Crude Oil Price Today: मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को ब्रेंट और WTI क्रूड में 4% तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, पूरे सप्ताह के प्रदर्शन पर नजर डालें तो दोनों प्रमुख बेंचमार्क मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार अब अमेरिका-ईरान तनाव, चीन की मध्यस्थता की कोशिशों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
शुक्रवार को 4% तक टूटा क्रूड ऑयल
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई।
- ब्रेंट क्रूड 3.91 डॉलर (3.88%) टूटकर 96.78 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
- इससे पहले ब्रेंट लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा था, जो मई के बाद पहली बार देखने को मिला था।
- WTI (West Texas Intermediate) 2.88 डॉलर (3.12%) गिरकर 89.31 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
हालांकि शुक्रवार की गिरावट के बावजूद पूरे सप्ताह के दौरान:
- ब्रेंट क्रूड करीब 10% मजबूत रहा।
- WTI क्रूड में भी करीब 8.27% की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की गई।
सप्ताह की शुरुआत में क्यों आया था जबरदस्त उछाल?
इस सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण रहे।
- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव।
- मिसाइल हमलों की घटनाएं।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में कमी।
- यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले।
- वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका।
इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आया।
चीन की पहल से बदला बाजार का मूड
शुक्रवार को बाजार का रुख उस समय बदल गया जब अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिशों की खबरें सामने आईं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की शांति पहल के बाद पाकिस्तान भी दोनों देशों के बीच संवाद शुरू कराने के विकल्पों पर काम कर रहा है। करीब पांच महीने से बंद पड़ी वार्ता को फिर से शुरू कराने की कोशिशों ने निवेशकों को राहत का संकेत दिया, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई।
पाकिस्तान के सामने संतुलन की चुनौती
पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में बेहद संवेदनशील स्थिति में है।
एक तरफ उसका करीबी सहयोगी सऊदी अरब है, जिससे उसे आर्थिक और रक्षा सहयोग मिलता है। दूसरी ओर पाकिस्तान के ईरान के साथ भी सीमा और रणनीतिक संबंध हैं।
हाल ही में हूती विद्रोहियों के हमलों की पाकिस्तान ने आलोचना की थी। ऐसे में यदि वह अमेरिका-ईरान वार्ता में ईरान के ज्यादा करीब दिखाई देता है, तो सऊदी अरब के साथ उसके संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
चीन क्यों चाहता है कि तनाव जल्द खत्म हो?
चीन मिडिल ईस्ट में स्थिरता का सबसे बड़ा समर्थक माना जा रहा है।
इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि:
- चीन की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से पूरा होता है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं।
- लंबे समय तक तनाव रहने से वैश्विक सप्लाई चेन और व्यापार प्रभावित हो सकता है।
इसी कारण चीन लगातार क्षेत्र में तनाव कम कराने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
JPMorgan ने दी नई चेतावनी
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक JPMorgan का कहना है कि यदि तेल सप्लाई में बाधा का हर अतिरिक्त महीना जारी रहता है तो:
- ब्रेंट क्रूड की कीमत 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल और बढ़ सकती है।
- यदि संकट लगातार तीन महीने तक बना रहता है, तो ब्रेंट क्रूड का औसत भाव करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
Goldman Sachs का बड़ा अनुमान
Goldman Sachs ने भी चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो:
- ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
हालांकि बैंक का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव धीरे-धीरे कम होता है तो:
- 2026 की चौथी तिमाही में ब्रेंट का औसत भाव करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है।
- अगले वर्ष यह 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ सकता है।
फिर भी बैंक ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में शिपिंग बाधित रहने का जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
यदि क्रूड ऑयल फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर टिकता है, तो:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
- महंगाई में तेजी आ सकती है।
- आयात बिल बढ़ सकता है।
- रुपये पर दबाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि यदि चीन की मध्यस्थता सफल रहती है और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता है, तो आने वाले महीनों में तेल बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई राय और अनुमान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स एवं ब्रोकरेज संस्थानों के आकलन पर आधारित हैं। निवेश या ट्रेडिंग से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


