Government Disinvestment 2026: केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक 7 सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर ₹26,639 करोड़ से ज्यादा जुटाए हैं। इसमें IRFC, NHPC, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया समेत कई बड़े सरकारी उपक्रम शामिल हैं। वित्त मंत्रालय ने संसद में इसकी जानकारी दी है।
Highlights
- सरकार ने 7 सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर जुटाए ₹26,639 करोड़।
- IRFC, NHPC, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया समेत कई कंपनियां शामिल।
- ऑफर फॉर सेल (OFS) और एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए जुटाई गई राशि।
- सरकार ने कहा- विनिवेश एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
नई दिल्ली: सरकार ने 7 कंपनियों में बेची हिस्सेदारी
भारत सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश (Disinvestment) के जरिए बड़ी रकम जुटाई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर कुल ₹26,639.33 करोड़ हासिल किए हैं।
सरकार की ओर से यह जानकारी लोकसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में दी गई। सवाल तमिलनाडु के तिरुप्पुर से CPI सांसद के. सुब्बारायण और नागपट्टिनम लोकसभा क्षेत्र के सांसद वी. सेल्वराज ने पूछे थे।
सांसदों ने सरकार से पूछा था कि क्या मौजूदा वित्त वर्ष में विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए करीब ₹25,000 करोड़ जुटाए गए हैं। साथ ही यह भी पूछा गया था कि किन सरकारी कंपनियों से यह राशि प्राप्त हुई और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में तय ₹80,000 करोड़ के लक्ष्य को पूरा करने की क्या योजना है।
इन 7 सरकारी कंपनियों में सरकार ने बेची हिस्सेदारी
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार को 22 जुलाई 2027 तक ₹26,639.33 करोड़ प्राप्त हुए हैं। इसमें दो प्रमुख स्रोत शामिल हैं:
1. ऑफर फॉर सेल (OFS) से ₹20,272.40 करोड़
सरकार ने निम्नलिखित कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर राशि जुटाई:
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
- कोल इंडिया लिमिटेड
- NHPC लिमिटेड
- NLC इंडिया लिमिटेड
- जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC)
- इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC)
- कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड
इन कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से की गई।
2. एसेट मोनेटाइजेशन से ₹6,366.93 करोड़
सरकार ने सार्वजनिक संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल और मोनेटाइजेशन से भी हजारों करोड़ रुपये जुटाए हैं।
विनिवेश का लक्ष्य अब अलग से तय नहीं होता
वित्त मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 से सरकार ने विनिवेश के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय करना बंद कर दिया है।
हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ‘विविध पूंजी प्राप्तियों’ (Miscellaneous Capital Receipts) के तहत ₹80,000 करोड़ का अनुमान रखा गया है। इसमें सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन, इक्विटी निवेश से जुड़े लेन-देन और अन्य माध्यमों से मिलने वाली संभावित आय शामिल है।
सरकार ने क्यों कहा- विनिवेश के लिए तय समय सीमा संभव नहीं?
सरकार ने स्पष्ट किया कि विनिवेश कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
पंकज चौधरी ने कहा कि किसी भी विनिवेश सौदे को पूरा करना कई चीजों पर निर्भर करता है, जैसे:
- शेयर बाजार की स्थिति
- घरेलू और वैश्विक आर्थिक माहौल
- भू-राजनीतिक परिस्थितियां
- निवेशकों की रुचि
- प्रशासनिक प्रक्रिया
सरकार के मुताबिक बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर विनिवेश सौदों पर पड़ता है। इसलिए किसी भी हिस्सेदारी बिक्री के लिए पहले से निश्चित समय सीमा तय करना व्यावहारिक नहीं है।
सरकार की रणनीति: सरकारी संपत्तियों से पूंजी जुटाना
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए संसाधन जुटाने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य सरकारी कंपनियों में निजी निवेश बढ़ाना, सरकारी हिस्सेदारी को रणनीतिक स्तर तक सीमित करना और बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराना है।
IRFC, NHPC, कोल इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री इसी रणनीति का हिस्सा है।
IRFC और NHPC जैसे PSU शेयरों पर असर
सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री का असर अक्सर इन कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिलता है। OFS के जरिए हिस्सेदारी घटाने से बाजार में अतिरिक्त शेयर उपलब्ध होते हैं, जिससे कभी-कभी शेयर कीमतों पर दबाव आ सकता है।
हालांकि, लंबी अवधि में कंपनियों की वित्तीय स्थिति, मुनाफा, कारोबार विस्तार और सरकारी नीतियां शेयर प्रदर्शन के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं।
निष्कर्ष
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अब तक 7 सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर ₹26,639.33 करोड़ जुटाए हैं। IRFC, NHPC, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और कोल इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां इस सूची में शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि विनिवेश एक सतत प्रक्रिया है और इसे बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया जाता है। वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार का लक्ष्य विभिन्न माध्यमों से ₹80,000 करोड़ की पूंजी प्राप्त करना है।


