Sugar Price News: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए चीनी मिलों का पेराई सीजन सामान्य समय से पहले शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। चीनी उद्योग के प्रमुख संगठनों ने सरकार के साथ चर्चा के बाद गन्ने की पेराई करीब 10 से 15 दिन पहले शुरू करने का सुझाव दिया है। इसका मकसद त्योहारों से पहले बाजार में नई चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
HighLights
- खुदरा बाजार में पिछले एक महीने में चीनी की कीमतों में करीब 17% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
- चीनी मिलों का पेराई सीजन सामान्य समय से 10-15 दिन पहले शुरू करने का प्रस्ताव है।
- त्योहारी सीजन से पहले बाजार में नई चीनी की सप्लाई बढ़ाने की तैयारी है।
- समय से पहले पेराई शुरू करने पर मिलों को गन्ने की रिकवरी कम होने से नुकसान की आशंका है।
- चीनी उद्योग ने नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से मुआवजे और अतिरिक्त बिक्री कोटे की मांग की है।
चीनी की कीमतों पर क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?
चीनी भारत के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों में शामिल है। घरों में चाय-कॉफी से लेकर मिठाइयों और त्योहारों के पकवानों तक इसकी मांग बनी रहती है। ऐसे में कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ता है।
हाल के दिनों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक महीने में चीनी के खुदरा दाम में करीब 17 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। आने वाले समय में त्योहारी मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार और चीनी उद्योग के सामने बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की चुनौती है।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसलिए यदि इस दौरान सप्लाई मांग के मुकाबले कम रहती है, तो कीमतों पर और दबाव बन सकता है।
इसी स्थिति को देखते हुए चीनी उद्योग ने अब पेराई सीजन को पहले शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।
10-15 दिन पहले शुरू हो सकती है गन्ने की पेराई
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने सरकार के साथ चर्चा के बाद चीनी सीजन 2025-26 में गन्ने की पेराई सामान्य समय से पहले शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।
आमतौर पर देश की कई चीनी मिलों में गन्ने की पेराई का सीजन 1 अक्टूबर के आसपास शुरू होता है। हालांकि इस प्रस्ताव के तहत मौसम और गन्ने की उपलब्धता अनुकूल रहने पर कुछ मिलें 15 सितंबर के बाद ही पेराई शुरू कर सकती हैं।
इससे अक्टूबर और उसके बाद बाजार में उपलब्ध होने वाली नई चीनी की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
उद्योग का मानना है कि यदि नई चीनी समय से बाजार में पहुंचती है, तो त्योहारी सीजन के दौरान मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना आसान होगा।
समय से पहले क्रशिंग शुरू करने का क्या फायदा होगा?
चीनी मिलों के जल्दी शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि बाजार में नई चीनी की सप्लाई सामान्य समय से पहले शुरू हो जाएगी।
आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर के दौरान त्योहारी मांग बढ़ने लगती है। इस दौरान घरेलू खपत में तेजी आती है। अगर उसी समय नई चीनी की सप्लाई भी बढ़ती है, तो बाजार में उपलब्धता बेहतर रह सकती है।
सरकार और चीनी उद्योग का मानना है कि पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना कीमतों में तेज बढ़ोतरी को रोकने का एक अहम तरीका है।
हालांकि, जल्दी पेराई शुरू करने का फैसला पूरी तरह आसान नहीं है। इसका असर गन्ने की गुणवत्ता, चीनी रिकवरी और मिलों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि चीनी मिलों ने सरकार से कुछ राहत उपायों की मांग भी की है।
देश में चीनी की पर्याप्त सप्लाई, फिर क्यों बढ़ रही कीमत?
एक अहम सवाल यह है कि अगर देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, तो फिर बाजार में कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
सरकार की ओर से घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए चीनी के निर्यात पर भी नियंत्रण रखा गया है। इसका उद्देश्य घरेलू मांग को प्राथमिकता देना और सप्लाई चेन में किसी तरह की कमी को रोकना है।
इसके बावजूद चीनी के दाम बढ़े हैं। इसका एक कारण उत्पादन लागत और बाजार भाव के बीच का अंतर भी बताया जा रहा है।
चीनी उद्योग संगठनों के अनुसार, चालू सीजन में जून तक देशभर में एक्स-मिल चीनी का औसत भाव करीब ₹39.5 से ₹40 प्रति किलोग्राम रहा। उद्योग के मुताबिक यह भाव चीनी की उत्पादन लागत से भी कम था।
इसके बाद जुलाई के आखिरी हिस्से तक औसत बिक्री भाव बढ़कर करीब ₹40 से ₹40.5 प्रति किलोग्राम पहुंच गया। हालांकि, उद्योग के अनुसार यह भी लगभग ₹42 प्रति किलोग्राम की उत्पादन लागत से नीचे है।
इसका मतलब यह है कि मिलों को चीनी की बिक्री से पर्याप्त मार्जिन नहीं मिल पा रहा है, जबकि दूसरी तरफ उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमतें बढ़ रही हैं।
जल्दी पेराई से मिलों को क्या नुकसान हो सकता है?
