Reliance Power Q1 Result: अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस पावर लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में शुद्ध लाभ (Net Profit) और कुल आय (Total Income) दोनों में सालाना आधार पर अच्छी बढ़त दर्ज की है। हालांकि, कंपनी के सामने कर्ज, दिवाला प्रक्रिया और विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
Highlights
- Q1 में शुद्ध लाभ 45% बढ़कर ₹64.71 करोड़ (₹6,471 लाख) हुआ।
- कुल आय बढ़कर ₹2,103.75 करोड़ (₹2,10,375 लाख) पहुंची।
- सहायक कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने का आवेदन।
- ED, CBI और SEBI की जांच का सामना कर रही है कंपनी।
- 34.32 करोड़ वारंट रद्द, ₹302.62 करोड़ की राशि जब्त।
Q1 में 45% बढ़ा शुद्ध लाभ
रिलायंस पावर द्वारा स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) ₹6,471 लाख यानी करीब ₹64.71 करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹4,468 लाख था। इस तरह कंपनी ने सालाना आधार पर लगभग 45% की वृद्धि दर्ज की है।
आय में भी हुआ इजाफा
कंपनी की कुल आय (Total Income) भी इस तिमाही में बढ़ी है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान रिलायंस पावर की कुल आय ₹2,10,375 लाख (करीब ₹2,103.75 करोड़) रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह ₹2,02,531 लाख (करीब ₹2,025.31 करोड़) थी। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है।
कर्ज और दिवाला प्रक्रिया की चुनौती
सकारात्मक नतीजों के बावजूद कंपनी की वित्तीय चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। रिलायंस पावर की सहायक कंपनी सामलकोट पावर लिमिटेड (SMPL) के एक ऋणदाता ने ₹1,84,196 लाख की बकाया राशि की मांग करते हुए कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने के लिए आवेदन किया है।
कंपनी का कहना है कि वह इस मामले में उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और जरूरत पड़ने पर एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetization) के जरिए कर्ज कम करने की योजना पर काम कर रही है।
ED, CBI और SEBI की जांच जारी
रिलायंस पावर और उसके कुछ अधिकारियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच जारी है। ईडी ने कंपनी की कुछ संपत्तियों को कुर्क भी किया है। इसके अलावा, SEBI द्वारा नियुक्त फॉरेंसिक ऑडिटर कंपनी के कुछ मामलों की जांच कर रहा है। इन कानूनी प्रक्रियाओं का असर भविष्य में कंपनी की वित्तीय स्थिति और निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।
34.32 करोड़ वारंट हुए रद्द
तिमाही के दौरान कंपनी द्वारा जारी किए गए 34.32 करोड़ वारंट निर्धारित समय सीमा में शेयरों में परिवर्तित नहीं किए गए। इसके चलते कंपनी ने इन वारंट्स को रद्द कर दिया और इनके बदले प्राप्त ₹30,262 लाख (करीब ₹302.62 करोड़) की राशि को जब्त (Forfeit) कर लिया।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
पहली तिमाही के नतीजे यह दिखाते हैं कि रिलायंस पावर ने मुनाफे और आय के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, कंपनी पर मौजूद कर्ज, सहायक कंपनी से जुड़ी दिवाला प्रक्रिया और ED, CBI व SEBI की जांच जैसे मुद्दे निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में कंपनी के आगामी तिमाहियों के प्रदर्शन और कानूनी मामलों में होने वाले घटनाक्रम पर बाजार की नजर रहेगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


