेट क्वालिटी, फंडिंग कॉस्ट और ब्याज मार्जिन जैसे पहलू भी निवेशकों के लिए अहम बने रहते हैं।
PFC लंबे समय से बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को फाइनेंस करती रही है और भारत में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ कंपनी के लिए कारोबार के अवसर भी बढ़ते हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी में भी मजबूत पकड़
कंपनी ने रिन्यूएबल एनर्जी यानी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की फाइनेंसिंग में भी अपनी स्थिति मजबूत की है। जून के अंत तक PFC की रिन्यूएबल एनर्जी लोन बुक करीब 1.63 लाख करोड़ रुपये हो गई।
भारत में सोलर, विंड और अन्य क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इन परियोजनाओं के लिए फाइनेंस उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए लंबे समय में बड़ा अवसर बन सकता है।
PFC की बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी लोन बुक इस बात का संकेत देती है कि कंपनी पारंपरिक पावर सेक्टर के साथ-साथ ऊर्जा के नए क्षेत्रों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही है।
शेयरधारकों को मिलेगा 3.90 रुपये का अंतरिम डिविडेंड
तिमाही नतीजों के साथ PFC ने शेयरधारकों के लिए अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है। कंपनी ने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 3.90 रुपये के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है।
कंपनी ने इसके लिए 27 अगस्त 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। रिकॉर्ड डेट का मतलब है कि उस तारीख को कंपनी के रिकॉर्ड में पात्र शेयरधारकों के नाम होने पर वे घोषित डिविडेंड के हकदार होंगे।
डिविडेंड निवेशकों के लिए अतिरिक्त आय का एक जरिया होता है। खासतौर पर सरकारी कंपनियों में नियमित डिविडेंड की वजह से इन शेयरों पर इनकम चाहने वाले निवेशकों की भी नजर रहती है।
इस साल 15 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है PFC शेयर
PFC का शेयर 7 अगस्त 2026 को 0.24 फीसदी की तेजी के साथ 419 रुपये पर बंद हुआ। शेयर ने इस साल अब तक 15 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि इसी अवधि में प्रमुख बाजार सूचकांकों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान निफ्टी में करीब 6.03 फीसदी की गिरावट, जबकि सेंसेक्स में करीब 7.85 फीसदी की गिरावट रही।
इससे पता चलता है कि PFC के शेयर ने व्यापक बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, किसी शेयर के पिछले प्रदर्शन को भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं माना जा सकता।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
PFC के जून तिमाही के नतीजों में एक तरफ मुनाफे की मामूली वृद्धि और NII में गिरावट देखने को मिली है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी की लोन बुक और रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपोजर में मजबूती बनी हुई है। इसके साथ ही अंतरिम डिविडेंड की घोषणा शेयरधारकों के लिए सकारात्मक खबर है।
निवेशकों के लिए आगे कंपनी की ब्याज आय, फंडिंग कॉस्ट, लोन ग्रोथ, एसेट क्वालिटी और रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, डिविडेंड चाहने वाले निवेशकों के लिए 27 अगस्त की रिकॉर्ड डेट खास महत्व रखती है।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों, वैल्यूएशन और अपनी जोखिम क्षमता का स्वतंत्र रूप से आकलन करें।


