नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला कारोबारी सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। लगातार पांच कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब निफ्टी के 23,600 के अहम सपोर्ट लेवल पर टिकी हुई है। अगर यह स्तर कायम रहता है तो बाजार में राहत की तेजी देखने को मिल सकती है, लेकिन इसके नीचे फिसलने पर बिकवाली और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर, बीते सप्ताह सेंसेक्स 2,000 से ज्यादा अंक टूट चुका है, जिससे बाजार की धारणा कमजोर हुई है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगले सप्ताह केवल तकनीकी स्तर ही नहीं, बल्कि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे (Q1 Results) भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
लगातार पांच दिन की गिरावट से बढ़ी चिंता
भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह लगातार पांच कारोबारी दिनों तक बिकवाली देखने को मिली। इस दौरान सेंसेक्स करीब 2,092 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 12 जून के बाद पहली बार अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। शुक्रवार को भी निफ्टी करीब 102 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ और सप्ताह का समापन कमजोर नोट पर हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि लगातार गिरावट के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और अब बाजार तकनीकी रूप से बेहद संवेदनशील स्थिति में पहुंच गया है।
क्रूड ऑयल ने बढ़ाई बाजार की मुश्किलें
बीते सप्ताह मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ता है।
महंगे कच्चे तेल से—
- महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
- कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
- सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
- रुपये पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
यही वजह है कि ऊर्जा कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।
तिमाही नतीजों और रुपये की कमजोरी का असर
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ बड़ी कंपनियों के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों ने भी बाजार की धारणा पर नकारात्मक असर डाला। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी रही।
रुपया कमजोर होने से विदेशी निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है और आयात आधारित कंपनियों की लागत भी बढ़ जाती है। साथ ही सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां और बढ़ते ऊर्जा खर्च ने भी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ाया।
चार्ट्स दे रहे हैं कमजोरी के संकेत
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी पिछले सप्ताह अपने कंसोलिडेशन जोन से नीचे निकल गया। इसके बाद शुक्रवार को बिकवाली और तेज हुई और इंडेक्स 23,600 के करीब पहुंच गया।
उन्होंने बताया कि निफ्टी अब 50-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के नीचे कारोबार कर रहा है। तकनीकी विश्लेषण में इसे शॉर्ट टर्म कमजोरी का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
उनके अनुसार फिलहाल बाजार में खरीदारी की ताकत कमजोर दिखाई दे रही है और ऊंचे स्तरों पर लगातार मुनाफावसूली देखने को मिल रही है।
वीकली चार्ट भी नहीं दे रहे राहत
रूपक डे का कहना है कि वीकली चार्ट भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत नहीं दे रहे हैं। पिछले चार सप्ताह से निफ्टी हर बार 50-डे EMA के ऊपर टिकने में नाकाम रहा है।
इसका मतलब यह है कि जैसे ही बाजार ऊपर जाने की कोशिश करता है, निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं। ऐसे में तेजी की गति लगातार कमजोर होती जा रही है।
अगले सप्ताह 23,600 रहेगा सबसे अहम स्तर
टेक्निकल एनालिस्ट्स का मानना है कि अगले सप्ताह 23,600 का स्तर बाजार के लिए निर्णायक साबित होगा।
यदि निफ्टी इस स्तर के नीचे बंद होता है, तो बाजार में एक नई गिरावट का दौर शुरू हो सकता है। ऐसी स्थिति में घबराहट में बिकवाली बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि यदि यह स्तर बचा रहता है तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है और बाजार रिकवरी की कोशिश कर सकता है।
24,000 के ऊपर लौटना होगा जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में मजबूती की वापसी के लिए निफ्टी का 24,000 के ऊपर टिकना बेहद जरूरी होगा।
इसके बाद ही इंडेक्स 24,200 की ओर बढ़ने की कोशिश कर सकता है। जब तक निफ्टी 24,000 के ऊपर स्थायी बढ़त नहीं बनाता, तब तक बाजार का शॉर्ट टर्म ट्रेंड कमजोर माना जाएगा।
शुक्रवार की रिकवरी ने दी थोड़ी उम्मीद
हालांकि पूरे सप्ताह दबाव बना रहा, लेकिन शुक्रवार को निचले स्तरों से आई खरीदारी ने निवेशकों को कुछ राहत जरूर दी।
HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी के अनुसार शुक्रवार को निफ्टी ने निचले स्तरों पर एक मजबूत ग्रीन कैंडल बनाई, जो इस बात का संकेत है कि इन स्तरों पर कुछ निवेशक खरीदारी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि यह खरीदारी अगले सप्ताह भी जारी रहती है तो बाजार में राहत की तेजी देखने को मिल सकती है।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है 23,600 का सपोर्ट?
नागराज शेट्टी के मुताबिक 23,600 केवल एक सामान्य तकनीकी स्तर नहीं है।
इसके पीछे कई तकनीकी कारण हैं—
- यह 15 जून को बने अपसाइड गैप के आसपास स्थित है।
- इसी स्तर पर एक महत्वपूर्ण असेंडिंग ट्रेंड लाइन मौजूद है।
- यहां से पहले भी बाजार को सपोर्ट मिल चुका है।
ऐसे में यदि यह स्तर कायम रहता है तो निफ्टी निकट अवधि में 24,200 तक की रिकवरी दिखा सकता है। हालांकि ऊपरी स्तरों पर फिर से बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है।
अगले सप्ताह किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
अगले सप्ताह निवेशकों को इन प्रमुख फैक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए—
- निफ्टी का 23,600 का सपोर्ट लेवल
- 24,000 और 24,200 का रेजिस्टेंस जोन
- ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- प्रमुख कंपनियों के Q1 तिमाही नतीजे
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री
- डॉलर-रुपया विनिमय दर
- वैश्विक बाजारों और मिडिल ईस्ट से जुड़े घटनाक्रम
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता बरतना बेहतर रहेगा। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को तकनीकी स्तरों पर नजर रखनी चाहिए, जबकि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए। यदि 23,600 का स्तर मजबूत बना रहता है तो बाजार में रिकवरी की संभावना बनी रहेगी, लेकिन इसके नीचे जाने पर गिरावट और गहरी हो सकती है।
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज की राय उनके व्यक्तिगत विश्लेषण पर आधारित होती है। NewsJagran किसी भी निवेश सलाह की पुष्टि नहीं करता। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।


