Trump Tariff Refund: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ अभियान को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को करीब 100 अरब डॉलर (लगभग ₹9.5 लाख करोड़) का टैरिफ वापस करना पड़ा। यह रकम उन अमेरिकी आयातकों को लौटाई गई है जिन्होंने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क का भुगतान किया था। हालांकि, प्रशासन ने साथ ही टैरिफ नीति को जारी रखने के लिए दूसरे कानूनी रास्ते भी अपना लिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लौटानी पड़ी भारी रकम
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने कई देशों से आने वाले सामान पर व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने के लिए International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का इस्तेमाल किया था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देकर आयात शुल्क बढ़ाए थे।
लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में अपने फैसले में कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को इस तरह व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार नहीं देता। अदालत के फैसले के बाद सरकार को इस कानून के तहत वसूले गए शुल्क का बड़ा हिस्सा वापस करना पड़ा।
100 अरब डॉलर का रिफंड पूरा
अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार 31 जुलाई तक IEEPA के तहत करीब 166 अरब डॉलर का टैरिफ वसूला गया था।
अब तक की स्थिति इस प्रकार है:
- कुल वसूला गया टैरिफ: 166 अरब डॉलर
- वापस की गई राशि: करीब 100 अरब डॉलर
- रिफंड में ब्याज भी शामिल
- राशि अमेरिकी आयातकों के खातों में भेजी गई
यह अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े टैरिफ रिफंड मामलों में से एक माना जा रहा है।
128.68 अरब डॉलर के रिफंड को मिली मंजूरी
अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) के एक अधिकारी के अनुसार, 31 जुलाई तक 128.68 अरब डॉलर के संभावित और प्रमाणित रिफंड को प्रोसेसिंग के लिए मंजूरी मिल चुकी थी।
इनमें से लगभग 100 अरब डॉलर का भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि बाकी मामलों की प्रक्रिया जारी है। भुगतान के लिए राशि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को भेजी गई है।
आम लोगों को नहीं मिलेगा सीधा फायदा
यह रिफंड सीधे अमेरिकी उपभोक्ताओं को नहीं दिया जा रहा है।
राशि केवल उन अमेरिकी आयातकों को लौटाई जा रही है जिन्होंने पहले अतिरिक्त टैरिफ का भुगतान किया था। इसका मतलब यह भी है कि भारत, चीन या अन्य देशों के निर्यातकों को इस रकम का कोई सीधा लाभ नहीं मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भी तय नहीं है कि कंपनियां इस रिफंड का फायदा ग्राहकों तक कम कीमतों के रूप में पहुंचाएंगी या नहीं।
ट्रंप प्रशासन ने खोज लिया दूसरा कानूनी रास्ता
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने अपनी टैरिफ नीति पूरी तरह नहीं छोड़ी है।
प्रशासन अब दूसरे कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- कुछ विशेष उद्योगों पर सेक्टर-आधारित टैरिफ
- Trade Act 1974 की धारा 301 के तहत आयात शुल्क
- अन्य व्यापारिक कानूनों के जरिए शुल्क लागू करना
इससे साफ है कि ट्रंप प्रशासन अभी भी टैरिफ को अमेरिकी व्यापार नीति का महत्वपूर्ण हथियार मानता है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
हालांकि यह रिफंड अमेरिकी आयातकों को मिला है, लेकिन इसका असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
यदि अमेरिका आगे भी दूसरे कानूनी प्रावधानों के तहत टैरिफ लागू करता है, तो भारत समेत कई निर्यातक देशों की कंपनियों को अमेरिकी बाजार में पहले जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं यदि भविष्य में टैरिफ कम किए जाते हैं, तो भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
- ट्रंप प्रशासन ने IEEPA के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए।
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इसे कानूनी सीमा से बाहर माना।
- सरकार को करीब 100 अरब डॉलर (₹9.5 लाख करोड़) लौटाने पड़े।
- पैसा अमेरिकी आयातकों को मिला, उपभोक्ताओं या विदेशी निर्यातकों को नहीं।
- इसके बाद भी प्रशासन ने दूसरे कानूनों के जरिए टैरिफ लागू रखना जारी रखा।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को अमेरिका के आयातकों को करीब 100 अरब डॉलर लौटाने पड़े, जो अमेरिकी व्यापार इतिहास के सबसे बड़े टैरिफ रिफंड में से एक है। हालांकि, इससे ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। प्रशासन ने वैकल्पिक कानूनी रास्तों के जरिए आयात शुल्क जारी रखने की रणनीति अपना ली है। आने वाले समय में इसका असर अमेरिका के साथ-साथ भारत और अन्य व्यापारिक साझेदार देशों के निर्यात पर भी देखने को मिल सकता है।


