Assam News: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों के बीच असम के कैबिनेट मंत्री केशव महंत की बेटी दिबिसा महंता का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया गया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रही हैं और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस विवाद के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि किसी भी माता-पिता को उनके बालिग बच्चों के राजनीतिक विचारों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। गुवाहाटी में आयोजित ऐसे ही एक प्रदर्शन में मंत्री केशव महंत की बेटी दिबिसा महंता के शामिल होने का दावा किया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यह भी कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। हालांकि, इन दावों और वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी मंत्री या अभिभावक को उनके वयस्क बेटे या बेटी के व्यक्तिगत राजनीतिक विचारों के आधार पर ट्रोल करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं लगता कि केशव महंता की बेटी के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके पिता पर हमला करना या उन्हें ट्रोल करना सही है। हो सकता है कि उनकी बेटी की राजनीतिक सोच अपने पिता से अलग हो।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में हर बालिग नागरिक को अपनी स्वतंत्र राय रखने और अपने निर्णय लेने का अधिकार है।
अपने बेटे का उदाहरण देकर समझाई बात
हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य में उनका बेटा यदि वकील बनता है, तो संभव है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति का पक्ष रखे जिससे वह स्वयं सहमत न हों।
उन्होंने कहा,
“कल जब मेरा बेटा वकील बनेगा, तो हो सकता है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति का पक्ष रखे जिसे मैं पसंद नहीं करता। इसका मतलब यह नहीं कि उसके फैसलों के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जाए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यही सिद्धांत सभी माता-पिता पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
नारों से असहमति भी जताई
हालांकि मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वायरल वीडियो में लगाए गए कथित नारे सही हैं, तो वह उनसे सहमत नहीं हैं।
उन्होंने कहा,
“जब अगली बार मेरी उनसे मुलाकात होगी, तो मैं इस मुद्दे पर उनसे जरूर बात करूंगा और समझाने की कोशिश करूंगा कि उन्होंने जो बातें कही थीं, वे सही नहीं थीं।”
यानी मुख्यमंत्री ने एक ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर कथित नारों पर अपनी असहमति भी दर्ज कराई।
गुवाहाटी में क्यों हुआ था प्रदर्शन?
गुवाहाटी में आयोजित यह प्रदर्शन नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मंत्री केशव महंत की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
नीट विवाद के बाद बदला राजनीतिक घटनाक्रम
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया। इसी क्रम में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 37 दिनों से जारी अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की।
निष्कर्ष
असम में मंत्री की बेटी के छात्र आंदोलन में शामिल होने के कथित वीडियो ने राजनीतिक बहस को नई दिशा दी है। हालांकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने साफ कर दिया है कि किसी भी बालिग व्यक्ति के राजनीतिक विचारों के लिए उसके माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान लगाए गए कथित नारे सही हैं, तो वे उनसे सहमत नहीं हैं और इस विषय पर संबंधित छात्रा से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे।


