त्योहारी सीजन के बीच नेपाल में महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खाने-पीने की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। भारत से आयात होने वाले चावल की कीमतों में प्रति बोरी ₹400 तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पालक और सरसों के साग के दाम पांच गुना तक बढ़ गए हैं। अंडों की कीमतों में भी ₹30 प्रति क्रेट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Highlights
- नेपाल में चावल की कीमत ₹400 प्रति बोरी तक बढ़ी।
- पालक और सरसों के साग के दाम पांच गुना तक उछले।
- अंडों की कीमत ₹30 प्रति क्रेट बढ़ी।
- मानसून और आयात लागत बढ़ने से खाद्य महंगाई तेज।
नेपाल में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही महंगाई चरम पर पहुंच गई है। फल, सब्जियां, चावल, अंडे और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका सबसे अधिक असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
भारत से आने वाला चावल हुआ महंगा
नेपाली मीडिया द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन महीनों में भारत से आयात होने वाले चावल की खुदरा कीमतों में प्रति बोरी ₹400 तक की वृद्धि हुई है।
नेपाल चावल, तेल और दाल उत्पादक संघ के सदस्य विभोर अग्रवाल के मुताबिक, भारत में धान की कीमत 800 से 900 भारतीय रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ चुकी है। इसके साथ परिवहन, मिलिंग और सीमा शुल्क की लागत जुड़ने से नेपाल में चावल की खुदरा कीमतों पर सीधा असर पड़ा है।
उन्होंने बताया कि जीरा मासीनो चावल का एक बोरा, जो तीन महीने पहले करीब ₹2,100 में मिलता था, अब लगभग ₹2,500 में बिक रहा है।
भारतीय बाजार की चाल से तय हो रही नेपाल की कीमतें
नेपाल घरेलू जरूरत के अनुसार पर्याप्त धान का उत्पादन नहीं कर पाता, इसलिए उसे बड़े पैमाने पर भारत से चावल आयात करना पड़ता है। यही कारण है कि भारतीय बाजार में कीमतों में होने वाला कोई भी बदलाव नेपाल के खुदरा बाजार में तेजी से दिखाई देता है।
व्यापारियों के अनुसार अधिकांश चावल की किस्मों के थोक भाव में ₹300 से ₹400 प्रति बोरी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
सब्जियों के दाम ने बढ़ाई परेशानी
नेपाल के कालीमती फल एवं सब्जी बाजार विकास बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, लगातार मानसूनी बारिश के कारण खेती प्रभावित हुई है और बाजारों में सब्जियों की आपूर्ति घट गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
- सरसों का साग 1 जुलाई को ₹35 प्रति किलो था, जो 2 अगस्त तक बढ़कर ₹175 प्रति किलो हो गया।
- कई खुदरा बाजारों में इसकी कीमत ₹200 प्रति किलो से भी अधिक पहुंच गई।
- पालक की कीमत करीब पांच गुना बढ़कर ₹55 प्रति किलो से ₹275 प्रति किलो तक पहुंच गई।
अंडों की कीमतों में भी आया उछाल
कुछ समय पहले एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के डर से अंडों की कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन अब मांग बढ़ने और आपूर्ति सामान्य होने के बाद कीमतें फिर बढ़ने लगी हैं।
नई थोक कीमतें इस प्रकार हैं—
- बड़े अंडे: ₹500 से बढ़कर ₹530 प्रति क्रेट
- मध्यम अंडे: ₹470 से बढ़कर ₹500 प्रति क्रेट
- अतिरिक्त बड़े अंडे: ₹515 से बढ़कर ₹545 प्रति क्रेट
यानी सभी श्रेणियों में करीब ₹30 प्रति क्रेट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महंगाई के पीछे क्या हैं वजहें?
विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल में खाद्य महंगाई बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
- भारत में धान की कीमतों में वृद्धि।
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में इजाफा।
- मानसून के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होना।
- सब्जियों की आपूर्ति में कमी।
- आयात पर अत्यधिक निर्भरता।
इन सभी कारणों से आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।
आम लोगों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
त्योहारी सीजन में आमतौर पर खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में चावल, सब्जियां और अंडे जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी होने से नेपाल के उपभोक्ताओं का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। यदि आने वाले दिनों में आपूर्ति की स्थिति नहीं सुधरी और आयात लागत कम नहीं हुई, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।


