नई दिल्ली: भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस (Infosys) को फ्रांस में श्रम नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ा झटका लगा है। फ्रांस की सरकारी श्रम प्राधिकरण DRIEETS Île-de-France ने कंपनी पर €175,000 (1.75 लाख यूरो) का जुर्माना लगाया है। जांच में पाया गया कि कंपनी का कर्मचारियों के वर्किंग आवर्स (काम के समय) को रिकॉर्ड करने वाला सिस्टम फ्रांस के श्रम कानूनों के अनुरूप नहीं था।
हालांकि, इन्फोसिस ने स्पष्ट किया है कि इस जुर्माने का उसके वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार या परिचालन पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ेगा।
क्यों लगा Infosys पर जुर्माना?
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना के मुताबिक, फ्रांस की श्रम एवं रोजगार से जुड़ी सरकारी एजेंसी DRIEETS Île-de-France (Regional and Interdepartmental Directorate for the Economy, Employment, Labour and Solidarity) ने जांच के दौरान पाया कि कंपनी का वर्किंग टाइम रिकॉर्डिंग सिस्टम फ्रांसीसी श्रम कानूनों की आवश्यकताओं को पूरी तरह पूरा नहीं करता।
जांच में निम्न कमियां सामने आईं—
- कर्मचारियों के काम के घंटे रिकॉर्ड करने की प्रणाली पर्याप्त विश्वसनीय नहीं थी।
- रिकॉर्ड का ऑडिट (Audit Trail) प्रभावी तरीके से नहीं किया जा सकता था।
- निगरानी (Monitoring) व्यवस्था में भी खामियां पाई गईं।
- कर्मचारियों की कुछ विशेष श्रेणियों के लिए रिकॉर्डिंग सिस्टम कानूनी मानकों पर खरा नहीं उतरा।
इन्हीं कारणों से फ्रांसीसी अथॉरिटी ने कंपनी पर €175,000 का जुर्माना लगाया।
कब मिली कंपनी को सूचना?
इन्फोसिस ने बताया कि उसे इस आदेश की आधिकारिक जानकारी 24 जुलाई 2026 को प्राप्त हुई। इसके बाद कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को इसकी सूचना दी।
Infosys का क्या कहना है?
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह मामला केवल फ्रांस में लागू श्रम कानूनों के अनुपालन से जुड़ा है और इसका कंपनी के वैश्विक कारोबार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
इन्फोसिस के अनुसार—
- जुर्माने की राशि कंपनी के आकार की तुलना में बहुत छोटी है।
- इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति या परिचालन पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- सूचना सार्वजनिक करने में हुई देरी इसलिए हुई क्योंकि कंपनी पहले पूरे मामले के तथ्यों की पुष्टि और आगे की कानूनी प्रक्रिया का मूल्यांकन कर रही थी।
फ्रांस के श्रम कानून क्यों हैं सख्त?
फ्रांस में कर्मचारियों के वर्किंग आवर्स और ओवरटाइम को लेकर बेहद कड़े नियम हैं। कंपनियों के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है कि कर्मचारियों के काम के घंटे सटीक, पारदर्शी और सत्यापित किए जा सकें। यदि रिकॉर्डिंग सिस्टम इन मानकों पर खरा नहीं उतरता तो नियामक कार्रवाई और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस और स्थानीय नियमों के अनुपालन से जुड़ा है। चूंकि इन्फोसिस ने स्वयं कहा है कि जुर्माने का उसके वित्तीय परिणामों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं होगा, इसलिए निवेशकों के लिए फिलहाल इसे बड़ा वित्तीय जोखिम नहीं माना जा रहा है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर काम करने वाली कंपनियों के लिए अलग-अलग देशों के श्रम कानूनों का सख्ती से पालन करना बेहद आवश्यक है।
निष्कर्ष
इन्फोसिस पर फ्रांस में लगाया गया €175,000 का जुर्माना कंपनी के वर्किंग टाइम रिकॉर्डिंग सिस्टम में पाई गई तकनीकी और अनुपालन संबंधी कमियों के कारण लगाया गया है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि इस कार्रवाई से उसके कारोबार या वित्तीय प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। फिर भी यह मामला वैश्विक कंपनियों के लिए स्थानीय श्रम कानूनों का पूरी तरह पालन करने की अहमियत को एक बार फिर उजागर करता है।


