भारत में सोना हमेशा से निवेश और परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। शादी-विवाह से लेकर त्योहारों तक सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है। लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि अब सोने की चमक कुछ फीकी पड़ती नजर आ रही है। कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में सोने की मांग में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council – WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग छह साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। ऊंची कीमतें, आयात शुल्क में बदलाव, कमजोर ज्वेलरी डिमांड और निवेशकों का बदलता रुझान इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
हालांकि, सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं, लेकिन ग्राहकों की खरीदारी में पहले जैसी तेजी देखने को नहीं मिल रही है।
अप्रैल-जून तिमाही में कितनी घटी सोने की मांग?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 6 फीसदी घटकर 131 टन रह गई।
सबसे ज्यादा असर ज्वेलरी सेक्टर पर देखने को मिला। इस दौरान आभूषणों की मांग करीब 15 फीसदी गिरकर 75.1 टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 88.8 टन था।
हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण सोने की खरीद पर खर्च बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान भारतीयों ने सोने की खरीद पर करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जो मूल्य के लिहाज से रिकॉर्ड स्तरों में शामिल है।
सोने की मांग घटने के 5 बड़े कारण

1. रिकॉर्ड ऊंची कीमतों ने ग्राहकों को किया दूर
सोने की कीमतें पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा रही हैं। महंगे सोने के कारण आम ग्राहकों ने भारी वजन वाले गहनों की जगह हल्के वजन और कम कैरेट वाले आभूषणों को प्राथमिकता दी।
कई खरीदारों ने कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना बेहतर समझा। यही वजह है कि कीमत कम होने के बावजूद मांग में तेज उछाल नहीं आया।
2. आयात शुल्क बढ़ने से बाजार पर असर
सोने पर आयात शुल्क में बदलाव का भी मांग पर असर पड़ा। मई के मध्य में आयात शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया, जिससे बाजार में खरीदारी की रफ्तार धीमी हुई।
आयात महंगा होने से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा और ज्वेलर्स ने भी स्टॉक खरीदारी में सावधानी बरती।
3. शादी-विवाह के कम शुभ मुहूर्त
भारत में सोने की खरीदारी का बड़ा हिस्सा शादियों से जुड़ा होता है। लेकिन अप्रैल-जून अवधि में शादी के शुभ मुहूर्त कम होने के कारण ज्वेलरी की मांग प्रभावित हुई।
शादी सीजन कमजोर रहने से सोने के आभूषणों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई।
4. निवेश के विकल्पों की ओर बढ़ रहा रुझान
अब कई निवेशक केवल सोने पर निर्भर नहीं रहना चाहते। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, गोल्ड ETF और अन्य निवेश विकल्पों की लोकप्रियता बढ़ने से सोने में पारंपरिक निवेश का हिस्सा कम हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी समय-समय पर गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम करने और बचत के दूसरे विकल्पों को अपनाने की अपील की गई है।
5. सोने से उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिला
सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, लेकिन हाल के महीनों में इसकी कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
जनवरी 2026 के अंत में एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन अब यह गिरकर करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया है।
इस तरह सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 26 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुका है। गिरती कीमतों और अस्थिर रिटर्न के कारण कुछ निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
निवेश के लिए सोने की मांग बढ़ी

जहां ज्वेलरी की मांग घटी है, वहीं निवेश के उद्देश्य से सोने की खरीदारी में मजबूती देखने को मिली।
रिपोर्ट के अनुसार:
- सोने के बार और सिक्कों की मांग 9 फीसदी बढ़कर 50.3 टन हो गई।
- भारत के गोल्ड ETF में 4.2 टन का निवेश आया।
- वैश्विक स्तर पर गोल्ड ETF से निकासी देखी गई, लेकिन भारत में निवेशकों ने इसमें रुचि दिखाई।
यह संकेत देता है कि लोग गहनों के बजाय अब सोने को एक निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
भारत में सोने का आयात भी घटा

सोने की कमजोर मांग का असर आयात पर भी पड़ा है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत का सोना आयात 23 फीसदी घटकर 98.1 टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 127.4 टन था।
वहीं, सोने की रीसाइक्लिंग में भी गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में कुल रीसाइक्लिंग 17 फीसदी घटकर 19.2 टन रह गई, जबकि पिछले साल यह 23.1 टन थी।
क्या सोने की चमक खत्म हो रही है?

सोने की मांग में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि लोगों का सोने से पूरी तरह मोहभंग हो गया है। भारत में सोना अभी भी सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण संपत्ति बना हुआ है।
हालांकि, बदलते समय के साथ लोगों का नजरिया जरूर बदल रहा है। अब ग्राहक कीमत, रिटर्न और निवेश के विकल्पों को ध्यान में रखकर फैसला ले रहे हैं।
आने वाले समय में अगर सोने की कीमतें स्थिर होती हैं और शादी-विवाह की मांग बढ़ती है तो ज्वेलरी सेक्टर में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।


