भारतीय रुपया सोमवार (3 अगस्त) को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत शुरुआत करने में सफल रहा और पिछले सप्ताह शुरू हुई रिकवरी को आगे बढ़ाया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR स्वैप सुविधा के जरिए विदेशी मुद्रा का रिकॉर्ड इनफ्लो और केंद्रीय बैंक के लगातार हस्तक्षेप ने रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.14 पर खुला, जबकि शुक्रवार (31 जुलाई) को यह 95.39 पर बंद हुआ था। यह 7 जुलाई के बाद रुपये का सबसे मजबूत शुरुआती स्तर माना जा रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल रुपये पर दबाव कम हुआ है, लेकिन आगे इसकी दिशा कच्चे तेल, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को मिला बड़ा सहारा
रुपये की मजबूती की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह संकेत देने के बाद कि ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है ताकि परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए समय मिल सके, वैश्विक बाजार में तनाव कम हुआ।
इस बयान के बाद अक्टूबर डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड लगभग 5% टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से—
- आयात बिल घटता है।
- डॉलर की मांग कम होती है।
- चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) नियंत्रित रहता है।
- रुपये पर दबाव कम होता है।
यही वजह है कि कच्चे तेल की नरमी ने भारतीय मुद्रा को तत्काल राहत पहुंचाई।
2. RBI की FCNR स्वैप स्कीम से 40.82 अरब डॉलर का रिकॉर्ड इनफ्लो
रुपये को मजबूती देने वाला दूसरा बड़ा कारण RBI की विशेष FCNR(B) Swap Facility रही।
भारतीय रिजर्व बैंक ने जानकारी दी कि 31 जुलाई तक इस योजना के तहत कुल 40.82 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ।
इसमें शामिल हैं—
- 36.73 अरब डॉलर FCNR(B) डिपॉजिट
- 2.58 अरब डॉलर Overseas Foreign Currency Borrowings (OFCBs)
- 1.52 अरब डॉलर External Commercial Borrowings (ECBs)
यह योजना 5 जून को घोषित की गई थी और 8 जून से लागू हुई थी। इसके तहत बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा को रियायती शर्तों पर RBI के साथ स्वैप करने की सुविधा दी गई।
इस योजना का उद्देश्य है—
- विदेशी पूंजी आकर्षित करना
- विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करना
- बैंकिंग सिस्टम में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाना
- बाहरी क्षेत्र की लिक्विडिटी को बेहतर बनाना
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी विदेशी मुद्रा आमद से RBI को जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने की अधिक क्षमता मिली है।
3. RBI का लगातार हस्तक्षेप बना सबसे बड़ा सपोर्ट
फॉरेक्स बाजार के जानकारों के अनुसार RBI पिछले सप्ताह लगातार डॉलर बेचकर बाजार में उतार-चढ़ाव को सीमित करता रहा।
बैंकरों के मुताबिक पिछले सप्ताह रुपया करीब 1.2% मजबूत हुआ। यदि केंद्रीय बैंक समय-समय पर डॉलर बेचकर सपोर्ट नहीं देता तो रुपये में इतनी तेज रिकवरी संभव नहीं थी।
RBI का उद्देश्य किसी निश्चित स्तर को बनाए रखना नहीं बल्कि अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना है। इसी रणनीति ने हालिया गिरावट के बाद रुपये को संभालने में मदद की है।
बाजार की धारणा में आया बड़ा बदलाव
कुछ सप्ताह पहले तक विदेशी मुद्रा बाजार में यह आशंका जताई जा रही थी कि रुपया 97 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो सकता है।
हालांकि अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है।
- तेल की कीमतों में नरमी
- विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह
- RBI का सक्रिय समर्थन
इन तीनों कारणों से बाजार का भरोसा बढ़ा है और फिलहाल रुपये को स्थिरता मिलने की उम्मीद की जा रही है।
आगे किन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर?
हालांकि मौजूदा मजबूती के बावजूद निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण कारकों पर बनी रहेगी।
इनमें प्रमुख हैं—
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें
- अमेरिकी डॉलर इंडेक्स की चाल
- विदेशी निवेश (FII/FPI) का रुख
- RBI की हस्तक्षेप नीति
- पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव
यदि पश्चिम एशिया में तनाव दोबारा बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें उछलती हैं, तो रुपये पर फिर दबाव बन सकता है।
RBI की फॉरवर्ड बुक में भी आया बदलाव
RBI के ताजा आंकड़ों के अनुसार जून महीने में उसकी नेट फॉरेन एक्सचेंज फॉरवर्ड बुक घटकर 103.3 अरब डॉलर रह गई। यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में डॉलर से जुड़ी देनदारियां कुछ कम हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह आंकड़ा भी आने वाले महीनों में RBI की करेंसी मैनेजमेंट रणनीति को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।
निष्कर्ष
फिलहाल भारतीय रुपये को कच्चे तेल की नरमी, RBI की FCNR स्वैप स्कीम से मिले रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा प्रवाह और केंद्रीय बैंक के सक्रिय हस्तक्षेप का मजबूत सहारा मिला है। यही कारण है कि रुपया 7 जुलाई के बाद अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि आगे इसकी मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं, डॉलर कितना मजबूत रहता है और RBI बाजार में किस तरह की रणनीति अपनाता है।
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार, विदेशी मुद्रा और निवेश से जुड़े विचार बाजार विशेषज्ञों के निजी आकलन पर आधारित होते हैं। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


