Patna IPS Shailja Das: देशभर में छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस तेज है। ऐसे माहौल में बिहार की 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी शैलजा दास का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रदर्शनकारियों के प्रति उनके शांत और संवेदनशील रवैये की लोग जमकर सराहना कर रहे हैं। आखिर कौन हैं आईपीएस शैलजा दास और क्यों उनकी चर्चा पूरे देश में हो रही है? आइए विस्तार से जानते हैं।
छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच वायरल हुआ IPS शैलजा दास का बयान
इन दिनों सोशल मीडिया पर पटना पूर्वी (ईस्ट) की सिटी एसपी और 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी शैलजा दास का एक वीडियो और बयान तेजी से वायरल हो रहा है।
हाल के दिनों में NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन का असर बिहार तक देखने को मिला। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में पटना में भी छात्रों ने बिहार बंद का आह्वान किया था। प्रदर्शन को देखते हुए शहर के कई संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई थी।
इसी दौरान मीडिया से बातचीत में शैलजा दास ने कहा,
“नागरिकों को अपनी बात रखने और अपनी राय व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। वे जो कहना चाहते हैं, कह सकते हैं। जब तक वे हम पर बल प्रयोग नहीं करेंगे, तब तक हम भी उनके खिलाफ बल प्रयोग नहीं करेंगे।”
उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर लोकतांत्रिक मूल्यों और संवेदनशील पुलिसिंग का उदाहरण बताया जा रहा है। कई यूजर्स ने कहा कि तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी उनका संतुलित रवैया सराहनीय है।
देशभर में छात्रों की पिटाई की खबरों के बीच क्यों हो रही है चर्चा?
हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग को लेकर लगातार बहस चल रही है। ऐसे समय में शैलजा दास का यह बयान लोगों को अलग संदेश देता हुआ नजर आया।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे संवाद आधारित पुलिसिंग का उदाहरण बताया। हालांकि अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियां और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां अलग होती हैं, लेकिन शैलजा दास के इस बयान को शांतिपूर्ण विरोध और संयमित पुलिस कार्रवाई के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
कौन हैं IPS शैलजा दास?
आईपीएस शैलजा दास बिहार कैडर की 2022 बैच की अधिकारी हैं। वर्तमान में वह पटना पूर्वी (East) की सिटी एसपी के रूप में कार्यरत हैं।
उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 83 हासिल की थी। परीक्षा में उनका वैकल्पिक विषय इतिहास (History) था।
प्रशासनिक और पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने अपनी कार्यशैली से संवेदनशील और जिम्मेदार अधिकारी की पहचान बनाई है।
नालंदा में भी निभा चुकी हैं अहम जिम्मेदारी
पटना में नियुक्ति से पहले शैलजा दास नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में एसडीपीओ के पद पर कार्य कर चुकी हैं।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने पर भी विशेष ध्यान दिया। यही वजह है कि उन्हें एक व्यवहारिक और संतुलित अधिकारी के रूप में देखा जाता है।
कहां से की पढ़ाई?
शैलजा दास की शुरुआती शिक्षा उनके गृह नगर में हुई।
- वर्ष 2013 में बुद्धा पब्लिक स्कूल से दसवीं पास की।
- इसके बाद दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की।
- उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक किया।
- इसके बाद UPSC की तैयारी शुरू की और वर्ष 2021 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 83वीं रैंक हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित हुईं।
छात्र प्रदर्शन के दौरान अपनाया संवाद का रास्ता
पटना में हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान शैलजा दास ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर माहौल शांत रखने का प्रयास किया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद बनाए रखने की उनकी कोशिश की भी कई लोगों ने सराहना की।
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ संवाद और संयम भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
क्यों बन रही हैं चर्चा का विषय?
शैलजा दास की चर्चा केवल उनके वायरल बयान की वजह से नहीं, बल्कि उनकी कार्यशैली को लेकर भी हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें एक ऐसी अधिकारी के रूप में देख रहे हैं जो कानून का पालन करते हुए नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने की बात करती हैं।
हालांकि किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार तय होती है, लेकिन उनका यह बयान लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और संयम के महत्व को रेखांकित करता है।
निष्कर्ष
बिहार कैडर की युवा आईपीएस अधिकारी शैलजा दास इन दिनों अपने एक बयान के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई पर चल रही बहस के बीच उनका यह संदेश कि “जब तक प्रदर्शनकारी बल प्रयोग नहीं करेंगे, तब तक पुलिस भी बल प्रयोग नहीं करेगी” लोगों के बीच सकारात्मक चर्चा का विषय बना हुआ है। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां, प्रशासनिक अनुभव और शांत कार्यशैली उन्हें बिहार पुलिस की उभरती हुई अधिकारियों में शामिल करती हैं।


