नई दिल्ली: खरीफ सीजन में धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और अन्य प्रमुख फसलों की बुवाई के साथ ही किसानों के बीच उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इस बार भी वैश्विक सप्लाई चेन में चुनौतियों और आयात को लेकर उठ रहे सवालों के बीच किसानों के मन में खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता थी। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी।
लोकसभा में रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा द्वारा दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ समय पर आयात कर उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। सरकार का कहना है कि उत्पादन, आयात और भंडारण—तीनों मोर्चों पर तैयारी की गई है ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके।
Highlights
- चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 115.72 लाख टन उर्वरक का उत्पादन।
- यूरिया का उत्पादन 71.55 लाख टन और डीएपी का 9.84 लाख टन रहा।
- अप्रैल-जून 2026 के दौरान 25.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी का आयात।
- सरकार ने खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का भरोसा दिया।
- वैश्विक सप्लाई चेन की चुनौतियों से निपटने के लिए नए आयात स्रोत विकसित किए जा रहे हैं।
पहली तिमाही में कितना हुआ उर्वरक उत्पादन?
मानसून के साथ खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही उर्वरकों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में सरकार ने उत्पादन के ताजा आंकड़े जारी किए हैं।
रसायन एवं उर्वरक मंत्री के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश में कुल 115.72 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन हुआ। इसमें:
- यूरिया: 71.55 लाख टन
- डीएपी (DAP): 9.84 लाख टन
- अन्य उर्वरकों का उत्पादन भी सामान्य स्तर पर रहा।
सरकार का कहना है कि घरेलू उत्पादन को लगातार बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सके।
पिछले वित्त वर्ष में कितना था उत्पादन?
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल उर्वरक उत्पादन 517.74 लाख टन रहा था। इस आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष में भी उत्पादन को स्थिर बनाए रखने और मांग के अनुरूप उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पहली तिमाही में कितना हुआ खाद का आयात?
घरेलू उत्पादन के साथ-साथ सरकार ने आयात के जरिए भी पर्याप्त स्टॉक तैयार किया है।
अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत ने:
- 25.08 लाख टन यूरिया का आयात किया।
- 7.11 लाख टन डीएपी (DAP) का आयात किया।
वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान:
- 103.50 लाख टन यूरिया
- 61.94 लाख टन डीएपी
का आयात किया गया था।
सरकार का कहना है कि आयात का उद्देश्य घरेलू मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना है, ताकि किसी भी राज्य में खाद की कमी की स्थिति पैदा न हो।
वैश्विक सप्लाई चेन की चुनौती से कैसे निपट रही है सरकार?
हाल के वर्षों में कई देशों में भू-राजनीतिक तनाव और शिपिंग संबंधी समस्याओं के कारण उर्वरकों की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए उर्वरक विभाग ने कई देशों में स्थित भारतीय मिशनों के साथ मिलकर नए आयात स्रोत विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार का उद्देश्य किसी एक या सीमित देशों पर निर्भरता कम करना और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
खरीफ सीजन में किसानों को खाद मिलेगी या नहीं?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- 2025-26 में कुल उर्वरक आवश्यकता: 677.18 लाख मीट्रिक टन
- 2024-25 में कुल आवश्यकता: 649.43 लाख मीट्रिक टन
यानी उर्वरकों की मांग में लगभग 4% की वृद्धि का अनुमान है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि उत्पादन, आयात और वितरण व्यवस्था को इस तरह तैयार किया गया है कि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जा सके।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन और आयात दोनों तय योजना के अनुसार जारी रहते हैं तथा राज्यों में समय पर वितरण होता है, तो खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहेगी ताकि जरूरत के समय किसानों तक उर्वरक आसानी से पहुंच सके।