समय से पहले गन्ने की पेराई शुरू करने का फायदा बाजार को मिल सकता है, लेकिन इसका आर्थिक बोझ चीनी मिलों पर पड़ सकता है।
चीनी उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर पेराई सामान्य समय से पहले शुरू होती है, तो गन्ने की उपज और चीनी की रिकवरी में कमी आ सकती है। इसका सीधा असर प्रति टन गन्ने से बनने वाली चीनी की मात्रा पर पड़ सकता है।
यानी मिलें जल्दी पेराई शुरू तो कर देंगी, लेकिन शुरुआती दौर में उन्हें उतनी चीनी नहीं मिल सकती जितनी सामान्य समय पर पेराई करने से मिलती है।
इस वजह से मिलों की लागत बढ़ सकती है और पहले से कम मार्जिन की स्थिति में उनका वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।
सरकार से मुआवजे की मांग
इसी वजह से ISMA और NFCSF ने सरकार से कुछ राहत उपायों की मांग की है।
केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा को भेजे गए संयुक्त पत्र में ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी और NFCSF के MD प्रकाश नाइकनवरे ने समय से पहले पेराई शुरू करने को राष्ट्रीय हित में उठाया जाने वाला कदम बताया।
हालांकि, दोनों संगठनों ने कहा कि जल्दी पेराई से चीनी रिकवरी में संभावित नुकसान की भरपाई के लिए मिलों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा उद्योग ने अक्टूबर में होने वाले चीनी उत्पादन के बराबर अतिरिक्त घरेलू चीनी बिक्री कोटा देने की मांग भी की है। इससे मिलों को अतिरिक्त उत्पादन को घरेलू बाजार में बेचने का अवसर मिल सकता है।
चीनी उद्योग ने घरेलू चीनी बिक्री पर लगने वाले केंद्र के हिस्से के CGST में छूट की मांग भी रखी है।
क्या आम लोगों को मिलेगी राहत?
अगर चीनी मिलें सितंबर के मध्य के बाद चरणबद्ध तरीके से पेराई शुरू करती हैं और नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है, तो त्योहारी सीजन के दौरान सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है।
इससे कीमतों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सिर्फ जल्दी पेराई शुरू करना ही कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। बाजार में चीनी का कुल उत्पादन, पुराना स्टॉक, घरेलू खपत, मिलों की बिक्री और सरकारी नीतियां भी कीमतों को प्रभावित करेंगी।
खासकर त्योहारों के दौरान मांग में अचानक तेजी आने पर सप्लाई को लगातार बनाए रखना जरूरी होगा।
त्योहारी सीजन से पहले क्या होगा असर?
भारत में त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। मिठाई की दुकानों, घरों और खाद्य उद्योग में चीनी की मांग बढ़ने से बाजार पर दबाव बन सकता है।
ऐसे में यदि नई चीनी की सप्लाई सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत से ही बाजार में आने लगे, तो कारोबारियों और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
सरकार के लिए भी यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी खाद्य महंगाई पर असर डाल सकती है। दूसरी तरफ मिलों के लिए जरूरी है कि उन्हें इतनी कीमत मिले जिससे उनकी उत्पादन लागत और गन्ने से जुड़े खर्च को कवर किया जा सके।
आगे क्या देखना होगा?
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर होगी कि सरकार चीनी उद्योग के इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेती है और किन क्षेत्रों में मिलों को समय से पहले पेराई शुरू करने की अनुमति दी जाती है।
इसके साथ ही मौसम की स्थिति, गन्ने की उपलब्धता और चीनी रिकवरी भी अहम भूमिका निभाएगी। यदि मौसम अनुकूल रहता है और शुरुआती पेराई से पर्याप्त मात्रा में चीनी बाजार में आती है, तो त्योहारी सीजन में सप्लाई को लेकर चिंता कम हो सकती है।
वहीं, अगर जल्दी पेराई के कारण रिकवरी में बड़ी गिरावट आती है और मिलों को पर्याप्त आर्थिक राहत नहीं मिलती, तो उद्योग पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच समय से पहले पेराई शुरू करने का प्रस्ताव सरकार और उद्योग के लिए एक संतुलन बनाने की कोशिश है। सरकार का लक्ष्य जहां उपभोक्ताओं को पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध कराना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है, वहीं मिलें चाहती हैं कि जल्दी पेराई से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई भी की जाए। आने वाले हफ्तों में सरकार के फैसले और बाजार में नई चीनी की आवक से साफ होगा कि इस कदम का कीमतों पर कितना असर पड़ता है।


